गुजरात चुनाव एक्जिट पाेल के अनुसार गुजराती प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान की भावना अागे

नई दिल्ली

१५ दिसम्बर

एक्जिट पोल के सर्वेक्षणों में भाजपा गुजरात में अपनी सत्ता बरकरार रखते हुए दिख रही है, जबकि चुनावों से पहले माना जा रहा था कि इन चुनावों में कांग्रेस भाजपा को कड़ी टक्कर देगी। लिहाजा अगर सर्वेक्षणों का विश्लेषण करें तो साफ है कि गुजराती प्रधानमंत्री के सम्मान की भावना सत्ता विरोधी कारकों पर भारी पड़ी।

कांग्रेस के लिए फायदेमंद नहीं रही गुजरात की युवा त्रिमूर्ति

विश्लेषकों की अनुसार राज्य में कांग्रेस को तीन युवा नेताओं (हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मेवाणी) के साथ गठबंधन से कुछ ही इलाकों में लाभ हुआ। अगर यह गठबंधन चुनावों से कुछ महीने पहले हुआ होता तो शायद उसे अधिक लाभ होता।

प्रभावहीन रहा जीएसटी का मुद्दा

इसी तरह जीएसटी मुद्दे ने बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं डाला और व्यापारियों ने कांग्रेस की बजाय भाजपा को ही प्राथमिकता दी। कांग्रेस को 18 से 35 आयु वर्ग के युवाओं का समर्थन जरूर मिला है, इसकी वजह रोजगार के मोर्चे पर भाजपा की कमजोरी को माना जा सकता है। हालांकि ‘उज्जवला योजना’ और एलईडी बल्बों के मुफ्त वितरण की योजना से गरीबों को फायदा मिला है, लिहाजा इस वर्ग में भाजपा की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है।

समग्र विकास की बजाय पेयजल था बड़ा मुद्दा

सौराष्ट्र के अधिकतर इलाकों में समग्र विकास की बजाय पेयजल बड़ा मुद्दा था और जाहिर तौर पर इसका फायदा भाजपा को ही मिलता नजर आ रहा है। जातिगत समीकरणों के लिहाज से देखें तो मुस्लिम और अनुसूचित जाति के मतदाता कांग्रेस के ही साथ रहे हैं और इस बार भी इसमें कोई बदलाव नहीं आया, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के मतदाताओं ने भाजपा को ही प्राथमिकता दी।

सर्वेक्षणों का विश्लेषण यही दर्शा रहा है कि ‘ब्रांड मोदी’ अब भी बना हुआ है और गुजराती प्रधानमंत्री के सम्मान की भावना गुजरात के लोगों ने बनाए रखी है, जो विपक्षी दलों पर भारी पड़ सकती है।

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