गणतन्त्र नेपाल के प्रथम शहीद दुर्गानन्द के स्मरण में : सुरेश पाण्डे

आँधिया शर्मा गयी,थी जाेश जलवा गर्व से ।
माधरे जननिकी खातिर,चल बसे फाँसी चढे।।

थी वाे पल भयक्रान्त सत्ता,दुर्गा की ललकार से।
कुर्बानियाँ देकर यहां,शंखनाद की गणतन्त्र की।

क्या ए सत्ता गर्व करती,ब्यर्थ है कुर्बानियाँ?
शर्म से शिर झुक रहा,सम्मान मे विभेद है।।

पर हमे संस्कार दी,हक आवरु से प्यार हाे।
श्रद्धाञ्जली दाे पुष्प से,अधिकार से लडते रहे।
-सुरेश पाण्डे
#वलिदानीदिवस

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

avatar
  Subscribe  
Notify of
%d bloggers like this: