चलचित्र संघ की बदनीयति, मधेशी कलाकार उपेक्षित

मनोज बनैता, लाहान, १५डिसेम्वर । कहावत है चोर–चोर मौसेरे भाई ठीक ऐसा ही हाल है नेपाल–चलचित्र संघ का जो पुर्णरूप से खसवादी शासक का मोहरा बना हुआ है । उधर सरकार की मधेश विरोधी मानसिकता और असुरी खसवादियो के फेके हुए टुकड़ाें पर पलने वाले चलचित्र संघ ने भी आखिरकार अपने मालिक के बहकावे में आकर एकलौते ढंंग से सिर्फ पहाड़ी कलाकार समावेश करके कार्यसमिति तैयार किया है । नेपाल चलचित्र कलाकार संघ का अधिवेशन मंसिर २६ गते काठमाण्डौं मे किया गया था । उक्त अधिवेशन में समावेशी, समानुपातिक और जनसंख्या के आधार को किनारा लगाते हुए एकलौती पहाडी कार्यसमिति बनाई गई है । एकल सम्प्रदायी कार्यसमिति का मधेश मीडिया मिशन नेपाल ने घोर आपत्ति जताई है । मधेश बन्द के समय में चलचित्र संघ ने काठमाण्डु के गैर कलाकारों को भी सदस्यता देकर कार्यसमिति विस्तार किया है । मधेश मीडिया मिशन के एक सदस्य के अनुसार बन्द के समय में किए गए अधिवेशन में मधेश के कलाकार की उपेक्षा की गई है । अधिवेशन ने समावेशी के आधार को अनदेखा किया है । मिशन विधान संशोधन और मधेश के कलाकार को सदस्यता प्रदान करने के लिए बारम्बार चलचित्र संघ से माँग कर रही है ।10334304_356305844522727_3816514402458347040_n
काठमाण्डौं स्थित चलचित्र क्षेत्र में काम कर रहे राजकुमार साह ने कहा कि ये मधेशी कलाकार के लिए किया गया षड्यन्त्र है । ये कैसी लोकतन्त्र है नेपाल में जिधर हरेक लोकतान्त्रिक मुल्य और मान्यता को बड़ी बेरहमी से कुचला जा रहा है ? मधेश बन्द होने के कारण काठमाण्डौं मे किए गए संघ के अधिवेशन में मधेशी कलाकार सहभागी नही हो सके । मधेशी कलाकार अधिवेशन के मिति बदलने का आग्रह किया था मगर मधेशी कलाकारों की उपेक्षा करके समावेशी का आधार ही बन्द किया गया । इसी बीच में, ऐसे गैरसमावेशी संघ के विरोध में एक अलग चलचित्र संघ गठन कार्य तीव्र किया जा रहा है ।

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