जनकपुर का वह काला दिन संजय ! खुद को निर्दोष प्रमाणित करो…

विनय कुमार:ये उस वक्त की बात है, जब देश में र्राई-लिम्बू ने लिम्बुवान/खुम्बुवान, थारू ने थरुहट, नेवार ने नेवा और मैथिल ने मिथिला राज्य के लिए संर्घष्ा किया था । देश भर कई राजनीतिक दलों ने भी आमहडÞताल की घोषणा की थी । सडÞक के कोने-कोने में सवारी साधनों की लाइन लगी रहती थी । छोटा-मोटा बम विष्फोट जैसी घटना तो साधारण बात थी । ये बात सभी के दिलो-दिमाग में अभी भी ताजा है । इसी तरह मिथिला राज्य भी होना चाहिये ऐसी आवाज जनकपुर में भी गूंज रही थी । उस के बाद शुरु हुआ मिथिला राज्य के लिए आन्दोलन । लेकिन याद रखने बाली बात यह है कि मिथिला राज्य के लिए हुये आन्दोलन मे सभी दलों का र्समर्थन नहीं था । janakpur bamkand
janakpur२०६९ वैशाख १८ सोमबार सबेरे १० बजे । रामानन्द चौक में स्थित एशिया के सबसे बडेÞ प्रवेशद्वार के नीचे मिथिला राज्य के लिए एक समूह धर्ना दे रहा था । वहीं पर बैठे जनकपुर के चर्चित व्यापारी जीवनाथ चौधरी के सेल फोन में घण्टी बजी । बात करते हुये वे बाजु वाली पान दूकान की ओर चले गये । उनके साथ मिथिला नाटक परिषद के अध्यक्ष सुनील मल्लिक भी थे । दो/तीन मिनेट के बाद ही बम विष्फोट का धमाका हुआ ।
चार लोगों ने घटनास्थल पर तथा एक ने उपचार के क्रम में शहादत प्राप्त की । उस वक्त ऐसा लगा जैसे कोई महाभूकम्प हुआ हो । इस कायरतापर्ूण्ा बम विष्फोट में ३२ लोग जख्मी हुए थे । अब, बमकाण्ड में दोषी संजय है या जीवनाथ, इस मुद्दे पर पुलिस की तहकीकात शुरु हर्ुइ । तत्काल ही पुलिस नें चार अपराधियों को र्सार्वजनिक भी किया । लेकिन प्रमुख योजनाकार को र्सार्वजनिक नहीं किया गया । संजय और जीवनाथ ये दोनो नाम चाय दुकान और घरघर में चर्चित हो गए । कुछ समय के बाद फिर से आडियो टेप प्रकरण ने तहलका मचाया । पुलिस-प्रशासन दोषी के करीब पंहुच गया है ऐसा सभी को लगा । फिर धीरे-धीरे बात ठण्डे बस्ते में चली गई ।
दो सालों में समय और परिस्थिति में बदलाव आया, सरकार भी बदली । आखिर पुलिस ने प्रमुख दोषी का पता लगा ही लिया । उसके अनुसार बमकाण्ड के प्रमुख योजनाकार संजय साह थे । जो २०७० संविधानसभा के निर्वाचन में धनुषा क्षेत्र न.ं ४ से प्रत्यक्ष में विजयी सभासद् हैं । फिलहाल वे सद्भावना पार्टर्ीीे उपाध्यक्ष भी हैं । मोस्ट वान्टेड मुकेश चौधरी भी गिरफ्तार हो चुके हैं । और मुकेश के बयान में एक चौकांने बाली बात र्सार्वजनिक हर्ुइ, आपराधिक गतिविधियाँ सञ्चालन करने बाली भूमिगत पार्टर्ीीशस्त्र हतियारधारी समूह) के प्रमुख सल्लाहकार संजय ही हंै । कहा जाता है-”पाप छुपता नहीं, वो सर पर चढÞकर बोलता है । ”
यहाँ प्रश्न यह उठता है कि अगर संजय सच में अपराधी नहीं हंै तो वे अपनी गिरफ्तारी क्यो नहीं देते – पुलिस को ‘मै हत्यारा नहीं हूँ’, ‘मंैने किसी का खून नहीं कराया है’ यह बात क्यो नहीं खुलकर कहते हैं – संजय के शुभचिन्तकों में ऐसा प्रश्न उठना स्वाभाविक ही लगता है ।
अन्त में, समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से ‘कोई भी घटना घटने की पीछे एक निश्चित कारण होता है और उस में अनेकों दिमाग की संलग्नता हो सकती है । ‘ समाज मंे सकारात्मक और नकारात्मक दोनो विचारधारा सक्रिय रहती है । इन दोनों शक्तियों से ही समाज सञ्चालित होते रहते हैं । बमकाण्ड नकारात्मक सोच का ही दुष्परिणाम था ।
जनकपुर में संजय और जीवनाथ का क्रेज
पुलिस द्वारा जनकपुर बमकाण्ड के प्रमुख योजनाकार संजय होने का खुलासा होने पर तहलका मचना स्वाभाविक ही था । लेकिन जीवनाथ समूह का डिस्को डान्स में झूमना भी कोई नई बात नहीं थी । क्योंकी संजय और जीवनाथ समूह एक दूसरे के खतरनाक प्रतिस्पर्धी थे । खैर जीवनाथ ने सरकार के समक्ष अपनी सुरक्षा के लिये अपील की । जिससे प्रमाणित होता है की संजय समूह का खौफ उसको खाए जा रहा था । ‘संजय और जीवनाथ दोनों समूह के कारण ही जनकपुर आजतक भी आतंङ्कति बना हुआ है, दोनों के जेल जाने पर ही जनकपुर का कल्याण होगा’- नाम नहीं बताने की शर्त में एक आम आदमी ने बताया ।
‘दिल्ली में संजय एमाले नेता ओली से मिले’ ये बात काफी चर्चा में रही । रोचक बात यह है कि संजय ने रघुवीर महासेठ को दूसरे संविधानसभा के चुनाव में बहुत सहयोग किया था, जातीय हिसाब से । महासेठ एमाले पार्टर्ीीें ओली प्यानेल के नेता जाने जाते हैं । सहयोग के बदले सहयोग करना किसी का भी नैतिक कर्तव्य बनता है । गृहमन्त्री बामदेव गौतम और ओली में अभी चोली दामन का साथ है । सरकार से सहयोग पाने के लिये दिल्ली में ओली से महासेठ ने भेट कराइ होगी यह अनुमान सत्य भी हो सकता है । संजय जहां भी हों, सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू से वे चर्चा में बने रहते हैं । फिलहाल जीवनाथ का दबदबा स्थानीय स्तर में देखने में मिलता है लेकिन संजय का नाम भी लोग भूल नहीं पाते ।

मिडिया अदालत नहीं
– सद्भावना के महासचिव सुमन
जनकपुर बमकाण्ड के प्रमुख योजनाकार कह कर पुलिस ने संजय को र्सार्वजनिक किया है । पुलिस ने एरेस्ट वारेन्ट जारी करने के बाद तुरन्त ही सद्भावना पार्टर्ीीरा प्रधानमन्त्री समक्ष ज्ञापनपत्र पेश किया गया था । पार्टर्ीीे पुलिसिया कारवाही पर कडÞा विरोध जताया है । उच्चस्तरीय न्यायिक जाँचबुझ समिति गठन कर के दोषी प्रमाणित करने की मांग पार्टर्ीीे की है । सद्भावना संजय साह के बारे में क्या कह रही है । इस सर्न्दर्भ में पार्टर्ीीे महासचिव मनीष सुमन से हुइ बातचीत के अंशः-
० जनकपुर बम काण्ड के प्रमुख योजनाकार माने जाने वाले संजय साह सच में निर्दोष हंै तो भागे क्यों –
–    वे निर्दोष अथवा दोषी हंै यह पार्टर्ीीा कहना नहीं है । सद्भावना पार्टर्ीीा कहना यह है कि केवल एक अपराधी व्यक्ति के बयान के आधार पर किसीको दोषी मानना उचित नहीं होगा । मुकेश चौधरी दर्जनो अपराध, अपहरण, हत्या, डकैती जैसी घटना में संलग्न हंै । उन्ही के बयान पर समाज के जनप्रतिनिधि संजय साह को आरोपित माना गया है । हमारा मानना है कि निर्दोष पर कारबाही नहीं हो पर दोषी बच के भी नहीं निकले । इस आधार पर जाँच के लिये उच्च स्तरीय समिति बननी चाहिये । साह दोषी हैं या नहीं, यह हम नहीं कह सकते ।
० साह सद्भावना के उपाध्यक्ष भी हैं, इस घटना से पार्टर्ीीे चरित्र पर धब्बा लगा या नहीं –
–    इस घटना से पहले वे सद्भावना पार्टर्ीीे साधारण सदस्य भी नहीं थे । इसलिये इस घटना से पार्टर्ीीी इज्जत का कोई सम्बन्ध नहीं है । साह हमारी पार्टर्ीीे नेता होने के बाद किसी भी आपराीधक घटना में उनका नाम संलग्न नहीं है । उन के पार्टर्ीी्रवेश से पहले यह घटना हो चुकी थी । पार्टर्ीीे उनको इस बारे में किसी भी प्रकार का दण्ड नहीं दिया है । इसलिए पार्टर्ीीी इज्जत चली गई ऐसा कहना उचित नहीं ।
० पुलिस संजय साह को अपराधी मान चुकी है । मिडिया ने भी प्रमुख योजनाकार कहकर ही आरोप लगाया है । इस के बाबजूद सद्भावना उन्हे कैसे निर्दोष मान रही है –
-पुलिस ने उन को अपराधी नहीं माना है । पुलिस ने केवल अभियुक्त बताया है । अपराधी और अभियुक्त में अन्तर होता है । मिडिया कोई अदालत नहीं है । हम कानून को मानते हैं । और कानून के अधीन में रहकर काम भी करते हैं । मिडिया में लिखने से कुछ नहीं होगा । मिडिया किसी को अपराधी और किसी को अभियुक्त नहीं बना सकती । अगर उच्चस्तरीय न्यायिक जांच समिति उन को अपराधी मानती है तो किसी भी अपराधी को कडÞी से कडÞी सजा मिलनी चाहिये । यही सद्भावना पार्टर्ीीी मान्यता है ।
० क्या सद्भावना पार्टर्ीींजय की गिरफ्तारी के लिये सरकार को चुनौती दे सकती है –
–    चुनौती देने की बात ही नहीं है । अगर संजय सचमुच अपराधी हैं तो उन्हे गिरफ्तार करना चाहिये । मैं यह बात पहले भी कह चुका हूं कि संजय साह अभियुक्त हैं अपराधी नहीं । अगर उन्होने अपराध किया है तो उन पर भी कारबाही होनी चाहिये । हमारी मांग है कि उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन हो किसी अपराधी के कहने से कोई अपराधी साबित नहीं हो सकता ।

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