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गणतन्त्र की महत्व, सहिदों के कुर्बानी (सन्दर्भ : गणतन्त्र दिवस)


हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, २९ मई ।

गणतंत्र दिवस नेपाल का राष्ट्रीय पर्व है । यह दिवस नेपाल के गणतंत्र बनने की खुशी में मनाया जाता है । १५ जेठ के दिन नेपाल को एक गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित किया गया था । इसी दिन स्वतंत्र नेपाल का नया संविधान अपनाकर नए युग का सूत्रपात किया गया था । यह नेपाली जनता के लिए स्वाभिमान का दिन है लेकिन वही आधी से ज्यादा अबादी रहे मधेशी समुदाय को आज भी गणतन्त्र का आभाष नहीं हो पाया हैं ।

संविधान के अनुसार डाँ. रामबरण यादव संघीय गणतन्त्र के प्रथम राष्ट्रपति बने थें । जनता ने देश भर में खुशियाँ मनाई । तब से १५ जेठ को हर वर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है ।

१५ जेठ का दिन नेपाल के लिए गौरवमय दिन है । इस दिन देश भर में विशेष कार्यक्रम होते हैं । विद्यालयों, कार्यालयों तथा सभी प्रमुख स्थानों में नेपाली राष्ट्रीय झंडा फहराने का कार्यक्रम होता है । बच्चे इनमें उत्साह से भाग लेते हैं । लोग एक–दूसरे को बधाई देते हैं । स्कूली बच्चे जिला मुख्यालयों, देश की राजधानी के परेड में भाग लेते हैं । विभिन्न स्थानों में सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती हैं । लोकनृत्य, लोकगीत, राष्ट्रीय गीत तथा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम होते हैं । देशवासी देश की प्रगति का मूल्यांकन करते हैं ।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम राजधानी काठमांडू में होता है । टुडीखेंल के मंच साँस्कृतिक कार्यक्रम से लेकर राष्ट्र के प्रमुख निकायों के उपस्थिती मे विशेष रुप से मनाया जाता हैं । राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों के साथ यहाँ पधारते हैं और राष्ट्रध्वज फहराते हैं । उन्हें कयौं तोपों की सलामी दी जाती है । नेपाली सेना के बैंड राष्ट्रगान की धुन गाते हैं । इस अवसर पर किसी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है ।

गणतंत्र दिवस की परेड का दृश्य बहुत आकर्षक होता है । सेना और अर्द्धसैनिक बलों की टुकडि़याँ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ती हैं । परेड के बाद झांकियों का दृश्य सलामी मंच के सामने से गुजरता है ।

गणतंत्र दिवस अपनी उपलब्धियों के मूल्यांकन का दिन है । गणतंत्र नेपाल ने कौन–कौन सी मंजिलें तय कर लो और किन–किन मंजिलों की छूना अभी बाकी है इसकी समीक्षा की जाती है । अखबारों और पत्रिकाओं मैं इससे संबंधित अनेक रिपोर्टें छपती हैं । टेलीविजन पर रंगारंग कार्यक्रम होते हैं । जगह–जगह पर कव्वालियों, मुशायरों और कवि सम्मेलनों की घूम मची रहती है राजधानी की मरकारा इमारतों पर मनमोहक रोशनी की जाती है । राष्ट्र अपने गणतंत्र पर गर्व महसूस करता है ।

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र अपने महानायकों को स्मरण करता है । हजारों–लाखों लोगों की कुर्बानियों के बाद देश को आजादी मिली अंगे फिर राष्ट्र गणतंत्र बना । स्वतंत्रता हमें भीख में नहीं मिली । कइयों ने इसके लिए अपनी जान गँवायी । गणतन्त्र के लिए दर्जनों सपुतों ने जान की बाजी लगा दी । इन्होंने देशवासियों क सामने जीवन–मूल्य रखे । हमारा गणतंत्र इन्हीं जीवन–मूल्यों पर आधारित है । अतः इनकी रक्षा की जानी चाहिए । समय, व्यक्ति की गरिमा, विश्व बंधुत्व, सर्वधर्म–समभाव, धर्मनिरपेक्षता गणतंत्र के मूलतत्व हैं । अपने गणतंत्र को फूलता देखने के लिए हमें इन्हें हृदय में धारण करना होगा । आज भी उन शहिदों के कुर्बानीयों को हम याद करतें हैं जिन्होने अपनी जान की बलिदानी देकर हमारे लिए गणतन्त्र लाया ।

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