चुनावी दगंल-1 : मधेशीयों को एक होने का बक्त आ गया है, कथित राष्ट्रबादियों ने अपना जात दिखादिया है

matganna

हिमालिनी डेस्क,काठमांडू, १६ मई ।

पहाड के तीन प्रदेशों मे बैसाख ३१ को चुनाव संम्पन्न हुआ है । चुनाव में कुछ मधेशी मुल के व्यक्तियों ने भी राष्ट्रिय अस्तित्वको स्वीकार करते हुये अपनी उम्मेदवारी दाखिला की थी । लेकिन उनके अस्तित्व को स्वीकारने के लिए यहाँ की मतदाता ने इनकार कर दिया है । आज उन परिणामों को हिसाव देने के बक्त आ गया हैं – मधेशीयों के शर पर ।

काठमांडू महानगरपालिका से मधेशी मुल की निरुपमा यादव ने अपनी उम्मेदवारी दर्ज कराई थी लेकिन उनके जमानत भी जफ्त होने के स्थिती यहाँ के राष्ट्रवादीयों ने कर दिया है । इन नेपालियों ने एकबार फिर साबित कर दिया है कि मधेशियों से हमारी कोई सहानुभुति नहीं है ।

क्यों की इन तीनों प्रदेशों मे चुनाव में शामिल हुयेंं उपेन्द्र यादव के नेतृतव बाली संघीय समाजवादी पार्टी को अभी तक एक भी उम्मेदवार की विजय की खबर नही आयी है । मतगणना अभी भी जारी है और मधेशीयों की नजर मधेशी पार्टी की जीत होने की खबर पर है लेकिन यहाँ से कोइ जीत की खबर नहीं आने की उम्मीद है ।

चुनावी दगंल का मतपरिणाम देखकर ये अंदाजा लगा सकतें हैं की पहाडीयो कभी भी मधेशीयों के अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर सकता । तो फिर मधेश से पहाडियों पार्टी को या इन कथित राष्ट्रबादी को क्यों अपना मत देकर अपनी ही अस्तित्व पर प्रश्नावाचक चिन्ह् लगने की काम कर रहें हैं । सार बात यह हैं कि दुसरी चरण की चुनाव में अपना हक और अधिकार के खातिर मधेशीयों के ही भोट करने के लिए हमें तयार होना होगा । आज बक्त आ गया हैं मधेशीयों को एक होने का । मधेशी जव एक हो जाएगें तो गुलामी के जंजीर से आजाद होने से कोइ भी नहीं रोक सकता ।

अभी के चुनावी दगंल की स्थिती यह है कि काठमाण्डु महानगर में साझा पार्टी के तरफ से उप–मेयर पदकी उम्मीदवार बनी वकिल साहिबा निरूपमा यादव को अभीतक ८४ मत प्राप्त हुई है । वहींपर इनके साथ ही एक ही पार्टी से बने मेयर पद का उम्मीदवार किशोर थापा हजारों मत प्राप्त कर दुसरे स्थान पर कायम हैं तो इस का निचोड यहीं है कि मधेशी होनें के कारण ही उन को एैसी परिस्थितीयों का सामना करना पड रहा हैं ।

मधेशी जनता ने अपनी सहादत देकर मधेशी जनअधिकार फोरम नेपाल का नेता बनाया । उन्होने भी मधेशी जनता के नाम पर बहुत राजनीति किया । लेकिन आज राष्ट्रिय पार्टी बनानें क्रम में पहाडी जिलाेंं मे दिया गया उम्मेदबारी और मतपरिणाम से उन्हे लाज लग रहा होगा ।

वे भी मधेशियों की पहचान पार्टी से हटाकर मधेशी जनता के इच्छा विपरीत राष्ट्रिय पार्टी बनाने के बाद और चुनाव के मतपरिणाम देखकर सोच रहें होगें कि चाहें जितना भी जोर लगालो मधेश के साथ हमेसा कथित राष्ट्रवादियों ने अपना जात दिखा ही दिया है।

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