खिलाडियों का मनोबल बढाएं

सगरमाथा और गौतम बुद्ध के देश के रुप में परिचित नेपाल अब विश्व में विश्वकप क्रिकेट खेलने वाले देश के रुप में भी अपनी पहचान बनाने में सफल हो गया है । नेपाल आजतक इतनी बडी उडान अन्य किसी भी खेल में लेने में सफल नहीं हुआ था, ऐसी उडान भडने में नेपाल क्रिकेट टीम ने ऊर्जा दिया है । नेपाली क्रिकेटरों ने यह दिखा दिया है कि हौसला बुलन्द हो तो साधन के अभाव में भी हर असम्भव को सम्भव किया जा सकता है । इतना हौसला बुलन्द होते हुए भी नौकरी पाने के लिए खिलाडिÞयों का पलायन क्यों – यह पलायन खेल जगत और राष्ट्र के लिए चिन्ता का विषय है । nepali-cricket-team
खेल के भूमण्डलीकरण को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि व्यक्ति पढकर ही देश की प्रतिष्ठा मात्र नहीं बढा सकता, अपितु खेल के माध्यम से भी देश की प्रतिष्ठा में चार चाँद लगा सकता है, वशर्ते व्यक्ति में सम्बन्धित योग्यता को देखते हुए राष्ट्र द्वारा अवसर प्रदान करने के साथ-साथ आर्थिक सम्पन्नता प्रदान कर खिलाडिÞयों का हौसला बढाए ।
राष्ट्र ने स्रष्टा और खिलाडियों को कभी महत्व नहीं दिया । आजतक अन्तर्रर्ाा्रीय स्तर पर उसी खिलाडियों को अवसर मिलता रहा, जिसका सांगठनिक प्रमुख व्यक्तियों से निकटता रही । भाइवाद नातावाद खिलाडिÞयों पर हावी रहा । परिणाम सामने है कि नेपाल के योग्य दक्ष कुशल खिलाडÞी अपनी कुशलता दिखाने से बंचित रहा, योग्य-कुशल खिलाडिÞयों का मनोबल टूटता रहा है । ऐसा होना राष्ट्रहित के प्रतिकूल है, जो आज तक होता रहा, जो नहीं होना चाहिए । देश के समय और विषम परिस्थिति में भी वर्ल्डकप खेलना महत्वपर्ूण्ा है । नेपाली क्रिकेट टीमने यह कर दिखाया है कि हम किसी से कम नहीं, इसके लिए नेपाल क्रिकेट टीम बधाई का पात्र है ।
नेपाल खेलकूद के इतिहास में ही नेपाल क्रिकेट टीम की सबसे बडÞी उपलब्धि है । आइसीसी ट्वान्टी-ट्वान्टी विश्वकप में नेपाल टीम ने राष्ट्र को ऊँची सफलता प्रदान किया है, पर दुःख की बात है कि इतनी बडÞी सफलता प्राप्त करने के बाबजूद भी टीम मंे सहभागी खिलाडिÞयों की बहुत बडÞी संख्या नेपली सैनिक विभाग द्वारा विज्ञापित अति सामान्य बकासी पद पाने के लिए पलायन कर रही है । खिलाडिÞयों का मानना है कि इस सामान्य पद वाली नौकरी पाने से आर्थिक स्थायित्व जीवन में आ सकता है । यही बात नेपाली क्रिकेट टीम के कप्तान ने भी स्वीकारा है । क्रिकेट खेलकर जीवन चलाना असम्भव है । १४ हजार मासिक वेतन मिलने वाला बकासी पद मुख्यतः मेस व्यवस्थापन और सर-सफाइ करने का है । ऐसा करने के लिए खिलाडÞी क्यों बाध्य है – इस ओर नेपाल सरकार का ध्यानाकर्षा होना जरुरी है । सरकार को चाहिए कि खेल क्षेत्र में भी आवश्यक आर्थिक सहयोग देकर साधन सम्पन्न करें, ताकि खिलाडिÞयों का मनोबल बढÞे, ऐसा करने से पलायन रुकेगा ।

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