चीन का नेपाल काे सहयाेग या भारत काे घेरने की काेशिश

काठमान्डू २४ जुलाइ

छोटे से देश भूटान की सीमा डोकलाम पर अतिक्रमण करने के बाद चीन धीरे-धीरे भारत के खिलाफ नेपाल में तेजी से पैर पसारने में जुटा है अाैर नेपाल भी पूरी तरह से कूटनीतिक दांव खेलने में जुटा है। भूटान-सिक्किम सीमा पर विवाद को देखने के बावजूद नेपाल की  चीन से बढती नजदीकी भारत केलिए चिन्ता का विषय है ।

नेपाल ने चीन की तरफ से बुलाई गई बेल्ट एंड रोड इनिसिएटिव (बीआरआइ- पुराना नाम वन बेल्ट-वन रोड : ओबोर) बैठक में हिस्सा लिया अाैर चीन के साथ समझौते पर हस्ताक्षर भी किया। चीन ने पिछले एक पखवाड़े में बीआरआइ में शामिल होने पर नेपाल के फायदे पर कई सम्मेलनों का आयोजन किया है। चीन की मेहरबानियाें के पीछे भारत काे  हर अाेर से घेरने की पूरी काेशिश जारी है । पिछले हफ्ते एक सम्मेलन में नेपाल के तमाम बड़े राजनेताओं को बुलाया गया था और इन सभी ने जल्द से जल्द बीआरआइ के तहत चीन से नेपाल तक सड़क व रेल मार्ग बनाने की योजना को आगे बढ़ाने की मांग की।

नेपाल ने पहली बार अपने इंटरनेट ढांचे में चीन को प्रवेश दे दी है। अभी तक यहां भारत को ही इंटरनेट सेवा देने के लिए आवश्यक ढांचा तैयार करने का काम मिलता रहा है। सूत्राें के हिसाब से 01 अगस्त, 2017 से नेपाल का सर्वर हांगकांग स्थित चीन के सर्वर से जुड़ जाएगा। इस बारे में नेपाल व चीन की सरकारी टेलीकॉम कंपनियों के बीच समझौता भी हो गया है।  नेपाल सरकार का मानना है कि यहां पहली बार सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति होगी।  नेपाल ने चीन के साथ सैन्य अभ्यास भी किया था।  चीन की सरकार के साथ पनबिजली परियोजना लगाने के लिए भी नेपाल सरकार लगातार कोशिश कर रही है। नेपाल का चीन के साथ बढते हुए रिश्ते काे देखकर भारत के कूटनीतिज्ञाें का मानना है कि चीन की यह सारी काेशिशें भारत काे घेरने के लिए की जा रही है । यह ताे तय है कि चीन अाैर भारत के तनाव का असर नेपाल अाैर भारत के  रिश्ते पर अवश्य पडेगा वैसे गृहमंत्री जनार्दन शर्मा ने कहा है कि नेपाल इस विषय पर संयम की नीति अपनाएगा ।

 

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