चित्रगूप्त महाराज मन ही मन सोचते होगें कि नेपाल के लोगों की खोप्डी उल्टी क्यों घूमती है ?

बिम्मीशर्मा, काठमांडू ,१५ अगस्त |
जिस देश में किसी के जन्मकालाइसेन्स नागरिकाको मानागयाहो वहां पर पत्रकारों को भीलाईसेंस देने किपहल करनाकोई आश्चर्य जनक बात नहीं होगी । शिक्षण पेशा करने के लिएलाईसेंस, वाहनचलाने के लिएलाईसेंस किव्यवस्थातो पहले से हीथा । अबपत्रकारिता करने के लिए परीक्षा दे कर उतीर्ण होने के बादलाईसेंस ले कर कार्य क्षेत्र में कुद्ने के दिनआ रहा है ।
जिस देश में कोई निष्पक्ष पत्रकारिता नहीं करता उस देश में पत्रकारों को लाईसेंस देने कि बात हास्यास्पद और बेमानी है । जहां वरिष्ठ पत्रकार होने का पैमाना किस राजनीतिक पार्टी या नेता से कितना ज्यादा मेलजोल है उसके आधार पर नापा जाता है । पत्रकारों को लाईसेंस कि बात सुन कर उपर बैठ कर रातदिन ईसांनो का बहिखाता पलट कर कलम घिस रहे चित्रगूप्त महाराज को भी हंसी आ रही होगी । चित्रगूप्त महाराज मन ही मन सोचते होगें कि“यह नेपाल देश के लोगों की खोप्डी हमेशा उल्टि क्यों घूमती है ?”
ईस देश के सरकार कावशचले तो यह जिने के लिएभीलाईसेंस कानियमलागू कर दे । आखिर टैक्स और महगांई ईसी लिएही बढाया जाता है किताकिहमबता सके किहमजिंदा है और उसके एवज में महंगाई कीपूजा कर रहे हैं । सांस चलने या ह्दय के धडकने कालाइसेंस अस्पताल में मरिजों के पास आक्सिजन सिलिंडर है । हमारे पास जिंदाहोने कालाइैसेंस यही है किहमअनाप, शनाप टैक्स भर कर सरकार किओर जिंदाहोने का प्रमाण पत्र या लाईसेंस प्राप्त करते हैं ।
मदकपदार्थ सेवन करने के बाद जब ट्रैफिकपुलिस पकडती है तब ड्राईविगं लाईसेंस दिखाना पडता है । अबपत्रकारिता करने के लिएभी या कुछ उल्टा, सिधा करके पक्डे जाने के बादअपनालाईसेंस दिखाना पडेगा । पर नेपाल में पत्रकार या मीडियाकर्मी को लाइसेंस किक्या जरुरत है ?वहतो बस एक फोन किसी बडे नेता या मंत्री, किसी बडे पुलिस आफिसर या सरकारी कर्मचारी को एक फोन घूमा दे तो हो गयाकामतमाम । बेचारे मंत्री, नेता या किसी सरकारी कर्मचारी को अगले दिनकि दैनिकपत्रिका के फ्रंट पेज में अपने करतुतों काकाला चिठ्ठा थोडे ही छपवाना है ।
पत्रकारों के पास एक अलिखितऔर अदृश्यलाईसेंस होताही है । वह है कुत्ते कि तरह सुंघने और समाचार को मोल तोल करने किशक्ति । नेपाल में पत्रकार कमबनियाऔर दलालज्यादा हैं । किसीब्यापारिक फर्म मे कुछ घपला हुआ या कुछ अवैध कामहुआहो तो वह सब से पहले पत्रकारों को पताचलता है । पत्रकार हीभूमिगत संगठन या अपराधियों को व्यापारियों के कालाकर्तूत काव्यौरा देते है । और अगले दिन बडे भोलेपन और ईमानदारी से उसीव्यापारी के पक्ष में समाचार भीलिखते है । उत्तर से दक्षीण मिले तो दक्षिण को खुबगाली दो और दक्षिण से दक्षीणा मिले तो उत्तर को खुबकोसो । यहीपत्रकार कालाईसेंस है । पत्रकार बनने कामतलब बिन पेंधीकालोटा होना है ।
पत्रकार होने कामतलबजिधर से मालमिले खाओ और डकार जाओ और मूंहऔर आंख में टेप लगालो । वास्तव में यह अदृश्य टेप हीपत्रकारों काअसलीलाईसेंस होता है । यदि ऐसा नहीं होतातो देश के खजाने में जाने वालाअर्बौं रुपएं का राजस्वपचाने वालानिजी क्षेत्र कि टेलिकमकंपनीएनसेल के बारे में समाचार लिखनें मे यह पत्रकार कोताहीक्यों बरतते ?किसी, किसी ने एनसेल के विरोध में समाचार लिखा पर सभी एकजुट हो कर एनसेल काविरोध क्यों नहीं कर रहे ?जाहिर सी बात है कुछेक पत्रकारों को छोड कर बांकी सभी के मूंह मे टेप लगाहुआ है ।
पत्रकारों के पास दुसरे काबखिया उधेड्ने कालाईसेंस होता है । वहजहां चाहे जिस किसीका सरे आम खटिया खडी कर सकता है । ईस देश के पत्रकारो कि योग्यता ईतनीज्यादा है कि सरकार किलाईसेंस भी ईस के आगे छोटी व कमहो जाएगी । हजार जिह्वावाले शेष नागभीजिनकी योग्यताऔर (कू) कर्म का वर्णन नहीं कर पाते उस पत्रकारों का योग्यता परीक्षा ले कर लाईसेंस देने कि बात करना सरकार काअपने पैरों में ही कूल्हाडी मारने जैसा है ।
देश के प्रमुख राजनीतिकदलकीभगिनी संगठन बन कर प्रेस यूनियन, प्रेस चौतारी, क्रान्तिकारी पत्रकार महासंघ और मधेशीपत्रकार समाजखोल कर उस मे आवद्ध पत्रकारों को हटाने या ईन भगिनी संगठनों को सरकार या राजनीतिकदलजिस दिनबंद कर देगी । उसीदिन से नेपाल के सारे पत्रकार सुधर कर अच्छे और योग्यबनजाएगें । पर सरकार यह तो नहीं करेगीं क्यों कि सरकार में सामेल राजनीतिकदलों को हीअपनाभजनकिर्तन गाने वालाचाहिए । और पत्रकार से बढिया भजन मंडली सरकार नाम कें “दानव”को कहां मिलेगी?
जिन मीडिया मेंपत्रकार काम करते हैं या उस से जुडे हुए है । वहईन पत्रकारों को उनकापारिश्रमिकतो देतीनहीं और देतीभी है तो बहुत देर से । पत्रकार के पास भी मूं, पेटऔर एक अदना सा परिवार होता है । जिसे गाय, बकरी कि तरह नहीं पालाजा सकता । तब बेचारे करेगें क्या?नगां नहाएगाक्याऔर निचोडेगाक्या? ईसी लिए नेताऔर व्यापारियों के दो नंबरी धंदे पर अपने एक नंबरी आंख गडाए रहते है । देश में अपराधऔर गलतकाम के बढने और बढाने में जितना राजनीतिकदलऔर नेता, मंत्री, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी दोषी हैं उतनाहीपत्रकार भी दोषी है । पत्रकार बस “अश्वत्थामाहतो हत” सुन कर हीवास्तविताजाने बिना समाचार लिख देते है ।
सरकार बिनामतलब के खुले अनलाइन, एफएमऔर निम्न स्तर किपत्रिकाको तो बंदनही कर सकती । पर पत्रकारों कि योग्यता परीक्षा ले कर और उनको पास करने के बादलाइसेंस दे कर अपनाकर्तव्य का ईतीश्री करनाचाहती है । पर क्यावहलाईसेंस परीक्षा में कोई गडबडी या धांधलीनर्ही होगी ईस कीक्याग्यारेटीं हैं ?जिस तरह शिक्षण और सवारी चालक के लाईसेंस में धांधली के समाचार बाहर आते है । पत्रकारों के लाईसेंस वितरण में हुई धांधलीका समाचार कौन छापेगा?क्यों कि कडाही और कलछुल दोनों पत्रकार के हीपास है । जिस देश में आठ क्लास पास आदमीपत्रिका बांटते, बांटते वरिष्ठ पत्रकार बन कर वर्षों से नेताऔर सरकार सभीको बेवकूफबना रहा है । उस देश में पत्रकारों का योग्यता परीक्षाऔर लाईसेंस कि बात करना“थोथाचनाबाजे घना” जैसी बात हो जाती है । क्यों कि देश का यह चौथे अगं को लाईसेंस किनही राजनीतिकऔर घटिया व्यापारिक छांव से मूक्तिकि जरुरत है । यह चौथा अगं नेताओं के सरपरस्ति के कारण हीखुद के वरिष्ठ होने काअहंकार पाले बैठा है । आता कु नहीं पर जताता ऐसे है किवहहीईस देश का“भाग्यविधाता” है । व्यग्ंय

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