खात्मा ओसमा का आतंक का नही

अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन की मौत से आतंक और आतंकी खत्म हरुइ मानना बिलकुल गलत है । किसी एक व्यक्ति की मरने से या छोडने से संगठन में बहुत बडा असर नहीं पडता है, हालांकी अलकायदा एक सम्मृद्ध संगठन है । ओसामा की मौत से अलकायदा को असर जरुर पडा है, परन्तु अलकायदा कमजोर नहीं हुआ है । ओसामा की मौत के बाद कई आतंकी संगठन का प्रमुख नेता डरे और घबडाए हुए हैं तो कई नेता और आतंकवादी खुंखार बन गए हैं । अलकायदा की हर कमांडे में बदला की आग झलक रही है । जिस के परिणाम देखा जा रहा है दिनवदिन पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इरान और इराक में आतंकी का हमला । ओसामा की हत्या के बाद कई आतंकी संगठन ने अमेरिका के विरुद्ध लडने के लिए गुट बनाए हैं जिससे आतंकी संगठन मजबूत बनता जा रहा है । आतंकी संगठन में एकता और गुट बन्दी के कारण आपसी मतभेद और झगडना कम हो गया है जिसके कारण आतंकी का पलडा भारी पर रहा है । आतंकी नयें तकनीक और नई योजना के तहत आगे बढते हुए नजर आ रहा है । अमेरिका और कुछ पश्चिम मुल्क को लग रहा है कि ओसामा की मौत से आतंक की खात्मा हर्ुइ परन्तु एशिया वालों को लग रहा है कि ओसामा के मौत से आतंकवादी और आतंक में कुछ नयें तरंग उत्पन्न हुआ है । ओसामा की मौत के बाद एशिया में उत्पन्न हुए तरंग को निम्न आधार में लिखा जा सक्ता है-
पाक और अमेरिका के बीच विवाद
अमेरिका की इस काम पर कुछ पाकिस्तानी सहमत हैं तो बहुत ज्यादा अमेरिका की विरोध मंे हैं । हालांकी ओसामा की मौत के सम्बन्ध में पास्कितानी जनताओं के बीच में भी बडÞा विवाद है । कुछ संचारमाध्यम को माना जाय तो “के बी आर की एशिया कलिंङ्ग” लिख्ता है -पाकिस्तानी जनता दो कतार में बँट चुके हैं । आतंक की सब से बडÞा सरगना की हत्या पर कुछ लोग खुश हैं तो इस्लाम के भगवान मारे जाने पर कुछ लोग दुःखी होते हुए अमेरिका का विरोध कर रहे हैं । उन लोगों का कहना है कि एशियाली मुल्क पर अमेरिका का यह दादागिरी है जिस को पूरा एशिया के मिलकर विरोध करना चाहिए । पाकिस्तान में ओसामा के मौत के बाद पाकिस्तान में प्रतिबन्धित संगठनों ने खुलकर पर््रदर्शन किया, ओसामा के लिए उन लोगों ने मस्जिद और सडÞक पर पर््रार्थना किया और पाकिस्तान की सरकार कुछ नहीं कर पाई ।
मजबूत बना आतंकी
ओसामा की मौत के बाद आतंकी संगठन और मजबूत बन गया है । जिस का असर सब से पहले पाकिस्तान मंे दिखा है । ओसामा की हत्या होने के बाद पाकिस्तान सहित विभिन्न मुल्क के ९ आतंकी संगठन हात मिलाए हैं । इस नये संगठन का नाम देफा-ए-पाकिस्तान -पाकिस्तान की रक्षा) दिया गया है । इस नयंे गुट में जमात-उद-दवा, जमात-ए-इस्लामी, जमियत उलेमा-ए-इस्लाम के दो धडे., जमियत उलेमा-ए-पाकिस्तान, मजलिस अहरार, मर्कजी जमियत अह्र-ए-हदीथ, तंजीम-ए-इस्लामी और अंतर्रर्ााट्रय खत्म-ए-नबुआत शामिल है । पाकिस्तान की कइ संचार माध्यम ने पर्ूव प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ की पीएमएल-एन और पर्ूव क्रिकेटर इमरान खान की पार्टर्ीीहरीक-ए-पाकिस्तान को भी अमेरिका के विरोध में आने के लिए कुछ आतंकी संगठन ने दवाव दिया है ।
आतंकवादी ले रहे हैं सोशल नेटवर्किंग र्साईट का सहारा
आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान अपनी लर्डाई सोशल नेटवर्किंग साइट टि्वटर के जरिए लडने की शुरुआत कर चुका है । तालिबान माइक्रो ब्लाँगिंग साइट टि्वटर पर सक्रियता बढाते हुए पिछले सात महीने से टि्वटर पर स्थानीय भाषा पश्तो में ट्वीट कर रहे थे, १२ मई को अंग्रेजी में पहला बार ट्वीट किया है । साइट पर उनके फालोअर्स की संख्या पाँच हजार अधिक चुकी है, अंग्रेजी में ट्वीटर के बाद से उनके फलोअर्स की संख्या तेजी से बढÞ रही है । गौरतलब है कि साल २०११ की शुरुवात में फेसबुक पर तालिबान के अकाउंट को कंपनी ने रद्द कर दिया था । इन्टरनेट के जरिए अपना संजाल बढÞा रहा तालिबान पहले से और ज्यादा अपना र्समर्थक बना चुका है । इस कार्य से लग रहा है तालिबान दिनवदिन मजबूत हो रहा है ।
ओसामा के मरने के बाद कई राज
ओसामा के मरने के बाद विश्व को झट्का देने वाली कई राज खुल गए हैं । जो पाकिस्तान और वाशिंगटन की सरगर्मी बन चुकी है । ओसामा की हस्तलिखित डायरी से पत्ता चला है कि वह अंतिम समय तक अमेरिका और यूरोप पर हमले की योजना बना रहा था । अपने संदेशवाहकांे के जरिए अपने शर्ीष्ा कमांडों के सर्ंपर्क में भी था । कुछ अमेरिकी अधिकारी नेता ने खुलासा किया कि डायरी में भविष्य की योजनाओं के बारे में लिखा है । ओसामा ने रेल, सडकें और अन्य महत्वपर्ूण्ा आधारभूत संरचनाओं पर हमले करने के लिए अपने कमांडरों को पे्ररित किया है जिससे बडेÞ पैमाने पर लोग मारे जाए और अमेरिका हजारों अमेरिकियों की लाशें देख कर अपना नीति बदलने पर मजबूर हो कर अरब देशों से अपनी सेना हटाए । दस्ताबेजों से पत्ता चलता है कि अलकायदा की सभी योजनाओं के पीछे ओसामा का हाथ था । ओसामा एबटाबाद में छुपे होने के बावजूद संगठन की सभी शाखा पर उसका नियन्त्रण था, वह अलकायदा नंबर दो अयमान अल जवाहिरी, नंबर तीन अतिथा अवदर्ुरहमान और दूसरे कमांडरों के सीधे सर्ंपर्क में था ।
ओसामा के ऐबटाबाद स्थित ठिकाने से मिली सामग्री की सीआईए नीत इंटर एजेंसी टास्क फोर्स द्वारा की गई स्कैंनिंग में कुछ फाइलों में अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा के बारे में उल्लेख किया गया है । अमेरिकी गुप्तचर अधिकारियों ने बताया है कि बिन लादेन २०१२ के राष्ट्रपति चुनाव को बाधित करने की अपनी योजना के तहत ओबामा की हत्या करना चाहता था । अमेरिकी सुरक्षा बल भले ही बर्षों से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कबायली इलाकों में ओसामा की तलाश करते रहे थें लेकिन बीते पाँच वर्षों से पाकिस्तान की राजधानी के कुछ दूर एबटाबाद में करोडों के एक आशियाना में बेखौफ जिंदगी गुजार रहा था यमन मूल की लादेन की पत्नी ने बताया था । वहीं वासिंगटनकी अधिकारियों का कहना है कि इस से साफ होता है कि पाँच साल से पाकिस्तान में रह रहे ओसामा को पाकिस्तान सहयोग कर रहा था ।
लादेन की हत्या के बाद एक और राज तेहरान ने खोला है तेहरान के राष्ट्रपति महमूद अहमेटीनेजाद ने कहा है की अलकायदा संस्थापक ओसामा बिन लादेन मारे जाने से पहले कुछ समय तक अमेरिकी हिरासत में था, ओसामा का बीमार पड जाने दिया गया और बीमार हो गया तब उनको मारा गया ।
ओसामा, ओबामा और नेपाल
अन्तर्रर्ााट्रय कानूनको उल्लंघन करते हुए और मानव अधिकार की धज्जी उडÞाते हुए की गइ ओसामा की हत्या पर नेपाल की जनता और नेपाल सरकार की मत भिन्नताएं देखी गइ है । नेपाल सरकार ओसामा की हत्या को आतंकवाद विरुद्ध का सफल कदम कहा है वहीं कुछ नेपाल कि बौद्धिक स्तरकार लोगांे का कहना है की ओसामा की हत्या अमेरिका का ज्यादती है । नेपाल में अलकायदा की साख संगठन अभी तक किसी की नजर में नहीं आया है । उन के मौत के बाद उनका र्समर्थक कुछ सीमित संख्या में नेपाल में भी होने का शंका किया जा सक्ता है । जिसका प्रमाण इन्टरनेट की समाजिक संजाल फेसबुक पर दिखा गया था । लेकिन इस से भी नेपालको सावधान रहना चाहिए ।
अमेरिका दुनियाँ भर में अपना खौफ फैलाना चाहता है । हालांकी किसी देश में बिना अनुमति घुसकर किसि की हत्या करना अन्तर्रर्ााट्रय कानून के विपरीत है । वहीं मानव अधिकार के दायरे से देखा जाय तो हत्या करना मानव अधिकार का उल्लंघन है । इस घटना से अमेरिका अपना खौफ फैलाने का मकसद को कामयाब कर रहा है । इस से यह भी साबित होता है की अमेरिका अब एशिया को अपना कब्जा में लेना चाहता है । इस घटना को मध्य नजर रख्ते हुए भारत, चीन और नेपाल सहित एशियाइ मुल्क को र्सतर्क रहना चाहिए कहीं इन देशों का नेताओं अथवा कोइ व्यक्ति अमेरिका का निशाना न बन जाए ।  िि
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