चेतना की कमी से में महिला की जान जाती है

Health -1 Health program 2 11नेपालगन्ज , (बाँके) पवन जायसवाल, फाल्गुन ९ गते ।
बाँके जिला के नेपालगन्ज में एक दिवसीय मातृ स्वास्थ्य तथा पाठेघर गिरने की  समस्या विषय पर जिला स्तरीय गोष्ठी सम्पन्न हुई  है ।
नेपाली महिलाए ने झेलती आ रही समस्या अथाहा और असीमित है, लेकिन चेतना की कमियों से अपने स्वास्थ्य प्रति भी देखभाल नकर पाने से तथा अज्ञानता और चेतना के कमी से अकाल में जान जाती है । महिला की संख्या हरेक वर्ष बढ्ते जा रही है नेपालगन्ज में सम्पन्न एक दिवसीय मातृ स्वास्थ्य तथा पाठेघर गिरने की समस्या विषयक जिला स्तरीय गोष्ठी में दिया गया है ।
गोष्ठी की शुभारम्भ करते हुयें प्रमुख अतिथि जिला जन स्वास्थ्य कार्यालय बाँके के प्रमुख वरिष्ठ जनस्वास्थ्य प्रशासक जीवन कुमार मल्ल ने नेपाली महिलाए को झेलना पर रहा समस्या अथाहा है, और चेतना की कमियों से अपना स्वास्थ्य प्रति भी देखभाल नही हो रही है और अकाल में जान जाती है ।Health program 10
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्रोत केन्द्र के सहयोग में स्वास्थ्य अधिकार तथा सुर्तीजन्य वस्तु नियन्त्रण जिला सञ्जाल बाके द्वारा आयोजित गोष्ठी में जिला जनस्वास्थ्य कार्यालय बाके के प्रमुख मल्ल ने बाके जैसे  अनमी सहित ३१ सुरक्षित प्रसुती केन्द्र (वर्थिङ सेन्टर) और सुविधा सम्पन्न ४ बडे सरकारी और प्राइभेट अस्पतालों की सुविधा रही सुगम जिला में भी समय में अस्पताल न पहुचने के कारण से इस आर्थिक वर्ष को ५ महीने में १८ गर्भवती महिला की मृत्यु होई है यह अत्यन्त दुःखद पक्ष हुआ है बताया ।
उसी गोष्ठी के पहले सत्र में सञ्जाल के स्रोत व्यक्ति श्रीमती लता शर्मा ने कार्यपत्र प्रस्तुत करते हुयें कहा देश में निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा तथा मातृ स्वास्थ्य सेवा लागु हुआ ज्यादा दिन हो चुकी है तो भी महिलाए की स्वास्थ्य में अपेक्षाकृत सुधार नही हो रही है चर्चा करते हुयें राज्य ने प्रदान करती रही स्वास्थ्य सेवा प्रभावकारी नहोना, परिवार भित्तर महिलाए“ को मिलने वाला अधिकार और स्वास्थ्य सुविधा नमिलना, लैङ्गिक विभेद करनाु, अस्पताल या सुरक्षित प्रसुती केन्द में बच्चा का जन्म कराना जैसा घर में तालिम न पाए हुयें सुडेनी यों से बच्चा पैदा कराना और विभेदकारी समाज इस के कुछ कारणें भी है बतायी ।
स्रोत व्यक्ति श्रीमती शर्मा ने इस के अलावा, आज लाखों महिलाए“ की पाठेघर गिरने की समस्याए“ से पीडित रही है कहते हुयें अभी जल्द ही अध्ययन के अनुसार अछाम जिला और डोटी जिला में प्रत्येक ४ महिलाए“ में १ इस रोग से पीडित रही है और इस के प्रमुख कारण सिर्फ जनचेतना की कमी, स्वास्थ्य सेवा की प्रभावकारिता नहोना तथा महिलाए“ के उपर अत्यधिक कामों का बोझों से भी ऐसी समस्याए“   झेलना पडता है बतायाी ।
स्रोत व्यक्ति श्रीमती लता शर्मा ने २० वर्ष से ३५ वर्ष तक उमेर की महिलाए“ बच्चा जन्माने की योग्य होती है तो भी  बा“के जिला में १८ वर्ष से २० वर्ष उमेर की महिलाए“ २१ प्रतिशत रही है कार्यपत्र में उल्लेख किया था । कार्यपत्र में पाठेघर गिरने जैसे समस्याए“ से नेपाल में सब से अधिक १५ वर्ष से २० वर्ष की महिलाए“ प्रभावित रही है कार्यपत्र में उल्लेख किया ।
दुसरे कार्यपत्र प्रस्तोता जिला जन स्वास्थ्य कार्यालय बा“के के फोकल पर्सन श्रीमती शोभा अधिकारी ने सुुरक्षित मातृत्व, सुुरक्षित मातृत्व के आवश्यकता और पाठेघर गिरने जैसे समस्या के बारे में चर्चा किया था । कार्यपत्र में सुुरक्षित मातृत्व के मतलब महिलाए“ ने इच्छा के अनुसार गर्भवती होना या नहोना, गर्भवती अवस्था में स्वस्थ रहना सुरक्षित रुप में प्रसुति होना बच्चा जन्मने के बाद सौरी अवस्था में स्वस्थ रहना तथा स्वस्थ शिशु का जन्म देना और नवजात शिशुको स्वस्थ रहने  के  लियें स्तरयुक्त सेवायें उपलब्ध होने अवस्था को सृजना करना पडता है बतायी ।
उस गोष्ठी में जिला के महिला अधिकारकर्मी, स्वास्थ्य स्वयम्सेविका, शिक्षक, सामाजिक सहजकर्ता, विभिन्न गैरसरकारी संघसंस्थाए“ के प्रतिनिधियों लगायत नगर क्षेत्र और ग्रामीण ईलाके कै करीब ४ दर्जन से महिलाए“ की सहभागिता

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