क्यों जिन्दा जलाई गई शिवा हासमी

बर्दिया जिले की गुलरिया में रहने वाली शिवा हासमी को जिन्दा जलाए जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। बर्दिया में जलाई गई शिवा का इलाज नेपालगंज में नहीं होने के कारण उसे काठमाण्डू लाया गया लेकिन ९० प्रतिशत से अधिक जल चुकी शिवा को दवा और दुआ दोनों काम नआई। शिवा हासमी की मौत पर राजनीति भी खूब हर्ुइ। मीडिÞया ने इस मुद्दे को भी खूब उछाला लेकिन जैसे ही उसने दम तोडÞ दिया वैसे ही इस खबर ने भी दम तोडÞ दिया। आखिर इस बेरहम हत्याकाण्ड के पीछे की असली कहानी क्या है – क्या वाकई में कहानी वही है जो कि शुरू में मीडीया में आई। क्या कहानी वही है जो शिवा के घर वालों ने मीडिया को या पुलिस वालों को बताई –

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बर्दिया जिले की गुलरिया में रहने वाली शिवा हासमी

शायद कहानी वह नहीं है जो बाहर आई। यह कोई प्रेम प्रसंग या एकतरफा प्रेम के कारण की गई हत्या भी नहीं है जैसा कि पुलिस को बयान दिया गया। या फिर जैसा शिवा के घर वालों ने बताया। तो सवाल यह उठता है कि क्या उस व्यक्ति को जानबूझ कर फंसाया जा रहा है जिसके ऊपर शिवा पर पेट्रोल छिडÞक कर हत्या करने का संगीन आरोप लगा है – इस घटना पर जब दबाब बढÞा तो राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्थलगत निरीक्षण किया और जो तथ्य सामने आई वे वाकई में चौंकाने वाले थे। महिला आयोग ने पत्रकार सम्मेलन में सीधे-सीधे इस मामले का रूख यह कहते हुए पलट दिया कि शिवा को जिन्दा जलाकर मारने में उसके परिवार वालों का भी हाथ है। पुलिस को भी आशंका उसी तरफ है। इन सबके बीच हिमालिनी ने भी अपनी तरफ से इस मामले की पूरी तह तक जाने के लिए शिवा के घर वालों से लेकर उसके पास पडÞोस और घटनास्थल तक का जायजा लिया और यह लगा कि राष्ट्रीय महिला आयोग जो इल्जाम लगा रही है उस में सच्चाई है।
मार्ग २२ गते सुबह साढे ६ बजे के करीब १९ वषर्ीया शिवा हासमी के शरीर में आग लगाई गई थी। स्थानीय अस्पताल में उपचार नहीं होने के बाद काठमाण्डू के वीर अस्पताल में इलाज के लिए उसे लाया गया। उपचार के ही क्रम में ५ दिनों तक जिन्दगी और मौत के बीच जूझती हर्ुइ शिवा हासमी ने अपना दम तोडÞ दिया। हासमी के तथाकथित प्रेमी और उसका पडÞोसी बाबूखान के ऊपर शिवा पर पेट्रोल छिडÞकर मारने का आरोप लगा। शिवा के परिवार वालों के कहने पर पुलिस ने बाबूखान को तुरन्त हिरासत में ले लिया। लेकिन पुलिस की छानबीन और महिला आयोग की छानबीन से भी शिवा पर उसके ही परिवार वालों के द्वारा आग लगाए जाने की आशंका बढÞती ही जा रही है। आसपास के लोगों के बयान और चश्मदीदों के बयान पर पुलिस की आशंका को और अधिक बल मिल रहा है। बाद में पुलिस ने शिवा की माँ और उसके बडे भाई को भी नियंत्रण में लिया। और उन लोगों से कडर्Þाई के साथ पूछताछ कर रही है। उसका एक भाई अभी तक फरार बताया जा रहा है।
बर्दिया के जिला प्रहरी कार्यालय से करीब ५०० मीटर की दूरी पर है, हासमी का घर। मुस्लिम टोल के रूप में परिचित इस गांव में कच्ची सडÞक के एक तरफ हासमी का परिवार रहता है तो दूसरी तरह बाबूखान रहा करता था। हासमी अपने पक्के एक मंजिले मकान में अपने परिवार वालों के साथ रहती थी। जबकि बाबू खान किराए के मकान में रहा करता था। तंग गलियां और आसपास कुछ और मकान होने के कारण हासमी के आंगन में उसके घर के भीतर से ही जाने का एक मात्र रास्ता है। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार घटना के दिन सुबह साढे ६ बजे ही शिवा हासमी अपने आंगन की तरफ दौडÞी थी, जब उसका शरीर आग से झुलस रहा था। वहीं कंपाऊण्ड में गंदगी की ढेर में गिर कर वह अपने शरीर पर लगी आग को बुझाने की कोशिश करती देखी गई।
घर के पीछे रहे कंपाउण्ड के भीतर एक स्थान पर कच्चे इंटों से बनी कमजोर दीवार दिखाई देती है, जिसके पास ही एक प्लाष्टिक का बट्टा भी है। यही वह स्थान है जहां से बाबूखान के द्वारा हासमी पर पेट्रोल छिडक कर आग लगाए जाने का दावा उसके परिवार वालों ने लगाया। लेकिन उस दीवार के बाहिरी हिस्से में गंदे पानी का जमाव दिखाई दिया, जिस पर किसी का भी चलना काफी मुश्किल हो सकता है। और आसपास के लोग तथा पुलिस ने भी यह बताया कि इस घटना के तुरन्त बाद नियंत्रण में लिए गए बाबूखान के ना तो शरीर पर और ना ही उसके पैर पर गंदगी का कोई निशान था। उसके घर की तलाशी भी ली गई लेकिन वहां से भी कोई भी शंकास्पद कपडÞे उसे नहीं मिले।
शिवा के परिवार वालों के दावे पर यकीन करें तो जिस जगह से बाबू खान ने शिवा के शरीर पर पेट्रोल छिडक कर आग लगाई, वहां पास ही पानी के जमा होने से शिवा अपने बचाव के लिए उसमें कूद सकती थी। यदि उसने ऐसा किया होता तो उसका शरीर सिर्फ५ प्रतिशत ही जलता। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगने पर काफी देर के बाद शिवा को अपने घर के पीछे रहे कंपाउण्ड में आने और चीख पुकार की आवाज सुनाई दी थी। उसी कंपाउण्ड में एक चापा कल भी है। यदि मान लिया जाए कि बाबूखान ने ही आग लगाई तब भी तुरन्त चापाकल की सहायता से उसके शरीर पर लगी आग पर काबू पाया जा सकता था।
जिस समय इस दर्दनाक घटना को अंजाम दिया गया, उस समय हासमी के घर में बाल्टियों सहित कई अन्य बर्तनों में भी पानी भर के रखा हुआ था। लेकिन उसका भी प्रयोग नहीं होने से शक की र्सर्ूइ बार बार हासमी के परिवार वालों पर जा कर अटक जा रही है। हासमी का घर एक मंजिला होने के कारण उसके किस कमरे में या कंपाऊण्ड में क्या हो रहा है इसका पता आसानी से चल जाता है। जिस समय यह घटना हर्ुइ उस समय घर में हासमी के पिता के अलावा परिवार के अन्य सदस्य के अलावा एक मेहमान के आने की सूचना भी पुलिस को है। क्योंकि घटना की एक रात पहले ही वह मेहमान आया था जिसका मोटरर्साईकिल वहां लगा था और वारदात के कुछ देर के बाद ही वह मेहमान अचानक ही वहां से अपना मोटरर्साईकिल लेकर कहीं चला गया। इतने लोगों के रहने के बावजूद अपनी मां बाप की एकलौती बेटी और चार भाईयों की एकलौती बहन को भला कोई बाहर वाला कैसे उनके ही कंपाउण्ड के भीतर आग से जिन्दा जला सकता है – ऐसे कई कारण है जिससे यह लगता है कि इस हत्याकाण्ड में हासमी परिवार की संलग्नता से इंकार नहीं किया जा सकता है।
शिवा को जिन्दा जलाए जाने के दो दिन पहले ही हासमी परिवार ने बाबूखान को पुलिस के हवाले किया था। और आगे से कोई भी फोन काँल, एसएमएस या शिवा से मुलाकात नहीं करने की शर्त पर पुलिस ने उसे छोड दिया था। इस घटना के राष्ट्रीय मुद्दा बनने और सभी तरफ से सिर्फबाबूखान को ही दोषी ठहराए जाने और पूरे मामले को तोडÞ मरोडÞ कर पेश किए जाने के बाद एक स्थानीयवासी ने हासमी के परिवार वालों पर ही हत्या का आरोप लगाते हुए नामजद अभियुक्त बनाया और अलग से शिकायत दर्ज की। इसी आधार पर शिवा की माँ हसीना हासमी और उसके बडे भाई शुद्ध हासमी को नियंत्रण में ले लिया। यह शिकायत करने वाले आरिस अहमद बताते हैं कि शिवा हासमी और बाबू खान के बीच एक तरफा प्रेम नहीं था बल्कि दोनों के बीच अच्छे रिश्ते थे। प्रेम की आग दोनों तरफ लगी थी। इसी कारण दोनों के बीच मोबायल पर बातचीत और मैसेज आदान-प्रदान होता था। इस बात की भनक लगते ही शिवा के पिता ने उसके साथ काफी मारपीट की और भला बुरा कहा। उन दोनों के बीच के प्रेम संबंधों का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता ने पुलिस के समक्ष फोन पर दोनों के बीच हर्ुइ बातचीत की रिकार्ँर्डिंग भी सौंपी है। शिवा और बाबूखान के बीच एक संवाद में शिवा ने बाबू खान को यह कहते हुए सुना गया कि उसके परिवार वाले दोनों की शादी के खिलाफ हैं और उसे मारने की योजना बना रहे है। शिवा बाबूखान से कहती है कि वह जल्दी से उसे भगा कर और कई न ले गया और शादी नहीं की तो उसके परिवार वाले उसे मार देंगे। वह रोते हुए बाबूखान से कहती हैं उसके घर वाले रोज ही उसकी पिर्टाई करते हैं और जान से मारने की धमकी देते हैं। साथ ही वो तुमको भी नहीं छोडेंगे। मुझे बहुत डर लग रहा है। तुम मुझे लेकर जल्द ही भाग जाओ वर्ना हम दोनों ही मारे जाएंगे। शिवा ने यहां तक कहा कि यदि तुम मुझे लेकर नहीं भागे तो मेरे बाप भाई मेरी हत्या कर तुम्हें हत्या के इल्जाम में फंसाने की योजना बना रहे हैं।
शिवा की हत्या होने से पहले बाबूखान और शिवा के बीच हर्ुइ करीब १५ मिनट की इस बातचीत का रिकार्ँड पुलिस के पास है और पुलिस इस प्रमाण की प्रमाणिकता की जांच में जुट गई है। यदि इस तरह का संवाद वाकई में हुआ है तो यह मामला एकतरफा प्रेम में नाकामयाबी में किया हुआ नहीं बल्कि परिवार की प्रतिष्ठा बचाने के लिए किया गया आँनर किलिंग का मामला बन जाएगा।
इस घटना की एक चश्मदीद और शिवा की पडोस में रहने वाली शिखा मण्डल ने कहा कि जब सुबह वह दांत साफ करने के लिए चापा कल पर गई तो उसने हासमी परिवार के घर के भीतर से चीखने चिल्लाने की आवाज सुनी और थोडी ही देर में उसने देखा कि शिवा पूरी तरह से आग की लपटों में घिरी थी और अपने आपको बचाने का प्रयास करती हर्ुइ अपने कंपाऊण्ड में मौजूद पानी के जमे हुए एरिये में खुद को गिरा दिया ताकि आग बुझ सके।
इसी तरह एक अंसारी सरनेम रही एक और लडकी ने बताया कि सुबह सुबह उसने शिवा को बचाओ बचाओ चिल्लाते हुए अपने ही घर से बाहर निकलती देखी। अंसारी ने कहा कि आगे का दरवाजा बन्द था। इसलिए उसकी चीख सुनने के बाद भी कोई भी उसकी मदत के लिए नहीं जा सकता था। लेकिन उसके परिवार के सभी लोग घर के भीतर ही थे। वह घर के भीतर से चीख पुकार करते हुए निकली और सामने जलमग्न क्षेत्र में गिर पडÞी।
उधर बाबूखान की मां बेबी खान और बहन सीमा खान का कहना है कि जिस समय यह घटना हर्ुइ उस समय बाबू खान घर में अपने कमरे में ही सो रहा था। उसके पडोसियों को भी लग रहा है कि बाबूखान को एक सोची समझी षड्यंत्र के तहत फंसाया जा रहा है। और शिवा के घर वाले जानबूझ कर मामले को हत्या का रूप देते हुए उसकी हत्या के लिए बाबूखान को फंसा रहे हैं।
शिवा हासमी के भाई तनवीर ने अपने पडोसियों पर ही आरोप जडÞ दिया है। उसका कहना है कि गांव वाले उलटे उन्हें ही फंसा रहे हैं। उनका कहना है कि राप्रपा नेपाल की राजनीति में लगे उनके बडे भाई रिजवान हासमी का राजनीतिक कैरियर खत्म करने के लिए परिवार वालों के खिलाफ इस तरह के आरोप लगए जा रहे हैं। हत्या के लिए शिवा हासमी के बडे भाई जो कि अभी तक फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसके खिलाफ वारण्ट भी जारी कर चुकी है। रिजवान राप्रपा नेपाल के युवक संगठन का केन्द्रीय सदस्य है। परिवार वाले बता रहे हैं कि पार्टर्ीीे काम से काठमाण्डू में ही रहने के कारण वह पुलिस के समक्ष हाजिर नहीं हो पा रहा है।
इस मामले की तहकीकात में जुटी पुलिस का कहना है कि वो हर कोण से जांच कर रही है और दोषी जो भी हो उसको कानून के दायरे में लाकर सजा दिला कर रहेगी।

बाल मन्दिर में बलात्कार

 

ब्रिटिश महिला शिला एण्डरसन काठमाण्डू की धूल भरी सडकों की खाक छानते छानते थक गई। यहां के सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाते लगाते उसके शरीर में तो थकावट थी ही साथ ही उसका मन भी बुरी तरह से थक चुका था। महिला हिंसा के खिलाफ सरकार पर दबाब पडते समय ब्रिटिश महिला शिला अपने दर्द को बयां करने में नहीं हिचकी।
उसने बताया कि गत भाद्र १३ गते बाल संगठन के बाल मंदिर से एक पांच वषर्ीया दृष्टिविहीन बालिका को विधिवत धर्मपुत्री बनाने की प्रक्रिया पूरी हो गई। धर्मपुत्री बनाने के सरकारी प्रक्रिया के दौरान शीला को एक घोर शंका ने घेरा। उस पांच साल की बच्ची के ऊपर बाल मन्दिर के भीतर ही किसी ने यौन दुराचार किया था।
गैर सरकारी संस्था सिविस की पहल पर उसका त्रिवि स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान अर्न्तर्गत विधि विज्ञान विभाग में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भेजा गया। विभाग ने जो रिपोर्ट दी वह चौंकाने वाली और दर्दनाक थी। अस्पताल ने बताया कि उस मासूम बच्ची के यौनांग पर काफी गम्भीर घाव हैं, जो कई बार उसके साथ जबर्दस्ती करने के सबूत हैं। इतना ही नहीं डाँक्टरों ने यह भी बताया कि उस बच्ची के साथ एक बार दो बार नहीं बल्कि कई बार बलात्कार किया गया है।
सिविस ने अपने तरीके से जांच कर पता लगाया तो उन्हें मालूम चला कि एक दाई -भैया) कहने वाले शख्स ने उसके साथ वह घिनौनी हरकत की थी। इतना होते हुए भी इस घटना की जानकारी पुलिस के पास किसी ने देने की जहमत नहीं उर्ठाई। शीला का दावा है कि बाल मन्दिर प्रशासन की तरफ से मामले को अब तक दबा कर रखा गया।
इस घटना से पूरी तरह हिल चुकी शीला ने काफी धर्ैयता दिखाते हुए उस मासूम बच्ची को अपने साथ रखा। उसे पूरी तरीके से विश्वास में लेने लगी और इस यौन दर्ुर्व्यवहार के बारे में पूरी तरह से जानकारी ली। बाद में खुद शीला ही इस शिकायत को पुलिस के पास लेकर गई लेकिन पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट आने के ३५ दिन की समय सीमा समाप्त हो जाने के कारण ही इसे दर्ज करने से इंकार कर दिया। उसने कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए। पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों से उसने मुलाकात भी की। लेकिन कहीं से उसकी कोई भी सुनवाई नहीं हर्ुइ।
आखिरकार शीला ने इस मामले में न्याय पाने और उस मासूम बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले दोषियों के खिलाफ कडÞी कार्रवाही के लिए र्सवाेच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उसे विश्वास है कि अदालत इस मामले में इंसाफ अवश्य करेगी। लण्डन के एक प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका रही शीला की नजर जब इस मासूम दृष्टिविहीन बच्ची पर पडी तब उसके कोमल हृदय ने उसे स्वीकार करने और उसे मां का प्यार देने का फैसला किया था। यह करीब डेढÞ साल पहले की घटना है। एक साल लगाकर उसने उस मासूम बच्ची को गोद लेने की सारी प्रक्रिया को पूरा किया। लेकिन इसके साथ ही उसके संघषर्ाें का दौर शुरू हो गया।
शीला ने ठान लिया है कि वह उस मासूम बच्ची को इंसाफ दिलाकर ही रहेगी। शीला ने कहा कि वह एक साधारण महिला है। और उसकी बेटी के साथ हुए घोर अन्याय के विरूद्ध लडने की असाधारण धर्ैय उस में है। उसकी ख्वाहिश है इस जनवरी में जब वह अपना ६ठा जन्मदिन मनाए, तब उसको इंसाफ मिल जाए। पिछले एक साल से अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए उसने अपनी कमाई के सारे पैसे खर्च कर डÞाले। नेपाल में उसको जानने वाला या उसका सहयोग करने वाला कोई नहीं है। वह कहती है कि कभी-कभी दिल करता हंै कि वह किस पचडÞे में फंस गई है लेकिन जब भी उसके मन में ऐसा ख्याल आता है उसके सामने उस मासूम अन्धी बच्ची का चेहरा घूम जाता है जो बिना कुछ कहे भी उससे इंसाफ दिलाने की गुहार मांगती नजर आती है। और उसका दिल पसीज जाता है। िि
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