चौदहवाँ राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन राजविराज में सम्पन्न

???????????????????????????????चैत्र २१ गते राजविराज में नेपाल हिन्दी प्रतिष्ठान के द्वारा चौदहवाँ राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन आयाजित किया गया । यह कार्यक्रम दो दिनों तक चला । संविधान में हिन्दी भाषा को मान्यता प्राप्त हो अन्य भाषाओं की ही भाँति सम्मान प्राप्त हो यही इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था । कार्यक्रम की अध्यक्षता नेपाल हिन्दी प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री राजेश्वर नेपाली जी ने किया । सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में प्रजातंत्र सेनानी बलराम पाठक ने कहा कि नेपाल का इतिहास रहा है कि यहाँ कोई भी माँग बिना आन्दोलन के नहीं मानी गई है । इसलिए हिन्दी भाषा को यहाँ मान्यता दिलाने के लिए भी आन्दोलन की आवश्यकता है और इसके लिए युवा वर्ग को आगे आने होगा । उन्होंने कहा कि भाषा को लेकर विवाद की आवश्यकता नहीं है बल्कि प्रत्येक भाषा को सम्मान और संरक्षण प्राप्त होना चाहिए । कार्यक्रम में साहित्यकार डा. मिथिलेश कुमारी की गरिमामयी उपस्थिति थी । उन्होंने कहा कि यहाँ हिन्दी की आवश्यकता है और अगर सरकार नहीं सुनती है तो उसे सुनाने की आवश्यकता है । साहित्य और साहित्यकार खुद को जलाकर रोशनी देता है और समाज को प्रकाशमय बनाता है । समारोह में भारत से आए एम.गोविन्द राजन जी की भी उपस्थिति थी । उन्होंने माना कि नेपाल और भारत का समबन्ध सदियों पुराना है और विश्वास है कि भाषा के नाम पर इन दोनों देशों के रिश्तों में कभी भी दरार नहीं आएगी । इसी तरह कार्यक्रम में उपस्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग की अध्यक्ष डा. श्वेता दीप्ति ने अपने मंतव्य को रखते हुए कहा कि हिन्दी को उचित स्थान दिलाने का यही सही समय है और इसके लिए युवावर्ग खास कर मधेशी युवावर्ग से आगे आने की अपेक्षा है । उन्होंने कहा कि मधेश के हर घर में मित्र राष्ट्र भारत की बेटी बहु बन कर आती है और यहाँ की बेटी बहु बन कर जाती है ऐसे में उनकी भाषा का सम्मान हमें करना DSC02076चाहिए और उनकी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए उनकी भाषा को यहाँ मान्यता दिलानी ही होगी क्योंकि शिक्षा पर सबका समान अधिकार है । कार्यक्रम में सन्त साहित्यकार हरिवंश दास, डा. गंगाप्रसाद आचार्य, सम्मेलन के मूल आयोजक समिति के संयोजक खुशीलाल मंडल, हिम्मत सिंह, डा. आशा सिन्हा जैसे बुद्धिजीवियों की उपस्थिति थी । कार्यक्रम में नेपाल में हिन्दी को सम्मान, उसके विकास, विस्तार एवं समर्थन में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए डा. श्वेता दीप्ति, डा. मिथिलेश कुमारी, डा. एम. राजन, करुणा झा, पूनम झा आदि को सम्मानित किया गया । राजर्षि पुरस्कार से स्व. बुन्नीलाल जी को सम्मानित किया गया । कार्यक्रम में स्वागत मंतव्य श्री अवधकिशोर सिंह जी के द्वारा दिया गया ।
कार्यक्रम के दूसरे दिन डा. श्वेता दीप्ति ने गणतंत्र नेपाल में हिन्दी विषय पर अपना कार्यपत्र पढ़ा जिसपर टिप्पणी श्री अवधकिशोर जी ने किया । तत्पश्चात् बृहत कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई जिसमें नवोदित कवियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया । कार्यक्रम के अन्त में अध्यक्ष राजेश्वर नेपाली ने कहा कि चरित्र निर्माण तथा स्वस्थ राष्ट्र विकास के लिए राष्ट्रीय विभूतियों अमर शहीदों एवं वरिष्ठ साहित्यकारों के जन्म जयन्ती, बलिदान दिवस एवं पूण्य तिथि मनाने के क्रम में सम्पूर्ण नेपाल को जोड़ने वाली हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति संरक्षण के लिए २०५२ साल में राष्ट्रीय प्रजातंत्र के अवसर पर प्रथम नेपाल राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन आयोजित किया गया जो आज तक अनवरत रूप से चलता आ रहा है । आगे भी सबके सहयोग की अपेक्षा करता हुआ यह आयोजित होता रहेगा यह आशा है । उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हरेक shweta d at hindi smmelan Rajbirajभाषा, धर्म और संस्कृति का समान संरक्षण और विकास होता है । किन्तु हमारे देश में आज भी लोकतंत्र या गणतंत्र का अर्थ किसी एक भाषाभाषी या जाति में सीमित करने का खेल जारी है और इससे लोकतंत्र कभी भी सुदृढ़ और सबल नहीं हो सकता है । अतः आज सबसे बड़ी जरुरत है लोकसांस्कृतिक संस्कृति के विकास का क्योंकि जबतक हम एक दूसरे का सम्मान नहीं करेंगे तो स्वस्थ राष्ट्र का विकास नहीं हो पाएगा । अतएव वीर शहीदों के बलिदान से प्राप्त संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र के संविधान में देश की बहुसंख्यक जनता के बीच सम्पर्क भाषा के रूप में बोली पढ़ी और लिखी जाने वाली हिन्दी के प्रति घृणा और द्वेष त्यागकर हम सभी समानता की भावना से नेपाली की ही तरह हिन्दी को भी दूसरी सरकारी कामकाज की भाषा बनाकर प्रान्तीय स्तर पर क्षेत्रीय भाषाओं में भी कामकाज करने के लिए अग्रसर हों । इसी उद्घोष और धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का अन्त हुआ ।

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