चंपारण में बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा राम मंदिर, होली के बाद शुरू होगा निर्माण

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पटना,मधुरेश,१७ दिसिम्बर | बिहार में दुनिया के सबसे बड़े मंदिर के निर्माण कार्य की शुरुआत बहुत जल्द किया जाएगा। इसकी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिर निर्माण की परिकल्पना करने वालों का कहना है कि अगले साल होली के त्योहार के बाद मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने के मार्ग में अब कोई व्यावधान नहीं है। कंबोडिया सरकार की आपत्तियों के बाद मूल योजना में संशोधन किया गया है। राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव व भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल ने कहा, “हमारे विराट रामायण मंदिर पर कंबोडिया सरकार की आपत्तियों के बाद हमने मूल योजना में संशोधन किया है।” कंबोडिया ने प्रस्तावित मंदिर को अंगकोर वाट मंदिर की प्रतिलिपि बताते हुए आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा, हमने होली के बाद निर्माण कार्यशुरू करने की तैयारी कर ली है, जो एक शुभ मुहूर्त होगा। भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी श्री कुणाल ने कहा कि प्रस्तावित मंदिर के डिजाइन या वास्तुकला का कंबोडिया के अंगकोरवाट मंदिर से कोई लेना देना नहीं है। कंबोडियाई मंदिर परिसर का निर्माण 12वींसदी में राजा सूर्यवर्मन के शासनकाल में हुआ था और अब यह यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल है।

*मुसलमानों ने भी दी जमीन।* आचार्य कुणाल ने कहा, “मुझे सरकार की ओर से सूचित किया गया है कि कंबोडियाई सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है।” इसलिए निर्माण कार्य शुरू करने का निर्णय लिया गया है। पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि मंदिर का डिजाइन खास तौर पर इंडोनेशिया व थाईलैंड समेत भारत और दुनियाभर के दर्जनों प्रमुख मंदिरों से प्रभावित है। उन्होंने कहा,”कई मुसलमानों ने मामूली दर पर जमीन दी है। बिना उनकी मदद के इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शुरू करना मुश्किल था।”
*165 एकड़ भूमि पर होगा निर्माण*
प्रस्तावित मंदिर बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया के निकट जानकी नगर कैथवलिया-बहुआरा में करीब 165 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा। प्रथम चरण में निर्माण कार्य पर 200 करोड़ रुपये की लागत आएगी। प्रथमचरण में रामायण मंदिर, शिव मंदिर और महावीर मंदिर का निर्माण होगा। मंदिर का मुख्य आकर्षण इसकी 405 फीट ऊंची अष्टभुजीय मीनार होगी। यह 215 फीट ऊंची अंगकोरवाट मंदिर की मीनार से ऊंची होगी। मंदिर परिसर में 18 मंदिर बनाए जाएंगे। मंदिर परिसर में 44 फीट ऊंचे और 33 फीट की परिधि वाले शिवलिंग स्थापित करने का प्रस्ताव है, जो दुनिया में सबसे ऊंचा शिवलिंग होगा।

*कंबोडियाई सरकार ने जताई थी आपत्ति*

आचार्य कुणाल ने कहा कि जब गत् साल मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होने वाला था तो कंबोडियाई सरकार ने भारत सरकार से यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि यह अंगकोरवाट मंदिर की नकल है। श्री कुणाल और उनकी टीम ने योजना की फिर से जांच की। गत् साल और इस साल विदेश मंत्रालय के जरिए नॉम नेन्ह को संशोधित योजना भेजी दी गई थी। नई दिल्ली स्थित कंबोडियाई दूतावास ने कथित रूप से संकेत दिया है कि आपत्तिजनक स्थिति में वह संशोधन का सुझाव देगा।

*मुसलमानों ने भी दी जमीन।*
आचार्य कुणाल ने कहा, “मुझे सरकार की ओर से सूचित किया गया है कि कंबोडियाई सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है।” इसलिए निर्माण कार्य शुरू करने का निर्णय लिया गया है। पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि मंदिर का डिजाइन खास तौर पर इंडोनेशिया व थाईलैंड समेत भारत और दुनियाभर के दर्जनों प्रमुख मंदिरों से प्रभावित है। उन्होंने कहा,”कई मुसलमानों ने मामूली दर पर जमीन दी है। बिना उनकी मदद के इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शुरू करना मुश्किल था।” मंदिर के एक हॉल में20,000 लोगों के बैठने की क्षमता होगी और मुख्य मंदिर में राम, सीता, लव और कुश की प्रतिमाएं लगाई जाएंगी। मंदिर का निर्माण नामी कंस्ट्रक्शन कंपनी एल एंड टी इंडिया करेगी। यहां बता दें कि विराट रामायण मंदिर की परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए आचार्य किशोर कुणाल के नेतृत्व में श्री विराट रामायण मंदिर निर्माण समिति का गठन किया गया है। मंदिर निर्माण समिति से जूड़े ललन सिंह, रामाकांत तिवारी, मयंकेश्वर सिंह, पत्रकार मधुरेश प्रियदर्शी एवं अन्य सभी सदस्य श्री कुणाल की इस अति महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

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