चुनाव ही प्रजातन्त्र नहीं है, राष्ट्रीय एकता और समृद्धि भी जारुरीः पूर्वराजा शाह

काठमांडू, १८ फरवरी । पूर्वराजा ज्ञानेन्द्र शाह ने कहा है कि सीमित व्यक्तियों की इच्छापुर्ति होना ही प्रजातन्त्र नहीं है । फल्गुन ७ गते अर्थात् प्रजातन्त्र दिवस के अवसर पर एक विज्ञप्ति प्रकाशित करते हुए पूर्व राजा शाह ने कहा है– ‘सिमित व्यक्तियों कि स्वार्थ रक्षा होना ही प्रजातन्त्र है, क्या यही जनता को आत्मसाथ करना चाहिए या नहीं ? कानुनी राज एवं सुशासन की प्रत्याभूति न होनी की अवस्था जनता कब तक स्वीकारती रहेगी ?’
पूर्व राज शाह द्वारा जारी विज्ञप्ति में वर्तमान राजनीतिक अवस्था के प्रति तीव्र असन्तुष्टि दिखाई देता है । उन्होंने कहा है कि सिर्फ चुनाव कराना ही प्रजातन्त्र नहीं है । पूर्व राजा शाह का कहना है कि प्रजातन्त्र देश की राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रीय एकता समृद्ध बनाने की साधन होना चाहिए । उन्होंने कहा है– ‘वि.सं. २०६३ वैशाख ११ के बाद हुई राजनीतिक परिवर्तन की समीक्षा होना चाहिए, अब वह वक्त आ चुका है ।’
वर्तमान राजनीतिक गतिविधि और क्रियाकलाप के प्रति असन्तुष्टि जाताते हुए पूर्व राजा शाह द्वारा जारी विज्ञप्ति का पूर्ण पाठ इस प्रकार है–

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