क्षेत्रीजी,तयार रहें, मधेशी जेल भरो आन्दोलन करने ही बाला है : कैलाश महतो

कैलाश महतो, पराशी,१४ मार्च |
सेना के इतिहासों को देखें तो पाषाण काल में रहे मानवरुपी ईश्वर तथा प्राचीन राजा महाराजाओं के दरबारों से लेकर मध्य और आधुनिक काल के शासकों तक ने भी इसकी व्यवस्था की है ।

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मध्य और आधुनिक राज्यों को सुरक्षा देने हेतु ग्रीक बायोग्राफर प्ल्यूटर्क के अनुसार इसकी निर्माण प्राचीन रोम से माना जाता है । वैसे इसकी निर्माण तिथि को इतिहासकारों ने उल्लेख करना छोड दिया है । परन्तु रोम्यूलस के मूल नेतृत्व में इसकी निर्माण होने का दावा इतिहासकारों का है । इसकी निर्माण काल से ही इसमें संगठन, अनुशासन तथा अपने कार्य के प्रति वफादारिता काफी मजबूत रहने की प्रमाण मिलती है । इसने रोम के विशाल साम्राज्य के सीमाओं को रक्षा करने तथा उसके सीमाओं को मेडिटेरेनिअन के संसार या उससे भी विशाल भू–भागों पर आधिपत्य जमाने तथा रक्षा करने की अहम् जिम्मेबारी को पूरा किया था ।
रोमन इतिहासकार लिभी-Livy_ के अनुसार वह सेना ग्रीक जनता के पूरे जन विश्वास पर आधारित नागरिकों की सामाजिक मान्यताओं को भी साथ देकर देश की सीमाओं को रक्षा करती थी । राजा सर्वियस ट्यूलियस ने (c. 580-530 BCE ) रोमन जनता को छः (६) प्रकार के सम्पतियों के विवरण उपलब्ध कराते हुए विपन्न लोगों को सेना में नहीं रखने का एलान किया । बाद में रोमन सेना (legion) को पोलिबियस (Polybius) ने (150-120 BCE ) नेतृत्व दिया, जिसे म्यानिप्यूलर सेना Manipular legion) भी कहा जाता है । वह सेना संभवतः ४थी शदी के मध्य में अच्छी खासी विकास कर चुकी थी । sena
हम खस नेपाली सेना की बात करें तो इस सेना की इतिहास सन् १८१४ और १८१६ में एंगलो–नेपाली लडाई से पहले का इतिहास ठीक से उपलब्ध नहीं हो पाता है । वैसे सन् १५५९ में गोर्खा राज्य का स्थापना होने का इतिहास और संभवतः राजा राम शाह के नेतृत्व में सन् १६३३ में गोर्खा राज्य का बिस्तार होने की घटना उपलब्ध है । सन् १७४३ में गोर्खा के राजगद्दी पर पृथ्वीनारायण शाह के राज्यरोहण के बाद संगठित सेना की निर्माण हुई । मगर वह गोर्खा सेना थी, नेपाली सेना नहीं । संगठित सेना की बात करें तो मधेश के सम्पूर्ण राजाओं के साथ साथ पर्वतीय राज्यों में राज कर रहे मधेशी राजाओं के पास संगठित सेना थी, जिसे प्रत्यक्ष लडाई में गोर्खाली सेना ने कभी नहीं जित पायी ।
ल से प्रमाणित होता है । वे शिक्षित भले आदमी के प्रतिक लगते हैं । अपने पद पर रहकर राजनीतिक भाषा, उसमें भी मधेश को चिढाने बाली बोली तो बोलना उनके पदीय मर्यादा को भंग करने जै

“बन्दुक पकडे तो हबल्दार हो गए” बाली बात कम से कम नेपाली सेना के प्रधान सेनापति रहे राजेन्द्र क्षेत्री जी के न तो चेहरे से, न उनके शारीरिक चालढाल से प्रमाणित होता है । हम एक शिक्षित विदान् अधिकारी को सम्मान करते हैं ।
जहाँतक उन्होंने गाँधी और यासेर आराफात को वहाँ के तत्कालिन सरकारोंद्वारा उन्हें जेल में कैद करने की बात है, तो क्या गाँधी और आराफात की अभियान समाप्त हो गयी ? उन्हें जेल में रखने बालों को अपनी औपनिवेशिक शासन छोडनी नहीं पडी ? और वैसे भी क्षेत्री जी को ज्ञात हो जाना चाहिए कि आजाद मधेश की आन्दोलन अब सिर्फ डा.राउत का नहीं, अपितु सारे मधेश का हो गया है । अब लाखों मधेशी सिके बन गये हैं और अब वे गिरफ्तारी देने के लिए योजनाबद्ध भी हो रहे हैं । मधेशी अब आवाज देने बाला है, “नेपाली शासक, मधेश छोडो या हमें गिरफतार करो ।” क्षेत्री जी, आप तयार रहें, मधेशी जेल भरो आन्दोलन का उद्घोष ही करने बाला है ।
उपर के अनुच्छेदों से ईश्वर काल से आधुनिक काल तक के सेनाओं ने सिर्फ अपने अपने देशों के सीमा सुरक्षा की काम करने की बात समपुष्टि होती है । वह भी सम्बन्धित देशों के सरकार या वहाँ के राजनीतिक शक्तियों के अनुमति पाकर । मगर आपने तो हद ही कर दी । ऐसा लगता है कि नेपाल की सरकार कहीं आप तो नहीं चला रहे हैं ?
बहादुर कहलाने बाले आप नेपाली सेना को किस से लडना है ? क्या चीन और भारत से लडेंगे ? अगर हाँ तो चीन और नेपाली उपनिवेश में घायल मधेश के भू–भागों को भी भारतद्वारा कब्जा किए जाने की वर्षों से सारे नेपाली पार्टिंयाँ, राष्ट्रभतm नेपाली लोग और आपकी सेना–सबके सब ढोल बजा रहे हैं तो फिर कहाँ चली जाती है आपकी बहादुरी ? क्या नेपाल सरकार और नेपाली सेना के लाखों जवान और अरबों की बजट सिर्फ मधेशियों को डराने, धमकानें में ही खर्च होती है ? क्यूँकि मधेशी आपको कमजोर और निरीह नजर आते हैं ।
क्या आपने कभी अपने सरकार से कहा कि मधेशियों को भी सेना में भर्ती करो ? क्या आप अपने विभाग में मधेशियों को प्रवेश देने को सकारात्मक सोंच रक्खा ? क्या आपने मधेशियों को स्वदेशी माना ? तो जब आप उन्हें विदेशी मानकर सेना में प्रवेश नहीं देते तो वह अपना अस्तित्व नहीं खोजेगा ? वो अपना देश नहीं खाजेगा ? वो अपने देश का सेना, प्रशासक और कुटनीतिज्ञ नहीं बनेगा ? क्या मधेशी कोई अपराध कर रहा है ?
बन्दुक आपको सिर्फ मधेशियों को डराने, धमकाने या मारने के लिए नहीं, अपितु उस बन्दुक से आप न्याय भी तलास कर सकते हैं । वहीं विप्लव बन्दुक की प्रर्दशन करे तो न्याय संगत और मधेशी अपने खोये हुए राष्ट्र को तलास करे तो अपराधी कैसे ?
आप और आपके निकाय तो संविधान के रक्षक भी है । आपको देश की राष्ट्रियता की चिन्ता है । लेकिन आपको देशकी राष्ट्रिय एकता की ताकत कहाँ होती है, वो पता ही नहीं है । आप अपने जातिवादी सरकार के तरह ही इस भ्रम में हैं कि देश की एकता आप के बन्दुक में है । देश को एकीकृत करने के लिए जग और पिल्लर के रुप में बनाये गए अन्तरिम संविधान को आपने सुरक्षा क्यूँ नहीं दी ? और जब जग को ही किसी ने ढाल दिया तो ढहते हुए घर का दोष क्या है ?
आपके सरकार, नेपाली समाज और सेना प्रहरी को यह लगता है कि देश बडा होने से ही सारा समस्या हल होती है तो दो बडे देशों के बीच छोटा देश का आवशयकता क्यूँ ? बना लिजिए नेपाल को बडा किसी के जमीन को अपने में मिलाकर या अपने भूमि को किसी में मिलाकर । फिर बडे देश के सेनापति हो जायेंगे, बडे देश के राष्ट्रपति ओर प्रधानमन्त्री भी होने लगेंगे ।

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