चीन, ओली और प्रचण्ड के खेल के कारण सपना हावा में उड गया : कैलाश महतो

कैलाश महतो, परासी, ७ मई | उडायोऽऽऽ, सपना सबै हुरीलेऽऽऽ…
“हात्ती आयो हात्ती आयो, फुस्स”। यह मुहाबरा नेपाली लोकभाषा में व्याप्त है जिसका शाब्दिक अर्थ है, “बहुत सुन्दर ख्वाब का बहुत बुरी तरह से चकनाचुर होना ।” मधेशी मोर्चा के संयुक्त गठबन्धन ने जेष्ठ २२ गते के दिन नेपाली काँग्र्रेस के उक्साहट में उसके सभापति शेर बहादुर देउवा की विशेष उपस्थिति में वर्तमान के.पी ओली के सरकार विरुद्ध काँग्रेस को सहयोग कर एमाओवादी के मुखिया प्रचण्ड के नेतृत्व में नयाँ सरकार बनाने तथा उस सरकार में मधेशी मोर्चा समेत को सहभागी होने के प्रस्ताव को मोर्चा ने बडी गम्भीर चालाकीपूर्ण तरीकों से स्वीकार करने के छाँटकाँट दिखाया था ।

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आखिर दिखाए भी तो क्यूँ नहीं । क्यूँकि बडे इन्तजार के बाद किसी नेपाली मालिक ने अपने दरबार में ही उन गुलामों को बुलाकर उसके राजनीतिक दुकान के मुनिमगिरी करने के लिए निकलने बाली मन्त्रिमण्डल के भ्याकेन्सी में आवेदन देने के लिए मोर्चा बालों को तैयार होकर रहने को आश्वासन दिया था । उनके आवेदनों को स्वीकार करने तथा मन्त्री परिषद् के किसी न किसी पद पर नौकरी देने की ग्यारेण्टी भी पक्की होनी थी । क्यूँकि मोर्चा की सोर्स और पहुँच देउवा और प्रचण्ड दोनों तक बन चुकी थी । मगर चीन, ओली और प्रचण्ड के शकुनी पासा पलट खेल के कारण मधेशी मोर्चा का सारा सपना हावा में उडते नजर आ रही है । ओली के कुछ कार्यकर्ता तो मधेशी मोर्चा के मनसायों को लेकर गीत गाते भी सुने जाने लगे हैं, “उडायोऽऽऽ, सपना सबै हुरीलेऽऽऽ…।”
सरकार का नेतृत्व करने के लिए बेचारा प्रचण्ड भी पाँव से लेकर माथे तक तैयारी कर चुके थे । सबसे बडे पार्टी काँग्रेस ने भी उन्हें प्रधानमन्त्री बनाने जैसा आश्वासन दे ही दी थी । बेचारे प्रचण्ड राष्ट्रीय स्वाभिमान तथा राष्ट्रीय अखण्डता को बरकरार रखने, महँगी नियन्त्रण एवं भू–कम्प पीडितों की आवास पूनर्निर्माणों के साथ साथ संविधान में आवश्यक संसोधन कर मधेशी जनता की माँग भले ही सम्बोधन न हो, मधेशी मोर्चा के नेताओं के सरकार में जाने का रास्ता सम्बोधन करने के लिए व्याकुल होने लगे थे । वे भारत को भी अपना हितैसी मानने लगे थे, क्यूँकि कल्ह तक उनको यही लग रहा था कि भारत के सहयोग और आशिर्वाद बिना दोबारा कभी वे सत्ता के मुखिया नहीं हो सकते । मगर रातों रात उनसे लगभग सम्बन्ध विच्छेद कर चुके उनके भावनात्मक प्रेमी चीन ने याद कर दी, डाँट दिखा दी और प्यार भरी वही पूरानी बातें सुना दी तो भारत के दहलीज पर अपने से पहुँचकर उसके सिन्दुर अपने माथे पर लगाने जा रहे प्रचण्ड चट्ट से रास्ते बदल कर अपने पूराने भावुक प्रेमी के आगोस में समा गए । चीन से थोडा चमक दमक बाले चमचमाती साडी, ब्लाउज तथा मेकअपों के सामग्रियाँ पाते ही भारत को नेपाल का शत्रु कहते हुए “भारतले हामीलाई आफ्नो गुलाम बनाउन खोज्ने ?, आफ्नो साम्राज्यको हामीलाई शिकार बनाउन खोज्ने ?” जैसे उस धूर्त मगर निराश और असफल लोमडी के तरह, जिसने अपने कई कोशिशों के बादजुद पेंड पर लटके हुए अंगुरों को न पाकर उसे खट्टा कह डालता है । और यह बकबकाना शुरु कर देता है कि वे देशभतm, राष्ट्रपेमी और राष्ट्रिय अखण्डता के लिए काम कर रहे ओली सरकार के निरन्तरता के ही पक्ष में रहेंगे ।
कुछ मनोवैज्ञानिकों को माने तो इंसान के उसके नाम का असर कहीं न कहीं उसके व्यतिmत्व पर पड रहा होता है । प्रचण्ड के माता पिता ने उनका नाम बडे गर्व से पुष्पकमल रखा हाेंगे । मगर कमल के पुष्प का स्वभाव ही गन्दे किचडों में फुलने का है । लोग भले ही उस फूल को इज्जत देने के लिए कुछ भी कहें, मगर उसे शौक से लोग किचड से उठाकर भगवान पर चढाना नहीं चाहते । मजबुरी में चढा देते हैं, वह अलग बात है । क्यूँकि लोग शायद इस बात से वाकिफ होते हैं कि वह दिखने में भले ही सुन्दर क्यूँ न हो, मगर पैदाइस गन्दे नालियों के किचड में ही हुआ होता है । और प्रचण्ड पुष्प होते हुए भी कमल के पुष्प हंै जो किचड के बिना खिल नहीं सकते । वही कारण है कि जिस भारत ने उन्हें सारे दानेपानी दी, ओत और पनाह दी, सुरक्षा और प्रशिक्षण दी, नेता बनने की अवसर दी और खुले राजनीति में आने तथा शासन सत्ता में भाग लेने का अवसर प्रदान की, उसी भारत को वे दुश्मन मानते हैं ।
अगर नेपाल और नेपाली शासक इसी तरह भारत के ही खाकर भारत को ही नोक्सान पहुँचाने के रबैयों को कायम रखा तो निकट भविष्य में नेपाल के चरम उपनिवेश के शिकार रहे मधेश और भारत के सीमाओं पर नेपाल के वामपन्थियों के मिलिभगत से किसी तानाशाह शासकों की मिसाइलें तैनाथ होंगी और उन खतरनाक हथियारों का सामना भारत को करना तय है । मधेश में जातीय दंगा और साम्प्रादायिक नरसंहार भी निश्चित् प्रायः है जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव भारत पर पडना भी निश्चित है । उन संभावित खतरों को रोकने के लिए भारत को गंभीर होना चाहिए क्यूँकि उस दिन को मधेशी देखना नहीं चाहता है ।

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