गजल : मृणालिनी धुले

स्वार्थ सिद्धि में सभी विद्वान हैं
बस हमीं इस बात से अन्जान हैं

हार का अपनी जरा भी गम नहीं
और सब हारें यही अरमान है

जो भरोसा आपका करता रहा
लूटना उस शख्स को आसान है

यह नया कानून है भगवान का
फूलता फलता यहाँ बेईमान है

जो समझते सच की आखिर जीत है
हाय  रे उनकी सोच ही नादान है ।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
%d bloggers like this: