खिसीयानी बिल्ली खंबा नोचे (व्यग्ंय )

पहाडियों का खुन“खुन” है औ मधेशीयों का खुन“पानी”

बिम्मीशर्मा:बिल्ली को डोरी में बांध कर सिलिगं मे लटकाया हुआ दूध जब पीने को नहीं मिलतातब खिसीयायी हुई बिल्ली गुर्राते हुए खंबे को नोचने लगती है । यही हाल सत्ता का कमान संभाले हुए नेपाल के पी एम ओली का हो रहा है । देश और जनता ओली की जादू, तिकड़म और मुहावरों से उब चुकी है । जब मधेश आंदोलन नियन्त्रण में आता नहीं दिखा तो अपनी कठपुतली जैसी राष्ट्रपति को विवाह पंचमी के बहाने जनकपुर भेज दिया । राष्टपति जी वहां की जनता का नश दाब कर देखना चाहती थी की मधेश आंदोलन मे अब कितना दम बांकी है रु

सारे पहाडी अच्छे इसिलिए सशस्त्र के प्रहरी महानिरीक्षक कोष राजवन्त अपनी जमानत में तुरन्त १० करोड रुपये ऐसे निकाल लेते है जैसे कोई पान खा कर १० रुपये पनवाडी को देता हो । वाह वह तो घोर राष्ट्रवादी और देशभक्त है भले ही उन्होने जितना भी भ्रष्टाचार क्यों न किया हो क्योंकि वह पहाडी है, देश की राजधानी मे बैठते है ।
जब राष्ट्रपति जी का उन के मन माफिक स्वागत और सम्मान नहीं हुआ तो किसी इक सरफिरे शिक्षक का फेसबुक स्टेट्स में राष्ट्रपति जी को बिधवा और अलच्छिन लिख देने से ही देश की राजधानी सुलग उठी राष्ट्रपतिजी के बचाव में । जानकी मदिंर के अंदर नेपाल पुलिस के जासुसी कुत्ते को ले जाना और नेपाली सैनिक द्धारा जुते पहन कर मदिंर के गर्भ गृह में प्रवेश करने के कारण मदिंर को धोया गया था । पर आखं और कान बंद कर के बैठी हुई इस देश की सरकार और राजधानी की जनता खुद आग को हवा दे रहे हैं । जनकपुर में हुई वास्तविक घटना और वहां से स्पष्टीकरण आने के बाद भी जान बुझ कर हौवा फैलाया जा रहा है और मधेश और मधेशीयों को बदनाम किया जा रहा है ।
देश की प्रायोजित मीडिया, डलर और पौण्ड में बिकी हुई राजधानी की जनता और नेता मधेश आंदोलन खत्म हो और वहां की जनता चैन से बैठे यह चाहते ही नहीं । घृणा की आग मे पानी दे कर बुझाना तो दूर की बात उस आग में घी डाल कर अपने स्वार्थ की रोटी पका कर खाने मे सभी लगे हुए हैं । कालाबजारी से दिन दुगुना रात चौगुना कमाई करने वालों को यह डर है की मधेश की समस्या सुलझ गई तो उन का क्या होगा रुवह फिर कैसे सौ रुपये लिटर का पेट्रोल पांच सौ और पन्ध्र सौ रुपये की गैस १० हजार मे बेच कर दुसरों का गला रेट पाएगें रु
किसी भी महिला को बिधवा कहना और इसी बहाने मदिंर प्रवेश करने न देना या दर्शन करने देना वाकई निन्दनीय बात है । चाहे वह राष्टपति हो या साधारण औरत । बिधवा होना वैसा ही है जैसे शादी के बाद एक औरत या मर्द शादीशुदा और विवाहित कहलाती है या कहलाता है । वैसे ही पति या पत्नी के मरने के बाद ही मर्द विधुर और विधवा हो जाते हंै । यह सामाजिक और पारिवारिक पद वा संस्कार है । किसी को भी उस के पद या स्थिति के कारण अपहेलित करने की छूट नहीं है ।
राष्ट्रपति को विधवा होने कारण मदिंर में घुसने नहीं दिया गया कह कर झुठी अफवाह फैलायी गयी । इसको सच मान कर देश की अंधी और बहरी मीडिया ने समाचार बनाया । इस समाचार को पढ, सुन कर आक्रोशित हुए लोगों ने फेसबुक और ट्विटर पर मधेश और मधेशी के विरुद्ध जो आग उगला वह क्या ठीक था
पर क्या देश की सर्वोच्च पद में आसीन महिला जिसको राष्ट्रपति का पद प्राप्त है । उसे मधेश की धर्म संस्कृति को अपमान करने का हक है रुविवाहपंचमी पुराणों में वर्णित है । जनकपुर में यह पर्व सदियों से धूमधाम से पूरे विधिविधान के साथ मनाया जाता है । वहां पर राम सीता बना कर पूजा जाता है और उनकी शादी की जाती है । जिस सिंहासन पर रामसीता के रूप में सज सवंर कर जो जो बैठी हुई थी उन को वहां से हटा कर खुद बैठ जाना क्या शोभा देता है रुक्या यह कार्य उचीत था रु राष्ट्रपतिजी द्धारा उलंघन किए गए नियम और तोडे गए परम्परा की जवाफदेही कौन होगा रुक्या राष्ट्रपति जी ने इस पर माफी मागी रु या महिला होने के नाते माफी पर भी उन को छूट दिया गया । क्या महिला होने और आरक्षण या कोटे मे योग्यताओं को दरकिनार कर किसी पद में पहुंचने का यह मतलब है कि वह सामाजिक शिष्टाचार ही भूल जाए । क्या वह इस देश की भाग्यविधाता हैं रु
देश की राजधानी मे नेवार जाति मे होने वाले विभिन्नपर्व त्योहार पर राष्ट्रपति उपस्थित होते है । क्या देवी की तरह पूजी जाने वाली कुमारी को उन के सिहांसन से उठा कर राष्ट्रपति जी खुद बैंठ जाएगीरुऔर क्या नेवार समूदाय के लोग उन्हे ऐसा करने देगें या ऐसा करने पर उन्हे कुछ नहीं करेगें या ऐसे ही छोड देगें रु तब मिथिलाञ्चल की एक बृहद और लोकप्रिय परम्परा को रौंदने का हक उन्हे किस ने दिया रु फिर जब वह राष्ट्रपति बनी तब राजधानी के ही किसी मदिंर मे दर्शन और पूजा करने क्यों नहीं गई रुक्यों कम्यूनिष्ट विचार धारा में पली बढी और दिक्षीत हुई राष्ट्रपतिजी को जानकीमदिंर का ही ख्याल आया और वहां पूजा करने पहुंच गई रु देश के सब से बडे भगवानपशुपतिनाथ का दर्शन करने और पूजा करने का ख्याल उन के मन में क्यों नहीं आया रु क्यों ईतनी दूर जनकपुर जाने का ख्यालआया रु क्योंकि उन्हें मधेश आन्दोलन की आग में घी डालना था । ताकि वह आग और भड्के और फैले और मधेश और मधेशी इस आग में जल जाए । जब मधेश आन्दोलन की आग ठंडी नहीं हुई तो गौर में एक विधार्थी को पुलिस गोली का निशाना बनना पड़ा । पिएमओली के सहारे राष्ट्रपति बन ी और उन्हीं के इशारों पर चलने वाली इस देश की राष्ट्राध्यक्ष से हम इस से ज्यादा की उम्मीद भी नहीं कर सकते ।
राष्ट्रपति को विधवा होने कारण मदिंर में घुसने नहीं दिया गया कह कर झुठी अफवाह फैलायी गयी । इसको सच मान कर देश की अंधी और बहरी मीडिया ने समाचार बनाया । इस समाचार को पढ, सुन कर आक्रोशित हुए लोगों ने फेसबुक और ट्विटर पर मधेश और मधेशी के विरुद्ध जो आग उगला वह क्या ठीक था रुजो घृणा एक समूदाय के विरुद्ध वर्षाया गया और विष वमन किया गया क्या उस का प्रायश्चित देश की मीडिया और बुद्धिजीवी जनता कभी करेगीं रु जब विधा देवी भंडारी देश की राष्ट्रपति बनी थी उस समय ट्विटर में किसी ने लिखा था कि “नेपाल दुनिया का पहला ऐसा देश है जहां पर प्रेमी प्रधानमंत्री और प्रेमिका राष्ट्रपति बने है ।” तब क्यों किसी ने इस पर बवाल नहीं मचाया रु क्या राष्ट्रपति के चरित्र पर सवालिया निशान नहीं था । अरे नहीं इस से उन का चरित्र हत्या कैसे होतारु यह सब करने वाले तो देश की राजधानी की स्वनामधन्य और विद्धान पहाडी जनता थी । वह मधेश और मधेशी हो तो ही विरोध करना चाहिए । पहाडी हो तो उस को माफ कर देना चाहिए या नजर अंदाज कर देना चाहिए । क्योंकि पहाड़ के नेपाली तो राष्ट्रपति का चरित्र हत्या कर ही नहीं सकते । वह तो सिर्फ मजे ले, ले कर राष्ट्रपति और पिएमओली के सम्बन्धो के बारे में चुटकी लेते है और गाना गाते है । सारी खराबी तो सिर्फ मधेश में है । पहाडी सब तो दूध के धूले हुए है । अपनी बहन, बेटीयों को मुंबई की कोठी पर ले जा कर बेचते है पहाडी । अपनी और दूसरों की किडनी ठग कर बेच देते है पहाडी लोग । सोना तस्करी करते है पहाडी, लालचंदनकी तस्करी भी करते पहाडी और लागू पदार्थ ९ड्रग्स्० का कारोवार कर के पकडे जाने वालों मे भी पहाडी लोग ही ज्यादा है । तब भी पहाडी अच्छे है, वह देश के राष्ट्रपति के बारें मे जो चाहे लिखवा बोल सकते हैं । पर मधेशीयों को मनाही है । क्यों की सारे मधेशी बिहारी, धोती, भारतीय और अपराधी है । और सारे पहाडी अच्छे इसिलिए सशस्त्र के प्रहरी महानिरीक्षक कोष राजवन्त अपनी जमानत में तुरन्त १० करोड रुपये ऐसे निकाल लेते है जैसे कोई पान खा कर १० रुपये पनवाडी को देता हो । वाह वह तो घोर राष्ट्रवादी और देशभक्त है भले ही उन्होने जितना भी भ्रष्टाचार क्यों न किया हो क्योंकि वह पहाडी है, देश की राजधानी मे बैठते है ।
पहाडियों का खुन“खुन” है
औ मधेशीयों का खुन“पानी”

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