चीन की ऋण नीति या वर्चस्व नीति

वाशिंगटन। 

७ मार्च

 

एक शीर्ष अमेरिकी खुफिया अधिकारी ने दावा किया है कि चीन एकाधिकार स्थापित करने के साथ वैश्विक शक्ति बनने के लिए पूरे विश्व के देशों को ऋण देने की नीति पर काम कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया विभाग के निदेशक डेनियल आर कोट्स एक बैठक के दौरान अमेरिकी सीनेट आर्म्ड सर्विसेस कमेटी के सदस्यों को बताया कि अपना प्रभुत्व बढ़ाने के लिए चीन कई तरह की तकनीकों पर कार्य कर रहा है जिसमें सैन्य अड्डों पर कब्जा करना भी शामिल है।

कोट्स ने बताया ‘चीन अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है, लेकिन इसके खर्च में वृद्धि हो रही है। अधिकांश लोगों का मानना है कि चीन का उद्देश्य आक्रामक होने की बजाय प्रतिरक्षा करना है। चीन की नीति साफ दिख रही है वह दुनिया भर के देशों को उधार या ऋण देने की रणनीति पर कार्य कर रहा है, विशेषकर उन जगहों पर जो उसकी सैन्य और अन्य रणनीति के तहत मुफीद बैठते हैं। इनमें से कुछ सैन्य क्षमता से लैस हैं। दक्षिण चीन सागर – जिबूती में उनका नया बेस इसका उदाहरण है।’

कोट्स ने आगे बताया, “हमने देखा है कि चीन विश्व स्तर पर व्यापक प्रभाव के साथ एक वैश्विक शक्ति की तलाश कर रहा है और इसके लिए वह बहुत सारी तकनीकों का उपयोग कर रहा है। इनमें विशेष सैन्य स्थलों को हड़पना भी शामिल है। इससे पहले रूस भी यही करता था।’ कोट्स सीनेटर अंगुस किंग द्वारा पूछे गए उस सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें उनसे पूछा गया था, ‘आपकी रिपोर्ट के अनुसार कि चीन आखिर चाहता क्या है। ‘क्या चीन इस क्षेत्र में अपना राजनैतिक और आर्थिक प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।’

सैन्य बजट में की थी बढ़ोत्तरी

चीन की 2018 के सैन्य बजट में बढ़ोत्तरी पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा है। चीन ने सोमवार को रक्षा बजट में 8.1 फीसदी की बढ़ोत्तरी की घोषणा की थी। अपनी सैन्य शक्ति को अत्याधुनिक बनाने और अपने पड़ोसी देशों जापान और ताइवान को अपनी सैन्य शक्ति का एहसास कराना है। चीन का रक्षा बजट ना सिर्फ आकार में बड़ा है बल्कि अमेरिका के सैन्य बजट का एक चौथाई है। इसके साथ ही यह सबसे तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है।

चीनी रक्षा बजट संयुक्त राज्य अमेरिका का लगभग एक-चौथाई है, हालांकि कई विदेशी विश्लेषकों और राजनयिकों का कहना है कि चीन ने इस आंकड़े को कम कर के बताया है। चीनी अखबार ने कहा कि अगर चीन वास्तव में सैन्य विस्तार करना चाहता है, तो रक्षा बजट वास्तव में 20 से 30 प्रतिशत बढ़ाना चाहिए। अखबार ने अपने संपादकीय में कहा, “चीन स्पष्ट रूप से अमेरिका के साथ हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं होने जा रहा है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पिछले साल चीन की सशस्त्र बलों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए वादा किया था

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