घरेलु कामदार सरस्वती की भी हत्या

अनामनगर स्थित कृष्ण प्रर्साई के पांच मंजिले मकान में घरेलू कामदार के रूप में कार्यरत ३१ वषर्ीया एकल विधवा महिला सरस्वती सुवेदी मंसिर ३० गते दोपहर को घर के ऊपरी मंजिल पर मृत अवस्था में पाई गई। उसकी मौत की इस घटना को लेकर इस समय महिला अधिकारकर्मी सिंहदरबार से लेकर बालुवाटार तक आवाज उठा रही हैं। उसके मकान मालिक का दावा है कि सरस्वती सुवेदी ने आत्महत्या की है जबकि सुवेदी के घरवालों का कहना है कि उसकी हत्या की गई है।

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घरेलु कामदार सरस्वती की भी हत्या

सरस्वती की हत्या को लेकर उसके परिवार वालों ने हनुमानढोका में मामला दर्ज कराते हुए मकान मालिक और उसके परिवार वालों को नामजद अभियुक्त बनाया था। लेकिन पहले तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से भी इंकार कर दिया। तीन दिनों तक प्रयास के बावजूद मामला दर्ज नहीं करने के बाद कई संघ संस्थाओं द्वारा आवाज उठाने के पर पुलिस ने बडÞे अनमने ढंग से मामला दर्ज कर लिया।
कौन है सरस्वती –
मोरंग के डांगीहाट की रहने वाली सरस्वती को ७ वर्षपहले अर्थात् २४ साल की उम्र में ही विधवा होना पडÞा। पति के संसार छोडÞ कर जाने के बाद दो वर्षकी बेटी रिया अभी ९ वर्षकी हो गई है। पति के निधन के एक साल बाद वह अपनी छोटी सी बच्ची को लेकर काठमाण्डू के अनामनगर स्थित कृष्ण प्रर्साई के घर में घरेलू कामदार के रूप में काम करने लगी। पांच मंजिला उस मकान के भूतल पर बने एक छोटे से कमरे में वह अपनी बेटी के साथ रहने लगी। सरस्वती के मायके के लोग भी घट्टेकुलो में रहते है। आर्थिक अवस्था कमजोर होने के कारण उसकी बहन भी लोगों के घरों में काम करती है।
घटना का विवरण
मृतक परिवार की तरफ से पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक मार्ग ३० गते शाम करीब साढे चार बजे घर मालकिन सावित्री प्रर्साई स्कूटी लेकर घट्टेकुलो में रहे सरस्वती के पिता ६५ वषर्ीय खड्ग अधिकारी के किराए वाले मकान में पहुंची। उन्होंने बिना कुछ बोले खड्ग अधिकारी को स्कूटी पर बैठने का इशारा किया। फिर वहां से सीधे अपने घर पहुंची। जहां भूतल पर ही सरस्वती रहती थी। उसके पिता सीधे वहां जाना चाह रहे थे लेकिन मकान मालकिन ने उन्हें सीधे ऊपर आने के लिए कहा। वहां पहले से ही कुछ पुलिस वाले और कुछ अन्य लोग मौजूद थे। एक कमरे के आधा भीतर और बाहर सरस्वती का मृत शरीर निढाल अवस्था में पडा हुआ था। मकान मालिक कृष्ण प्रर्साई ने कहा कि आपकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है। बाथरूम का दरवाजा भीतर से बन्द था तो हमलोगों ने बाहर से दरवाजा तोडÞकर उसकी गले में लगे फांसी के फंदे को निकाला।
इतनी ही देर में सरस्वती की बहन भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी। नीचे गेट पर लोगों की भीड बढÞती जा रही थी। पुलिस वाले लोगों को भीतर जाने से रोकने लगे। उसके बाद पुलिस ने शव को हनुमानढोका पहुंचाया। सरस्वती के घर वालों का दावा है कि उसने आत्महत्या नहीं की है बल्कि मकान मालिक ने उसकी हत्या कर दी है। इस काम में उसका साथ कुछ और भी लोगों ने दिया है। लेकिन पुलिस वालांे जबर्दस्ती आत्महत्या की बात कहते हुए उसके घरवालों से उस पर दस्तखत कराना चाहते थे। लेकिन सरस्वती के घर वालों ने पुलिस की इस दलील को नहीं माना और मुचुल्का पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया।
इसी बीच मकान मालकिन सावित्री ने सरस्वती के परिवार वालों को मुद्दा मुकदमा में नहीं फंसने की नसीहत देते हुए मृतक सरस्वती की बेटी की पढर्Þाई लिखाई का सारा खर्च उठाने का लालच दिया। यहीं से परिवार वालों का शक यकीन में बदल गया।
पुलिस भी इस मामले को रफा दफा करने में जुटी रही। पुलिस के आला अधिकारियों ने मृतक परिवार पर शिकायत दर्ज नहीं करने के लिए हर तरह के हथकण्डे अपनाए। परिवारवालों के दबाब में आखिरकार पुलिस ने तीन दिनों के बाद पोष्टमार्टम कराया। लेकिन परिवारवालों का आरोप है कि वह भी झूठा था। क्योंकि उस पोष्टमार्टम में भी वही रिपोर्ट आई जिसका जिक्र पुलिस कर रही थी कि सरस्वती ने आत्महत्या की थी। लेकिन परिवार वालों को पोष्टमार्टम रिपोर्ट पर जरा भी यकीन नहीं हो रहा था। वे कई महिला संगठनों के पास गए। पत्रकार सम्मेलन किया। लोग सडकों पर उतरे तब सरकार भी झुकी और दुबारा पोष्टमार्टम करने का आदेश दिया गया।
मकान मालकिन का आर्थिक प्रलोभन देना, पुलिस द्वारा पोष्टमार्टम के लिए देरी करना, पीडित परिवार पर बार बार समझौता करने के लिए दबाब डÞालना ऐसे कई कारण हैं जो इस घटना को आत्महत्या नहीं हत्या होने की पुष्टि होती है। इतना ही नहीं इस घटना में कुछ राजनीतिक दल और पुलिस के आला अधिकारियों की तरफ से गैर कानूनी तरीके से पुलिस पर मामले को रफा दफा करने के लिए दबाब डÞालने से दाल में काला लग रहा है। नेपाली कांग्रेस के महामंत्री कृष्ण प्रसाद सिटौला, वामपंथी नेता सीपी मैनाली और नेपाल पुलिस के एआईजी भीष्म प्रर्साई के साथ अभियुक्त घरमालिक प्रर्साई का किसी ना किसी प्रकार से पारिवारिक संबंध है, जिसकी वजह से पुलिस पर दबाब बढÞ रहा है। लेकिन सडकों पर बढ रहे दबाब के बाद प्रधानमंत्री ने खुद मामले को गम्भीरता से लेते हुए इसकी फिर से जांच के आदेश दे दिए हैं। िि
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