गतिशील होता बैंकिंग क्षेत्र:
गणेश पोखरेल

बैंकिंग क्षेत्र असहज स्थिति से गुजरने के बावजूद हम काफी अच्छा कर रहे हैं। अभी और भी बैंकिंग और वित्तीय संस्था है जो अच्छा कर रहे हैं। लेकिन एक दो लोगों की गलतियों की वजह से पूरे बैंकिग क्षेत्र को ही गलत कहना उचित नहीं है। जिसने गलती की है उसे कानून सम्मत सजा अवश्य मिलनी चाहिए। लेकिन इसकी आड में पूरी संस्था को ही धाराशयी करने का काम करना गलत है। बैंकों के प्रति आम उपभोक्ता और बाजार में जो गलतफहमियां फैली है उसे दूर करना काफी जरूरी है। जिसकी वजह से यह स्थिति आई है उसे कानूनी कठघरे में लाकर समाधान ढूंढा जाना चाहिए।
राष्ट्र बैंक संपर्ूण्ा वित्तीय संस्थाओं के अभिभावक के रूप में होने से उसके प्रति आलोचना होना स्वाभाविक भी है। लेकिन सुशासन संस्था के भीतर से ही होना चाहिए। राष्ट्र बैंक के द्वारा बनाए गए नीति नियम को शुरु से ही कर्डाई के साथ लागू किया जाता तो आज यह भयावह स्थिति नहीं पनपती। इसके बावजूद संस्था के आन्तरिक नियंत्रण प्रणाली में कहीं ना कहीं त्रुटि अवश्य हर्ुइ है। कभी कभी यह होता है कि एक व्यक्ति के द्वारा की गई गलती से पूरा का पूरा संस्था ही बदनामी में आ जाता है।
आज की स्थिति देखी जाए तो कुछ बैंक ऐसे हैं जिसकी स्थिति अछी नहीं कही जा सकती है। इस बात को न्यामक निकायों द्वारा बाहर लाने से और अधिक प्रभावकारी हो सकता था। लेकिन कई वित्तीय संस्थाओं से राष्ट्र बैंक, संचय कोष, नेपाली सेना जैसी संस्थाओं द्वारा पैसे निकालने आम जनता में बैंकों के प्रति त्रास और अधिक बढ गया। लेकिन इसके पीछे क्या वजह थी -यदि इस बात की सच्चाई संबंधित निकाय द्वारा ही समय पर बाहर आ जाती तो बैंकों के प्रति जो नकारात्मक छवि लोगों के मन में बैठ गई है वह नहीं होती।
एक बात क्या समझना जरूरी है कि करोडों अरबों पूंजी लेकर शुरू की गई कोई भी संस्था ऐसे ही नहीं डूब जाती। लेकिन तरलता का अभाव होने पर कुछ समस्याएं अवश्य आती है। इन सब बातों की निर्भरता मौद्रकि नीति पर भी पडती है। इस समय मौद्रकि नीति में कुछ उदारपन देखा जा सकता है। सीआरआरआई ०।५ प्रतिशत घटाए जाने से बाजार में ४०० करोड की पूंजी आने वाली है। शोधान्तर घाटा कम करने के लिए भी मौद्रकि नीति में कुछ लचकता अपनाई गई है। समग्र में देखा जाए तो तरलता व्यवस्थापन के लिए मौद्रकि नीति फलदायी होने वाली है। और इन्हीं सब वजहों से लगता है कि बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर से अपनी पुरानी गति पकडने वाली है।
-लेखक सिटिजन्स बैंक केप्रमुख प्रशासकीय अधिकृत है)     ििि

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