चर्चा में महा गठबन्धन ! मधेश की जनता को संगठन चाहिए बिखराव नहीं : श्वेता दीप्ति

श्वेता दीप्ति, काठमांडू,२७,जनवरी |
‘देर आए दुरुस्त आए’ हमारे मधेशी नेता अगर चाहें तो मधेशी जनता को यह कहने का अवसर प्रदान कर सकते हैं, एक मंच पर संगठित होकर । क्योंकि मधेश की जनता को आज संगठन चाहिए, बिखराव नहीं । चर्चा में है कि महा गठबन्धन की प्रबल सम्भावना बनती नजर आ रही है । ईश्वर करे ऐसा ही हो । सच तो यह है कि इस गठबन्धन की आवश्यकता उस समय से मधेश को है जब मधेश की जनता ने अपनी ही मिट्टी के नेताओं को उनकी रवैए की वजह से नकारा था । उस नकारे जाने की गम्भीरता को मधेशी नेताओं ने तब भी नहीं समझा था और आज भी ईमानदारी से इसकी आवश्यकता नहीं समझ पा रहे हैं । कहने वाले ने यूँ ही तो नहीं कहा है कि, ‘एकता में बल है’ । एक लकड़ी को तोड़ना आसान है,  लकड़ियों के गठ्ठर को नहीं । यह सच है कि सत्ता ने मधेश को हाशिए पर रखा है किन्तु, उससे भी कटु सत्य यह है कि मधेशी नेताओं की आपसी असामंजस्यता ने ही मधेश आन्दोलन को इतना लम्बा खींचा है । सत्ताधारियों ने यही सोचा कि पद के कुछ प्रलोभन के साथ ही आन्दोलन स्वतः खत्म हो जाएगा । आज भी वह इसी सोच पर कायम है तभी तो मधेशी जनता की भावनाओं के विपरीत जाकर संशोधन की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है । मधेशी नेताओं की नीयत को सत्ता इसी सोच के साथ आज तक आँकती आई है कि उन्हें एक पद दे दिया जाएगा और वो उनके साथ हो लेंगे और जिसका उदाहरण आज भी सत्ता में मौजूद है । यही वजह थी कि आन्दोलन की शुरुआत से ही शायद मधेश की जनता के नब्ज की गति को सत्ता नहीं पहचान पाई थी । किन्तु गुजरते वक्त ने यह जता दिया कि जनता आन्दोलनरत है, नेता नहीं । अगर जनता ने अपनी दृढ़ता का परिचय नहीं दिया होता तो, आन्दोलन का अवसान तो कब का हो चुका होता । jp=rajendra
खैर, अब भी देर नहीं हुई है । मधेशी मोर्चा को सशक्त रूप में सामने आना होगा । सच है कि विचार अलग हो सकते हैं किन्तु जब खिलाड़ी मैदान में होता है तो उस वक्त न तो उसके विचार अलग होते हैं, न जाति, न धर्म और न समुदाय । उनके अन्दर सिर्फ एक जज्बा होता है, जीतने का और यही जज्बा उसे मंजिल तक पहुँचाती है । कल विराटनगर में जो जलवा जनता का दिखा क्या उस जुनुन से मधेशी नेता अपरिचित हैं ? जनता की इस उर्जा को बाँटने की नहीं समेटने की आवश्यकता है । जनता मर रही है अपने अधिकार के लिए परन्तु अब तो यह अधिकार शब्द भी अपना अस्तित्व खोता जा रहा है । कहते हैं जगे को जगाया नहीं जाता । सत्ता यही तो कर रही है, उसे पता है कि उसकी जनता क्या मांग रही है किन्तु देने की नीयत नहीं है तभी तो लाशों के ढेर को भी वह अनदेखा कर रही है । इसलिए अब तो मधेशी नेताओं को एक झण्डे के तले आना ही होगा । जनता सर्वोपरि होती है नेता नहीं । नेता को यह नहीं भूलना चाहिए कि अगर जनता आपको प्रश्रय नहीं देगी तो आप भी आम इंसान ही हैं । जनता ही आपको खाक से फलक पर बैठाती है । अब तो इसे मरने से रोकिए । 
सूत्रों से पता चला है कि कल्ह विराटनगर में  सद्भावना अध्यक्ष राजेन्द्र महतो और तमरा अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता के बीच लगभग ढाई घण्टे तक बातचित हुई | संयुक्त रूप से आन्दोलन करने की सहमति की सम्भावना बलवती हुई है । महागठबन्धन पर बात अब भी अटकी हुई है किन्तु एकसाथ आन्दोलन परिचालन समिति बनाने पर आपसी समझदारी हो रही  है । तमलोपा अध्यक्ष यहाँ नहीं हैं और उनकी सहमति और साथ आवश्यक है इसलिए उनका इंतजार किया जा रहा है । उपेन्द्र यादव में अब भी हिचकिचाहट है । यह हिचकिचाहट शायद इसलिए हो सकती है कि उनके साथ जनजाति जुड़े हुए हैं । किन्तु मांग तो उनकी भी अधिकार की ही है फिर अगर वो इस आन्दोलन समिति में साथ होते हैं तो एक नई दिशा आन्दोलन को जरुर मिलेगी । अपुष्ट सी खबर आ रही है कि मधेश स्वतंत्रता के नायक सीके राउत दिल्ली में हैं और यह भी खबर है कि अगर आन्दोलन को एक नए सिरे से परिमार्जित कर के एक मंच तैयार होता है तो उनका भी साथ प्रत्यक्ष रूप से आन्दोलन को मिल सकता है । लगभग नब्बे हजार कैडर सीके राउत के साथ हैं जिनमें से दस हजार तो जेल भरो आन्दोलन के लिए तैयार हैं । अगर यह सारी शक्ति संचित होती है तो कोई वजह नहीं होगी कि मधेश आन्दोलन को निष्कर्ष ना मिले । मधेशी जनता का निरन्तर दवाब मधेशी नेताओं पर बना हुआ है और अब नेता भी इसे अनदेखा करने की स्थिति में नजर नहीं आ रहें हैं । 
आन्दोलन ने कालाबाजारी को प्रश्रय दिया हुआ है । नेपाल शायद विश्प पटल पर पहला राष्ट्र होगा जहाँ के प्रधानमंत्री स्मगलरों को धन्यवाद दे रहे हैं और जहाँ सत्ता के साए में यह सब फलफूल रहा है । जनता हर ओर से मर रही है चाहे वह तराई मधेश की जनता हो या पहाड़ की । कम से कम उन्हें तो अहसास दिलाइए कि नए नेपाल में नया क्या है ? नए के नाम पर अगर अब तक कुछ हासिल हुआ है तो, मौत, कालाबाजारी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पलायन । नेतागण साँप भी अपने केंचुल को बदलता है बस अब आप सबकी बारी है । 
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