चिनियाँ कम्पनी सम्झौता करके काम नही करते उल्टे दावा ठोकते हैं

१७ आश्विन, काठमाण्डू । नेपाल के विभिन्न क्षेत्र मे काम कर रहे चिनियाँ कम्पनी सम्झौता करके उसके अनुरुप कम नही कर रही है । आजकल नेपाल मे टेन्डर अनुसार चिनियाँ कम्पनी की  सहभागिता अधिक है । ये कम्पनीयाँ सुरु मे कम रेट प्रस्ताव करके ठेक्का प्राप्त करती है और बाद मे घाटा होने पर काम मे ढिलाई , सम्झौता से ज्यादा रकम मागने का काम, गुणस्तरहिन उपकरण प्रदान, और उसके बाद ठेक्का समझौता तक तोड्ने का काम करती आई है ।

जल विद्युत, खानेपानी आयोजना, विद्युतीय ट्रान्सर्फमर और सञ्चार उपकरण आपूर्ति करने के लिये  ठेक्का प्राप्त किये हुये आठ चिनियाँ कम्पनी का कुछ असफल उदाहरण कारोबार दैनिक मे प्रकाशित हुई है ।सम्झौता अनुसार के काम  नही करने पर भी सरकार ने इन कम्पनीयों पर अबतक कोइ कारबाइ नही कर पा रही है । चाइना रेल्वे और मेसिनरी  निर्धारीत समय तक मेलम्ची का सुरुङ नही खन्न के ठेक्का ही तोड दिया है जिससे कि यह आयोजना चार बर्ष पिछे चला गया है ।चीन का ही हुवेइ कम्पनी ने नेपाल मे ट्रान्सर्फमर उपलव्धी का ठेक्का लेकर घाटा लगने पर तामा का तार प्रयोग करने के जगह आल्मुनियम का तार प्रयोग करके ट्रान्सफरमर उपलब्ध कराया था जिसमे अनेको प्राधिकरण के कर्म्चारी फंस रहें हैं। इसके साथ ही चिनियाँ कम्पनी व्दारा पिछले समय मे सम्झौता अनुरुप काम नही करके भी नोक्सानी कहकर नेपाल पर करोडों रुपैयाँ दावा ठोका जाता है ।

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