गृहयुद्ध की लपटों मंे घिरा इराक

हिमालिनी डेस्क:इराक इन दिनों गृहयुद्ध की चपेट में है । सुन्नी आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट आफ इराक एंड अलशाम ने शिया समर्थित इराक सरकार के खिलाफ जंग छेडÞ रखी है । वर्त्तमान में इराक की स्थिति ऐसी है कि वहाँ शिया, सुन्नी और कर्ुद वर्चस्व को लेकर आपस में ही लडÞ रहे हैं । खाडÞी युद्ध के बाद एक बार फिर पश्चिम एशिया की स्थिति विस्फोटजनक हो गई है । सन् २००३ में तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के पतन और मृत्यु के बाद राजनैतिक रूप से अस्थिर इराक पिछले कई हफ्तों से चरम हिंसा, रक्तपात और युद्ध की आग में जल रहा है । २००६ से २००८ तक इराक गृहयुद्ध से जूझता रहा । इस गृहयुद्ध ने शिया और सुन्नी के बीच एक ऐसी गहरी खाई बना दी जिसे भर पाना असम्भव सा हो गया है । मुस्लिम धर्म के समुदाय विश्वभर शिया और सुन्नी दो रूपों में विभक्त हैं । विश्व का धर्म आँकडÞा बताता है कि विश्व में सुन्नी समुदाय ८८ प्रतिशत, शिया लगभग १० प्रतिशत और अन्य २ प्रतिशत हैं । इराक में शिया समुदाय ६५ प्रतिशत और सुन्नी ३५ प्रतिशत हैं । बहुसंख्यक शिया स्वाभाविक रूप से इराक में शक्तिशाली रूप में स्थापित है. । राज्य द्वारा उपलब्ध रोजगार, राजनैतिक, औद्योगिक, प्रशासनिक तथा अन्य अवसर सुन्नी समुदाय को कम मिल पाने की स्थिति के कारण आज की यह भयावह स्थिति पैदा हर्ुइ है ऐसा विश्लेषक मानते हैं ।fghj iraq-killed-bodies-found-militants-attack_1-16-2014_134408_l
आज इराक जिस भयावह दौर से गुजर रहा है उसे अंजाम देने में आतंकवादी संगठन आइ.एस.आइ.एस का हाथ है । आइ.एस.आइ.एस एक जिहादी संगठन है, जो इराक और सीरिया में सक्रिय है । इस संगठन की स्थापना अप्रील २०१३ में हर्ुइ थी और आज इसकी स्थिति काफी मजबूत हो गई है । इराक में वर्ष२००६ में आतंकी संगठन अलकायदा काफी सक्रिय था । इसके सरगना का नाम अबु मुसाब अल जरकावी था । अलकायदा संगठन इराक में बहुसंख्यक शिया समुदाय के खिलाफ काम कर रहा था । इसका इरादा शिया समुदाय के खिलाफ युद्ध का वातावरण तैयार करना था और काफी हद तक यह अपने मनसूबे में २००६ में कामयाब भी हो गया । शियाओं के प्रमुख धर्मस्थल अल अस्कारिया मस्जिद पर इनके द्वारा हमले किए गए और शियाओं ने इसके विरुद्ध हमले किए और तब से शिया और सुन्नी के बीच तनाव बढÞते चले गए । किसी भी धर्म में इंसान को इंसान के विरुद्ध खून बहाने की बात नहीं लिखी है, पर इतिहास गवाह है कि इसी धर्म के बहाने कत्लेआम होते रहे हैं । वर्ष२००६ में अमेरिकी फौज के हमले में अल जरकावी मारा गया । उसकी मौत के बाद आइ.एस.आइ.एस लगभग समाप्त हो गया । २०११ में अमरिकी सेना वापस हर्ुइ । इसके पशचात् अमेरिका के रणनीतिक और राजनीतिक कुशलता से वहाँ प्रजातान्त्रिक सरकार का गठन हुआ और गृहयुद्ध समाप्त हुआ । इसके बाद इराक ने उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति की । लेकिन अमेरिकी सेना के वापस होने के बाद आतंकवादी संगठन फिर से सर उठाने लगे । अलकायदा ने २००६ में ही खुद को ‘द इस्लामिक स्टेट इन इराक’ कहना शुरु कर दिया था । अप्रील २०१३ में इसके साथ ‘एंड सीरिया’ भी जुडÞ गया । नए संगठन ने इराक में सुन्नियों की इस भावना का फायदा उठाया कि उनके प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी शिया समुदाय के हैं और उनके विषय में नहीं सोचते हैं । इस भावनात्मक सोच को हवा देते-देते इराक में यह संगठन दिन-ब-दिन मजबूत होता चला गया ।
इस संगठन का प्रमुख अबु बकर अल बगदादी हैं । बगदादी के हाथों में संगठन की कमान आने के बाद इससे जुडÞे आतंकी एक वेल आर्गेनाइज्ड फाइटिंग फोर्स के रूप में काम कर रहे हैं । अबु मुसाब अल जरकाबी की मौत के बाद संगठन का सरगना यही है । बगदादी के विषय में जानकारी बहुत कम उपलब्ध हैं । यह अपनी तस्वीर बहुत कम खिंचवाता है । इस संगठन से जुडÞे बहुत से लडÞाकुओं ने भी अपने आका को नहीं देखा है । जानकारी के हिसाब से इसका जन्म १९७१ में उत्तरी बगदाद के सामर्रर्ााें हुआ था । बगदादी का असली नाम अव्वाद इब्राहिम अली अल-बद्री है । इसकी पहचान संगठन में बैटलफील्ड कमान्डर और टैक्टीशियन के रूप में होती है । संगठन से जुडÞे युवा जिहादी इससे काफी प्रभावित है. । कहा जाता है बगदादी इस्लामी स्टडीज में पीएचडी है । इस संगठन का मनोबल आज के समय में इतना बढÞ हुआ है कि यह अपने द्वारा किए गए अंजाम और नापाक मन्सूबों को सरेआम लोगों के सामने ला रहा है । ऐसे ऐसे विडियो संचार माध्यम पर दिखाए जा रहे हैं कि जिसे देखकर लगता नहीं कि उनके अन्दर इंसानियत जैसी कोई चीज बाकी है । यह संगठन अपने सभी कारनामों का रिकार्ड रखता है और सलाना उसे प्रकाशित भी करवा रहा है । कइस जिहादी संगठन ने ३१ मार्च को अलनावा नाम से अपने हालिया संस्करण भी प्रकाशित करवाया है, जिसमें २०१२-१३ में की गई सैन्य कारवाही की जानकारी दी है । ४०० पन्नों के इस रिपोर्ट में कई सनसनीखेज आँकडÞे सामने आए हैं जो बताते हैं कि इराक में इनका कितना आतंक है । इसमें दावा किया गया है कि उसने लगभग १०,००० वारदातों को अंजाम दिया है । इतना ही नहीं आइ.एस.आइ.एस ब्रिटीश युवाओं को भी जिहाद के लिए उकसा रहा है । इसका नेतृत्व अबु अब्दुल्लाह अल ब्रितानी कर रहा है ।
आज यह संगठन माना जा रहा है कि विश्व का सबसे अमीर आतंकवादी संगठन है । इराक पर इसका कब्जा बढÞता जा रहा है । कई शहर इसके कब्जे में है । हाल में इस संगठन ने इराक के शहर मोसुल पर कब्जा कर वहाँ से ४२९ मिलीयन डालर को लूट लिया है और इसके बाद से ही माना जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे अमीर आतंकवादी संगठन बन गया है ।
इस हालात से उबरने के लिए इराक सरकार ने अमेरिका हवाई हमले की सहायता मांगी है । पर फिलहाल अमेरिका ने हवाई हमले से इन्कार करते हुए अपनी सेना वहाँ भेजने की बात मानी है । धीरे धीरे यह संकट कई रूपों में विश्व को प्रभावित करता जा रहा है । कई देशों के नागरिक वहाँ फसे हुए हैं । जिन्हें निकालने की कोशिश की जा रही है, तो कई अब तक मौत के शिकार हो चुके हैं । नेपाली नागरिक भी वहाँ फँसे हैं । कई तो ऐसे हैं जिनके पास पासपोर्ट और वीजा तक नहीं है । नेपाली नागरिकों को वहाँ से निकालने के लिए सरकार को पुख्ता कदम उठाने होंगे ।
इराक का अतीत
आज इराक युद्धग्रस्त देश के रूप में जाना जा रहा है । लेकिन इस देश का इतिहास कुछ ऐसा है- आज मोर्डन इराक के चारो ओर तर्ुर्कीर्,र् इरान, कुवैत, जोर्डन, म्रि्र और सउदी अरब है । सौ साल पहले तक इराक की पहचान ओटोमन के साम्राज्य के रूप में थी । १३०१ में ओटोमन कुल के एक उज्जबेक ने खुद को इराक और आसपास के क्षेत्र का सुल्तान घोषित कर दिया था । उसी ने धीरे धीरे अपना साम्राज्य स्थापित किया । उसकी हद में तर्ुर्की और जोर्डन भी थे । १९१४ तक इराक में ओटोमन का साम्राज्य था । प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटिश सेना ने ओटोमन पर विजय पा लिया । १९१६ के बाद ब्रिटिश राजनेता सर मार्क सीकेस और प|mांस के राजदूत जार्जेस पिकोट ने मध्य पर्ूव के सम्बन्ध में एक गुप्त समझौता कर के इराक के अलग अलग क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया । प|mांस का नियंत्रण इराक के अलावा सीरिया और तर्ुर्की पर भी था । इसी तरह ब्रिटिश सेना ने इराक के अलावा जोर्डन, बहरीन तक नियंत्रण कर लिया था । १९२० प्रथम विश्वयुद्ध के बाद गठबन्धन सेना ने इटली के तटीय शहर सेनरेमो में एक कान्प|mेन्स करके विधिवत रूप से फैसला लिया कि इस क्षेत्र में जहाँ जिस सेना ने नियंत्रण किया है उसे ही उसके नियंत्रण वाली सीमा मान ली जाय । प|mांस और ब्रिटेन की सेना ने ४४ साल तक इराक और उसके आसपास के क्षेत्र को अपने नियंत्रण में रखा । अंततः जुलाई १९४८ में आज का इराक स्वतंत्र हुआ ।

इराक के कुछ रोचक तथ्य
१. इराक वह देश है जिसने दुनिया को पहला नक्शा और कैलेण्डर दिया ।
२. पहिए का आविष्कार इराक में हुआ था ।
३. १२ घंटे का दिन और १२ घंटे की रात की शुरुआत इराक से ही हर्ुइ है ।
४. इराक ही दुनिया का पहला देश है जिसने बताया कि १ घन्टे में ६० मिनट  और १ मिनट में ६० सेकेण्ड होते हैं ।
५. नक्षत्रों द्वारा भाग्य बताने की शुरुआत भी इराक से हर्ुइ है ।
६. इराक में मधुमक्खी पालन का इतिहास ५००० हजार वर्षपुराना है ।
७. टिडि्डयों का सबसे बडÞा दल इराक में पाया जाता है ।
८. इराक में ३२०० बी. सी. पहले ही लेखन की शुरुआत हर्ुइ थी । इसे कीलाकार के तौर पर जाना जाता है । अल्फवेट से यह इस मायने में अलग हैकि इसमे ६०० साइन का प्रयोग किया जाता है और प्रत्येक साइन एक अलग शब्द या अक्षर को इंगित करता है ।
९. इराकी मुद्रा को दीनार कहते हैं यह देनी से निर्मित हुआ है । लैटिन भाषा में देनी का अर्थ दस होता है ।
१०. माना जाता है कि काली बिल्ली से जुडÞा अंधविश्वास इराक से ही शुरु हुआ ।
११. विश्व के सबसे जहरीले साँपों में से एक स्केल वाइपर इराक में ही पाया जाता है ।
१२. ५ हजार वर्षपहले यहाँ काफी हरियाली और दलदल था लेकिन आज यहाँ रेगिस्तान है ।
१३. मशहूर कहानी अलीबाबा और चालीस चोर की रचना १००० वर्षपहले इराक में हर्ुइ थी ।

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