ग्लेमर की दुनिया का कडवा सच

ग्लेमर की दुनिया का कडवा सच
पूजा गुप्ता

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बाहर से खुबसूरत और भीतर से बदसूरत है फैशन और ग्लैमर की दुनिया लाइट कैमरा और एक्शन और जाने कितनी बार पोज बनाने के बाद कितनी बार फोटो शूट के बाद एक मॉडल के करियर की शुरुवात होती है ,यानी ग्लैमर की चकाचौंध भरी दुनिया में पहला क़दम। ग्लैमर की दुनिया ऐसी जगमग भरी दुनिया होती है जहाँ पहुंचते ही आँखे इसकी चमक से चौंधिया जाती और आज का हर नवयुवक= नवयुवती इस झूठी जगमगाहट में खोना चाहते है ,पर इस दुनिया की सच्चाई तो यह है की यह दुनिया खूबसूरत ढंग किया हुआ सिर्फ और सिर्फ देह का व्यापार ही तो है जो सिर्फ और सिर्फ देह की खूबसूरती और चमक =दमक और सुंदरता पर ही तो टिका हुआ है। ग्लैमर की दुनिया ऐसी सपनो की दुनिया है की पहली कामयाबी मिलते ही इन्सान स्टार बन कर पूरी दुनिया पर छा जाता है ,और दिमाग सौवें आसमान पर पहुंच जाता है ,पर वही इन्सान जब गिरता है तो दो पग जमीन भी नसीब नही होती है ,और इस कद्र अँधियारो में खो जाता है की खोजने पर सुराग तक नही मिलता। इस तितता से सराबोर सच्चाई को जानने के बाद भी आज हर कोई इसी सुनामी में डूब जाना चाहता है। इस चमकदार ,चमकीली दुनिया की यही कॉमेडी ,यही ट्रेजडी है ,यही ओरिजिनल टेलीकास्ट है।यह दुनिया ऐसी दुनिया है जहाँ पहुँच कर इन्सान खुली आँखो से अपने सुनहरे भवीष्य के सुनहरे सतरँगी सपने संजाने लगता है और इसके बारे में सोच कर ही इतना अच्छा लगता है की मात्र अस्मरण से ही मन मचल जाता है की काश की हम भी मॅगज़ीन के कवरपेज पर छाए रहते। सारे दुनिया में हम भी मशहूर हो जाते। हमारे पास भी बंगला, गाड़ी ,नौकर – चाकर होते। हम भी बिदेशो के ट्रिप पर जाते। इंटरनेशनल ब्रांड पे भी छाए रहते। मीडिया वाले हमारी इंटरव्यू लेने के लिए हमारे आगे पीछे घूमते और लोग ऑटोग्राफ के लिए लाइन लगाते। ये सोचने मात्र से ही मन सपनो की दुनिया में ही हिलोरे खाने लगता है ,पर क्या ग्लैमर की दुनिया ड्रग्स की तरह [स्लो मोशन पाइजन ] की तरह नही है ? क्या ये चकाचौंध हमेशा बरकररार रहेगा। [जीवन जमीनी हकीकत का नाम है , यथार्थ इसका अभिभाज्य अंग है. ] मतलब हर सुबह की रात होती है पर हर रात की सुबह हो जरूरी तो नही और मॉडलिंग की दुनिया में मतलब एक मॉडल के लिए एक समय ऐसा है , जब उसके इर्द – गिर्द उसके चाहनेवालों की लाइन लगी होती है उनके पास काम देने वाले और कामो का ताता लगा रहता है पर जैसे चमक फीकी पड़ते ही वो इतना अकेला हो जाता है की अधूरापन ,डिप्रेसन , मानसिक ब्याधियों मनोरोगों से ग्रसित हो जाता है। अगर बदलते हालत और अपने गिरते हुए मनोबल को न सम्भाला तो वो पागल भी हो सकता है या मौत को गले लगा लेता है ,क्योंकि अगर इस बीकीेरीत मनोदशा का एक प्रमुख कारण यह भी है की कोई भी मॉडल को कभी भी यह सहय् नहीं होता है की उसके सर से सुपर मॉडल का ताज उतार कर किसी और को पहनाया जाये। अपने साम्राज्य को छीनता हुआ देख कर इस कदर हताश और निराश हो जाता है की वो ड्रग्स या शराब का आदि बन जाता है ,और एक दिन हालात ऐसे आ जाते है की अपना सब कुछ बेच कर सड़क पर आने तक की नौबत आ जाती है। किसी भी मॉडल की ग्लैमर की दुनिया में कितनी होगी ? पांच साल या ज़्यादा से ज़्यादा सात साल पर यही वो वक़्त होता है की जब वो मॉडल की दुनिया के सरताज़ होते है, पर वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता। एक जाता है तो दस आते है और सौ लाइन में लगे रहते है। [दुनिया अजब सराय फ़ानी देखी ,यहाँ हर चीज की आनी जानी देखी ,जो आके ना जाए वो बुढ़ापा देखा ,जो जा के ना आए वो जवानी देखी ] ग्लैमर की दुनिया का कभी कोई अंत नही , लेकिन ये कोई क्यों नहीं देख पता की एक मॉडल की उम्र ढलने के बाद उसका क्या होता है , क्योंकि जो चीज जितनी जल्दी से आती है उतनी ही जलदी से जाती भी है। एक ग्लैमर की ग्लैमरस ख़त्म होते हीं मिलतीं कभी न ख़त्म होने वाली तनहाई ,दम घुंटने वाली खामोशी ,और एक पर एक बुरे समय के तमाचे कुछ इस क़दर पड़ने लगता है की रुकने का नाम ही नही लेता है।आत्म बिश्वाश की तो धज्जियाँ उड़ने लागती है। सुनहले ख्वाबों का घरौंदा वक़्त की मार पडते ही तिनके की तरह बिखर जाता जो कभी उसने बड़े ही प्यार से अपने सपनो को संजोया होता है। ऐसी निराशा भारी परिस्तिथीती में सिर्फ़ एक ही चीज नजर आती है उसे आत्महत्या= आत्महत्या और सिर्फ आत्महत्या।अभी अगर हाल की बात करें तो सभी ने ये सनसनीखेज सुना ही होगा कि विवेका बाबा और नफीसा जोसेफ जैसी सुपर मॉडल इस नकली दुनियाँ के बलि चढ़ गए यानि सुसाईड लिया और गीतांजली कपूरी जो कभी फ़ैशन की दुनिया की चमकती सितारा हुआ करती थी पर जैसे ही उनके सितारों को गर्दिश में आते ही उनकी आर्थिक और मानसिक हालत ऐसी गई सड़कों पर उन्हें भीख मंगाते हुए पाया गया। इस दुनिया कि ऐसी ढेरों कहानियाँ है जिसने कई जिन्दगियों को गुमनामियों के अँधेरे ढकेल दिया। किसी कवी ने क्या खूब कहा है कि [जो चमक जिस वक़्त चमकाती है वही चमक जलाती भी है।फैशन फिल्म भी इस बात का जीता जगता सबूत है। फिर भी ये बिचित्र बिडम्बना है कि सारी सच्चाई जानने के बावजुद भी इस आग में आज का हर लड़का हर लडक़ी इस आग में जलना चाहते है क्योंकि उनके लिए यह अनबोला स्वर्ग है से बढ़ कर है। आज की पीढ़ी कामयाबी के सबसे उंची चोटी पर पहुंच कर पूरी दुनिया की नज़र में खुद को आइकॉन बनता हुआ देखना चाहती है। एक सर्च से ये भी पता चला है की पुरुषों की अपेक्षा औरतें ज्यादा अपनी जान देती है या मानसिक संतुलन जल्दी खो बैठती है क्यों कि पुरुषों की तरह उन्हें दिल का व्यापार करने नही आता। खुबसुरती का झूठा नकाब पहने हुए ग्लैमरस की दुनिया अंदर से उतनी ही बदसूरत और खोखली है। अगर ध्यान से देखा जाएं तो यहाँ देह का सरेआम बोली लगया जाता है। यह बड़ी ही खुबसुरती और बड़े ही शान से किया हुआ गए घीरनीत व्यापार है।

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