जनकपुर एक बार फिर खून से सराबोर हुआ : श्वेता दीप्ती

श्वेता दीप्ती, 16 दिसम्बर ।

जनकपुर पौष ०१ गते ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को अपने में समाहित जनकपुर आज एक बार फिर खून से सराबोर हुआ । विवाह पंचमी के अवसर पर उत्साह का सुखद पल मातम में तब्दील हो गया है मंदिर परिसर से अधिक भीड़ अस्पताल के प्रांगण में है । महीनों बाद जनता अपनी तकलीफ को भूलकर उत्साहित थी । किन्तु सत्ता को यह भी रास नहीं आया । शक्ति का व्यर्थ प्रदर्शन किया गया और गोलियों तथा लाठी चार्ज कर के पूजा अर्चना की व्यवस्था की गई । परम्परा का निर्वाह करते हुए देश की राष्ट्रप्रमुख जनकपुर में विशेष पूजा के लिए गईं ।

1a-1पर वो परम्परा किस काम की जो निर्दोष और निरीह जनता का लहू बहाए । परम्परा याद है पर वही जनता आज महीनों से आन्दोलित है उसका क्या ? राष्ट्रपति बनने के बाद भी राष्ट्रप्रमुख नहीं जान रही हैं कि मधेश की जनता क्या चाह रही है । एक बार भी ना तो कोई जिम्मेदार वक्तव्य उनकी ओर से आया और न ही घाव पर मरहम लगाने का काम उन्होंने किया । यह वह पद है जो निरपेक्ष होता है परन्तु फिलहाल ऐसी कोई सम्भावना दिखाई नहीं दे रही कि इस बात पर यकीन किया जाय ।  राज्य ने तो पहले ही जता दिया है कि  मधेश की जनता का खून तो कोई महत्व का ही नहीं है । जब प्रधानमंत्री की नजरों में ही वहाँ की जनता आम या मक्खी नजर आती है तो आज जो हुआ यह कुछ नया नहीं था । किन्तु उन दर्शनार्थियों का क्या जो बाहर से आए हुए थे ? दिन ब दिन यह सोच पुख्ता होती जा रही है कि जो क्षेत्र वर्षों से शोषित था आज भी उनकी स्थिति पूर्ववत है । जो क्षेत्र आज महीनों से आन्दोलित है जहाँ असंतोष की भावना जन जन में उग्रता से व्याप्त है उन्हें राज्य ने ही उकसाने का काम किया है । भूख, गरीबी, मँहगाई इन सारी बातों पर कोई नजर नहीं किन्तु खून बहाकर परम्परा का निर्वाह तो करना ही चाहिए ।

 

क्या राष्ट्रप्रमुख यह आत्मविश्लेषण करेंगी कि उनकी यह विशेष पूजा का कितना फल उन्हें मिलने वाला है ? अगर मानवता पर आस्था होगी तो जरुर करेंगी महज दिखावा होगा तो यह उम्मीद बेकार है ।

 

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