खुलामंच में मधेशी मोर्चा का सिंहनाद

हिमालिनी डेस्क
काठमांडू। बाइस वर्षों के बाद मधेशी दलों की ओर से काठमांडू के खुला मंच में बृहत आमसभा का आयोजन किया गया। संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा के आयोजन में हुए इस विशाल आमसभा में मोर्चा से आबद्ध नेताओं ने संघीयता के बिना संविधान जारी नहीं करने की चेतावनी देते हुए कहा कि संघीयता के बिना संविधान जारी हुआ तो देश में विभाजन तक की स्थिति आ सकती है।

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खुलामंच में मधेशी मोर्चा का सिंहनाद

आमसभा को संबोधित करते हुए मोर्चा के वरिष्ठ नेता महन्थ ठाकुर ने कहा कि मधेशी जनता से मधेश का अधिकार छीना जा रहा है। ठाकुर ने इस बात पर चिन्ता व्यक्ति की कि जिस तरह से मधेशी जनता, मधेशी नेता, मधेशी मन्त्री के साथ राज्य के संयन्त्रों द्वारा चौतर्फी प्रहार किया जा रहा है, उससे मधेशी जनता में व्रि्रोह की भावना पनप रही है।
महन्थ ठाकुर ने जोड देते हुए कहा कि देश की राष्ट्रीयता व अखण्डता को बचाए रखना है तो मधेशी के साथ-साथ जनजाति, आदिवासी, दलित थारु सभी समुदाय को समान अधिकार देना होगा। ‘जिस तरह से राज्य के सभी संयन्त्रो द्वारा मधेशी, दलित, आदिवासी, जनजाति समुदाय को प्रताडित किया जा रहा है, उससे देश में विभाजन की स्थिति लाई जा रही है और मधेशी पर विखण्डनकारी का आरोप लगाया जाता है। यह खसवादियों की सोची समझी रणनीति है। मधेशी को कभी विदेशी नागरिक और कभी भारतीय कहकर इस देश से अलग करने की कोशिश की जा रही है।
महन्थ ठाकुर ने मधेशी जनता को इस देश का गैर नागरिक बनाने और भारतीय कहनेवालों को चुनौती देते हुए कहा कि अब तक मधेशी जनता सिर्फमधेश के लिए लडÞते रहते थे लेकिन अब पूरे नेपाल को ही अपना बनाने के लिए लडेÞगे। अपने संबोधन के दौरान महन्थ ठाकुर ने मधेश की संस्कृति पर भी खसवादियों द्वारा प्रहार किए जाने और इसे समाप्त करने का षड्यन्त्र रचने की बात कही। उन्होंने कहा कि मधेश की संस्कृति और मधेश का इतिहास पूरी दुनिया में अमर है और किसी के चाहने से वह इतिहास नहीं मिट सकता है। ठाकुर ने यह भी कहा कि नेपाल की जनता जिस गौतम बुद्ध, राजा जनक और माता सीता पर गर्व करती है, वह सभी मधेश की भूमि में है, इसलिए किसी के चाहने से मधेश की संस्कृति और मधेश का इतिहास समाप्त नहीं हो सकता है।
आम सभा को संबोधित करने हुए सद्भावना पार्टर्ीीे अध्यक्ष राजेन्द्र महतो ने एक बार फिर से चेतावनी दी कि यदि संघीयता के बिना संविधान जारी हुआ तो मधेशी जनता अपना संविधान खुद ही लिखने के लिए बाध्य होगी। राजेन्द्र महतो ने कहा कि मधेश विरोधी बयान देकर मधेशी जनता को ना ठुकराया जाए। मधेशी जनता और मधेश के विरोध में उठने वाली आवाज को समाप्त कर दी जाएगी। मधेश की तरफ उठने वाली उँगली को काट दी जाएगी। संघीयता के बिना संविधान जारी किए जाने के षड्यन्त्र के बारे में बोलते हुए राजेन्द्र महतो ने कहा, यदि ऐसा प्रयास किया गया तो देश को विखण्डित होने से कोई भी नहीं रोक सकता है और इसके लिए तीन दलों को ही जिम्मेवारी लेनी होगी।
आमसभा में मधेशी जनअधिकार फोरम लोकतान्त्रिक के अध्यक्ष विजयकुमार गच्छेदार ने कहा कि देश को द्वंद्व के आग से बचाना है तो संघीयता सहित का संविधान जारी करना ही होगा। गच्छेदार ने जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री से लेकर सभी दलों के शर्ीष्ा नेताओं को इस बारे में जानकारी दे दी है कि यदि संघीयता के बिना संविधान जारी हुआ तो देश में भारी हिंसा व रक्तपात हो सकता है। गच्छेदार ने कहा कि कुछ पार्टियाँ मधेशी, थारु जनजाति, आदिवासी समुदाय को आपस में लडा रही हैं। लेकिन इस आमसभा में मंचपर एक साथ उपस्थित होकर सभी समुदाय के प्रतिनिधियों ने यह दिखा दिया है कि अधिकार और संघीयता के विषय पर सभी एक हैं।
आमसभा में बोलते हुए महेन्द्र राय यादव ने कहा कि संघीयता नहीं आने पर देश में महाभारत जैसा युद्ध हो सकता है। यादव ने तीन दलों पर संघीयता विरोधी होने का आरोप लगाया है। महेन्द्र यादव ने कहा कि जिस तरह से ५ गाँव के लिए महारभात युद्ध हुआ था उसी तरह अब मधेश को अधिकार दिलाने के लिए युद्ध किया जाएगा। संघीयता सहित का संविधान नहीं आने पर मधेश में सभी दलित, जनजाति, आदिवासी, मधेशी भीषण संर्घष्ा की तैयारी में होने की बात महेन्द्र यादव ने कही।
मधेशी जनअधिकार फोरम गणतान्त्रिक के कार्यबाहक अध्यक्ष राजकिशोर यादव ने कहा कि मधेशी को राष्ट्रघाती और राष्ट्रविरोधी बताने वाले खुद ही राष्ट्र विरोधी कार्यो में संलग्न हैं। उन्होंने कहा कि मधेशी को उन में हर अधिकार से वंचित किए जाने के लिए अदालत, प्रशासन सहित राज्य के अन्य निकायों द्वारा षड्यन्त्र किया जा रहा है। राजकिशोर यादव ने कहा कि संघीयता आने पर ही देश में सभी समुदाय को सम्मानजनक स्थान मिल सकता है।
मधेशी मोर्चा के आमसभा में विभिन्न अदिवासी जनजाति संगठनों के प्रनिनिधि की भी सहभागिता रही। इन में आदिवासी, जनजाति, संयुक्त संर्घष्ा समिति के परशुराम तामांग ने संघीयता व पहचान की लडर्Þाई में मधेशी मोर्चा के आन्दोलन में ऐक्यबद्धता व्यक्त की थी। इसी तरह संयुक्त थरुहट संर्घष्ा समिति के सल्लाहकार सुरेन्द्र चौधरी ने कहा कि तीन दलों के द्वारा मधेशी और थारु समुदाय को लडÞाने का जो षड्यन्त्र हो रहा है, वह किसी भी हालत में सफल होने नहीं दिया जाएगा। नेवा स्वायत्त राज्य संयुक्त संर्घष्ा समिति के मल्ल के सुंदर ने कहा कि स्वायत्त नहीं लिखने पर तीसरा आन्दोलन हो सकता है। गैर आवासीय मधेशी संघ के अध्यक्ष सीके राउत ने कहा कि मधेश का अधिकार दिलाने के लिए अन्तर्रर्ाा्रीय अदालत और यूएन का भी दरवाजा खटखटया जाएगा।

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