घृणावाद ! इस देश में खराब तो बस राजेन्द्र महतो हैं ओली तो दूध का धोया हुआ : बिम्मीशर्मा

बिम्मीशर्मा, काठमांडू १० नोभेम्बर ,(व्यग्ंय)

अभाव के इस कालरात्रि में और कुछ फले न फले पर घृणावाद जरुर फल और फूल रहा है । एक विशेष नश्ल, जाति या कौम के लिए जहर उगला जा रहा है । यह विष बेल जब फल कर खुद को ही निगल्ने लगेगा तब पता चलेगा क्या खोया और क्या पाया ? इस देश में मधेशी होना सबसे बडा गुनाह है । और मधेशीयों को हिकारत से देखना राज्य सत्ता और राजधानी की जनता का जन्म सिद्ध अधिकार है । देश में नश्लवाद और संप्रदाय इतना हावी हो चुका है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर किसी मधेशी नेता या बुद्धिजीवी को आसीन होते हुए नहीं देख सकती यहाँ की जनता ।

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मधेशी अर्थात धोती, धोती अर्थात बिहारी, बिहारी अर्थात भारतीय । कोई मधेशी अपने व्यक्तिगत काम से भी भारत जाता है तो वह जरुर वहां का एजेंट है । वह यहां की अन्दरुनी बात उधर बता रहा है । वह भारत का एजेंट बन कर खूब पैसा एेंठ रहा है । मतलब मधेशी इमानदार हो ही नहीं सकता । वह तो सिर्फ भ्रष्टाचार करेगा और पहाडी तो बस इमान का माला जपता रहता है । पहाडी जनता तो इधर से उधर और दो, पांच कर ही नहीं सकता । वह हिमाल की हवा में सांस लेता है इसीलिए अशुद्ध नही हैं । पर दक्षिणी छोर में रहने वाले मधेशी जनता छिः यह भी मानव है क्या?

नवनियूक्तउप(प्रधानमंत्री चित्रबहादुर केसी ने अभी कुछ दिन पहले कहा कि ‘ मधेश आन्दोलन के द्धारा भारत मधेशीयाें को भड्का कर तराई को हड्पना चाहता है । ’ गोया तराई कोई मिठाई का टुकडा है जो खाया जा सके । यह सब घृणावाद वाली बातें सुन कर भी मधशी और यहां के नेता चुप रहते हैं । वह पलट कर क्यों नहीं कहते की पहाडी जनता और नेता भी पहाड को या सगरमाथा को टुकडा कर के चीन को बेच सकते हैं ? वह क्यों नहीं इन तथाकथित पहाडी नेताओं पर उंगली उठाते की पहले तुम गिरहबान में झांको फिर हम से बात करना ।

अभी तक नेपाल के शासन सत्ता में पहाडी मूल के नेता ही काबिज रहें हैं । मधेशी मूल के कुछ नेताओं को मन्त्रालय ही मिला है, पूरी मंत्री मंडल की जिम्मेवारी नहीं । तब फिर बडे, बडे निर्णय किसने किया ? भारत या अन्य देशों से विभिन्न संधि सम्झौता किसने किया ?और बिजली उत्पादन के लिए अंट, शंट कंपनियों को लाइसेंस किसने दिया ? और देश की बडी, बडी नदियों को किसने बेचा ?जाहिर हैं इन्हीं पहाडी नेताओं ने । फिर मधेशी या मधेश के नेता हीं क्यों गाली खाएं , क्यों इस देश की अंधी और बहरी जनता की कोपभाजन और घृणावाद का शिकार बनें ?

जिस सुनियोजित तरीके से घृणावाद का जहर मधेश और मधेशीयों के प्रति फैलाया जा रहा है उस के जनक हमारे प्रधानमन्त्री श्री केपीशर्मा ओली हैं । उन्होंने ही संविधान में मधेश या तराई लिखवाने से मना कर दिया था । पता नहीं ओली किस ग्रह में पैदा हुए हैं । पर वह इस देश के लिए सबसे बडी ग्रहदशा हैं । देश में घृणावाद का जहर इस तरह से फैलाया जा रहा है कि जो ओली और उन के कार्य सम्पादन को बहुत अच्छा बोल कर वाह१वाह कर के ताली बजाएतो वह देश भक्त और राष्ट्र प्रेमी । जो मधेश, मधेशी, बिहारी, मोदी और भारतको गाली दे वह और ज्यादा राष्ट्रवादी जनता और नेता कहलाता है । जो ओली के कार्य सम्पादन से नाखुश हो कर उगंली उठाए, जो मधेश और मधेशी को जय, जयकार करे, उन के अधिकार के लिए लडे वह सबसे बडा देश द्रोही माना जा रहा है । और देश की मीडिया और प्रतिष्ठित व्यक्ति ही इस बात को हवा देनें में लगी हुई है ।

कहा जाता है कि लोकतंत्र में सरकार के लिए सब से बडा विपक्ष मीडिया को माना जाता हैं । पर इस देश की भांड मीडिया ओली के हर जायज, नाजायज काम को ढक रही है । दुनिया का आठंवा अजुबा जैसा एक बार में छ उप-प्रधानमंत्री नियुक्त होना है । पर अतिवाद की पराकाष्ठा यह है की इस देश की मीडिया और पत्रकार इस अजुबे को सहज रुप में लेते हुए कहती है ‘ यह कोई अनहोनी बात नहीं है, छ उप-प्रधानमंत्री होने से कुछ खराब नहीं होता, बस भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिए । यानि कि ओली की गोली दाग्ने वाली सरकार कुछ भी करे ठीक है । क्योंकि वह राष्ट्रवादी है । झापा कांड के कई लोगों को काट कर हाथ शुद्ध कर के आए है ।

इस देश में खराब बस राजेन्द्र महतो है । क्योंकि वह बिहार से हैं और भारतीय है । बीस साल तक वह मंत्री बने रहे तो कुछ नहीं हुआ, किसी को इस से परहेज भी नहीं था । लेकिन जब से वह मधेश आंदोलन के अगुवा बने हैं सब कि आंखो की किरकिरी बन गए है । तब वह भारतीय नागरिक नहीं थे, क्योंकि इस देश की नौकरशाह जिसने महतो को नागरिकता मुहैया कराया था उस को इन से फाइदा हो रहा था । मीडिया भी खुब माल बटोर रही थी । लेकिन जब से मधेश में आंदोलन शुरु हुआ और मधेशी आंदोलनकारी जम कर धर्ना में बैठ गए । तब से मधेशी और राजेंद्र महतो सहित अन्य मधेशी नेता इस देश की शासन सत्ता को अखरने लगे । क्योंकि उनका दाना, पानी जो बंद हो गया है । लोगों की घृणावाद और निकृष्टता की पराकाष्ठा यह है कि परसों वीरगंज मे आंदोलन के दौरान बेहोश हो कर बिमार पडे राजेंद्र महतो की मरने की दुआ कर रहे है लोग । वाह रे मानवता?

मधेश मे नागरिकता बाटं कर पैसा बटोर रहा है इस देश का पहाडी वर्ग का नौकरशाह । और गाली खा रहे हैं मधेश और मधेशी । कोइ किसी देश का नागरिकता तब ही खरीदता है जब वह बिकता है । क्यो भारत में आधार कार्ड या राशन कार्ड किसी अन्य देश के नागरिक को बेचा नहीं जाता ? खराबी आपकी शासन प्रणाली में है और आप दोष देते हैं मधेशी, बिहारी और भारतियों को ?बिहार मोदीऔर बिजेपी हारती है तो यहां पर लड्डू बांटा जाता है । लोग खुशी में नारियल फोडते है । इतने ही खुश थे तो अपना सिर क्यों नहीं फोडा ? बिजेपी के बिहार मे हारने पर शराब की शर्त लगवाते हैं । इनका वश चलता तो मैच फिक्सिंग जैसा निर्वाचन फिक्सिंग करवा कर बिजेपी को हरा देते ।

बैंक का सिइओ, इन्जिनियर, डाक्टर, शिक्षाविद, बुद्धिजीवी, लेखक और पत्रकार बिहार मे बिजेपी के हारने पर मोदी द्धारा नेपाल में लगाया गया नाकाबंदी के पाप के रुप मे पशुपतिनाथ ने मोदी को दिया गया दंड मानते है । हे १ भगवान१यह कैसी पर पीडक मानसिकता है ? हम अपने अदंर और बाहर चारों तरफ यह कैसी घृणवाद को फैला रहे हैं ? इस देश का भविष्य क्या होगा ? पडोसी की दोनो आंख फूट जाए तो अपनी एक आंख फोड्ने के लिए भी यह तैयार है । अन्य देश मे समाजवाद, साम्यवादऔर पूंजीवाद फल, फूल और फैल रहा है । और हमारे देश में घृणावाद का जहर फैल रहा है । और इसे फैलाने और खाद्य, पानी देने का काम हम सभी कर रहें हैं ।

जय हो घृणावाद की !

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