चुनाव के लिए सोना की तस्करी

काठमांडू, २४ भाद्र । इतिहास देखें तो जब देश में चुनावी माहौल बनता है, उस समय सोना की तस्करी बढ़ जाती है । कुछ दिन पहले पुलिस ने जो ८८ केजी सोना गिरफ्तार किया, उसके पीछे भी चुनाव ही हो सकता है, इस तरह का अनुमान किया जा रहा है । अगर ऐसा है तो उसमें राजनीतिक पार्टी तथा नेताओं का ही हाथ है, इसमे कोई भी शंका नहीं है । आज प्रकाशित नागरिक दैनिक में सोना की तस्करी संबंधी इतिहास, चुनाव और राजनीतिक दलों का कनेक्सन सम्बन्धी समाचार प्रकाशित किया गया है ।


जब सरकार ने स्थानीय तह के लिए चुनाव की तिथि घोषणा की, तब काठमांडू में सोना गिरफ्तार की घटना बढ़ने लगा । पौष ७ गते थानकोट से ७ केजी, पौष २१ गते त्रिभूवन विमानस्थल से ३३ केजी, माघ १ गते चमती से १५ केजी, फागुन ८ गते विमानस्थल से १.५ केजी, चैत ७ गते रसुवा से ७ केजी, भाद्र १५ गते काठमांडू से १५ और भाद्र १९ गते ८८ केजी सोना की गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक नेताओं का ही हाथ है, ऐसा अनुमान किया जा रहा है । इतिहास देखे तो इससे पहिले भी चुनाव के समय में सोना की तस्करी ज्यादा होती थी । और उसमें देश के गृहमन्त्री तथा प्रधानमन्त्री तक का नाम जोड़ कर समाचार सार्वजनिक होता था । इस बार भी कहीं ऐसा ही तो नहीं हो रहा है ! यह आशंका किया जा रहा है । लेकिन जितना भी सोना बरामद हो, सिर्फ १० प्रतिशत ही पुलिस के हाथ लग जाती है । यह बात पुलिस अधिकारी भी स्वीकार करते हैं । पुलिस का कहना है कि तस्करी कर नेपाल में लायी गई ९० प्रतिशत सोना तो पुलिस के पक्कड़ से बाहर ही होती है ।

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