गैल भैंस पानी में ! नेपाल के दुश्मन तो सिर्फ भारत है, चीन तो कुल देवता हैं ! -बिम्मीशर्मा

व्यग्ंय-बिम्मीशर्मा , काठमांडू , ३ नोभेम्बर |

मधेश में करीब तीन महीने से आन्दोलन हो रहा है । पर इस निक्कमी सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग पाई । सरकार को मधेश आन्दोलन और औधोगिक शहर वीरगंज की कोई परवाह नहीं है । पर वहां के भंसार से उठने वाले राजस्व के बारे में बड़ी फिक्र है । हो भी क्यों न ? देश की सब से ज्यादा राजस्व बटोरने वाली यह भंसार सोने की अण्डे देने वाली मुर्गी है । देश की अर्थ व्यवस्था सरकार की नाकाममियों के चलते डावांडोल है ।
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इस सरकार को रतौंधी नही दिन में भी न दिखाई देनेवाला दिनौंघी हो गया है । सरकार सारे मधेशियों को और आन्दोलन मे मारे गए सभी को आतकंकारी देख रही है । क्योंकि अभी इस देश को दश साल तक देश में जनयुद्ध करने वाले जंगली और आतकंकारी चला रहे है । नए नवेले गृह मन्त्री ही जब किसी जमाने के ‘सम्मानित’ आतकंकारी है तो वह बांकी सबको भी उसी आंख से देखेंगे ।

अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए सीमावर्ती शहर वीरगंज आया हुआ एक युवक नेपाल पुलिस की गोली से मारा जाता है और उसपर भारत की उक्साहट से नेपाल में आ कर आतंक मचाने का आरोप लगाया जाता है । सवुत के तौर पर उसके पेंट के पाकेट से मिला भारतीय मोवाइल का सीम है । वाह क्या गज्जब है कोई भी भारतीय अब घूमने वा अन्य कारण से नेपाल आए तो वह नेपाली जनता और पुलिस की नजर में आतकंवादी और गुनाहगार है ।

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सारे पहाड़ी गोरे, चिट्टे नेपाली दूध के धुले और ईमानदार है और सारे मधेश के लोग विशेष कर काले लोग सभी अपराधी हैं ? वर्षो पहले बर्मा से भाग कर आए हुए लोग नेपाली हो गए । भुटान से आए हुए लोग भी नेपाली हो गए । पर यहीं पैदा हुए और पले बढे, पुश्त दर पुश्त रहते आए मधेशी नेपाली नहीं हो सकते ? वह तो भारतीय है, उनकी भारतीय विस्तारवाद को बढावा दे रहा है ? वह भारत की उक्साहट पर नेपाल में आन्दोलन कर रहे है ? क्योंकि उनके पास तो दिमाग है ही नहीं ?

इस देश का दुश्मन तो सिर्फ भारत है ? चीन, अमेरिका, बेलायतऔर यूरोपियन यूनियन तो कुल देवता हैं नेपाल के ? यह तो नेपाल का अहित कर ही नहीं सकते ? बांकी सभी देश हमें मुफ्त में खाना और बांकी सारी वस्तुएं देगें ? इसी महिमा गान के स्वर तले नेपाल का मधेश आन्दोलन जल रहा है । पर उसकी जलन किसी को दिखाई नहीं देती ? क्योंकि दूसरों की जलन देखने के लिए खुद का जला हुआ आशियाना होना चाहिए । पर मधेश को आग की भेंट चढाने वाली नेपाल सरकार की आत्मा खाक हो चूकी है इसीलिए उसको कुछ महसुस नहीं होता ।

जब सरकार में सारे सड़े हुए, लड़ाकु और आतकंवादी को शामिल करेंगें तो सरकार और देश की आत्मा तो मरेगी ही । मधेश की जनता न्याय और समानता के लिए पिछले तीन महीने से आन्दोलन कर रही है । पर सरकार, मंत्री मंडल गठन और विस्तार, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति के चुनाव और बालुवा टार में जश्न मनाने में व्यस्त है । उधर मधेश की जनता सरकार के तरफ से मुफ्त में मिला हुई गोली खा रही है । मधेश में पुलिस की गोली से मारे जाने वाले सभी आतंकारी को और मारने वाला पुलिस इस पुनीत कार्य के लिए भेजा गया यमराज का दूत ? सरकार यही कहना चाहती है न ?

नेपाल सरकार तो है ही दानव जैसी । पर यहाँ की जनता भी अब मानव नहीं रही । यहां की जनता के बदले तेवर बहुत खतरनाक हैं । वह किसी साम्प्रदायिक युद्ध की तैयारी जैसे भाव में है । इतना भेदभाव मधेशी और पहाडियों के बीच में पनप रहा है जैसे आने वाला कोई संकट का सूचक हो । राजधानी और पहाडी मूल के नेपाली इतने अराजक हो चुके हैं कि मधेशी, बिहारी, मोदी और भारत को कच्चा ही चबा जाएँगें । कोई भी देश गलत नहीं होता, देश को चलाने वाली सरकार और कुछ नौकरशाह की गलती या रवैया से किसी और देश या व्यक्ति को तकलीफ होती है । किसी देश को कोसना और गाली देना अपनी मां को गाली देने के समान है । पर हम अपनी कुण्ठाओं का भद्धा प्रदर्शन कर रहे हैं ।

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उग्र राष्ट्रवाद कभी किसी का भला नहीं करती । यह तो राष्ट्रवाद भी नहीं है । भारत को नाकाबंदी के लिए कोस रहे हैं पर चीन की वाहवाही कर रहे हैं । यह तो आसमान से गिरे और खजुर में अटके वाली बात हो गई । भारत को गाली देंगें पर चीन के तलुए चाट्ने से कोई परहेज नहीं है । चीन मे साम्यवाद है और नेपाल की सत्ता में भी अभी साम्यवाद खूब फलफूल रहा है । देश की सर्वोच्च पद राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सभामुख, प्रधानमन्त्री और गृह मन्त्री सारे साम्यवादी ? पर यह मधेश आन्दोलनको साम्य नहीं कर पाए ? इनकी नीयत ही है मधेश को उस का हक न देना और खुद पाँचों उगंली घी में और सिर कड़ाही में डाल कर मौज करना ।

देश का विकास पीछे जा रहा है, राजस्व ठप्प है । जनता दैनिक वस्तुओं के अभाव से पीड़ित है । चारो तरफ हाहाकार है पर सरकार को कोई फर्क नहीं पड रहा । यह अंधी और बहरी सरकार एक भैंस पानी में चली गई तो क्या हुआ दुसरी दूधारु भैंस फिर से खरीद कर मौज करेंगें वाली शैली में जनता को ठेगां दिखा रही है । और जनता देख और भोग रही है बाबाजी का ठूल्लू ।

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