जनकपुर का सौंदर्यीकरण

कैलास दास:जनकपुर में एक नयी लहर आई है, गन्दगी सफाई का अभियान और अतिक्रमित जमीन खाली करवाने का अभियान । तभी सुन्दर स्वच्छ और आधुनिक जनकपुर का निर्माण होगा । इस अभियान में छोटी-बडÞी सभी इमारतें टूटंेगी और टूट भी रही हैं । हजारो लोग खुश हंै तो सैकडÞों मायूस भी । जब से अतिक्रमित जमीन में बनीं इमारतों को तोडÞने का अभियान चला है, लोग आर्श्चर्य और खुशी दोनों व्यक्त कर रहे है । जहाँ, सैकडों लोग घर विहीन होंगे तो हजारों के मन मे विश्वास भी जगा है कि जनकपुर परिवर्तन कीे राह पर है । अब वह जनकपुर बनेगा जो त्रेत्रा युग में राजा जनक की राजधानी थी, जहाँ पर देवगण भी आने के लिए लालायित होते थे ।Janakpur For Janakpur Report
यह सच है, जहाँ पर विकास की उम्मीदें होती हंै वहाँ पर विनाश कोई मायने नहीं रखता है । हर कोई चाहता है कि हमारा घर, शहर, व्यवसाय, शिक्षा-दीक्षा, रहन-सहन, खान-पान आदि इत्यादि अच्छा हो । इसी उम्मीद के साथ कुछ लोग इस अभियान का विरोध कर रहे हैं तो कुछ र्समर्थन भी । ऐसी स्थिति में जरूरी होता हैर्-र् इमानदारी पर्ूवक कानून के अनुसार आगे बढÞने की । अगर हानि कुछ व्यक्ति को होगी तो लाभ पूरे शहर को । तब सवाल खडÞा होता है इमारतंे तोडÞने से आधुनिक जनकपुर की परिकल्पना सम्भव है या नहीं –
जब एमाओवादी की सरकार बनी थी तो तत्कालीन प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भटट्र्राई ने काठमाण्डू में सडÞक चौडÞी करने का अभियान चलाया । इस अभियान में भी बडÞी-बडÞी इमारतंे तोडÞी गईं । जबकि अभी तक इसका जिस प्रकार से व्यवस्थापन होना चाहिए, वो बांकी है । इसे भी नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता है ।
जनकपुर विकास के क्षेत्र में वर्षों से उपेक्षित है । फिलहाल जो विकास अभियान चला है उसमे सैकडों इमारते टूटने के बाद कुछ लोग दुःखी तो हंै पर उससे ज्यादा गौरवान्वित भी हैं कि आधुनिक जनकपुर का निर्माण होने जा रहा है । लोग अपने-आप गलत निर्माण को तोडÞफोडÞ कर हटा रहे हैं । लगन और चाहत हो तो कुछ भी असम्भव नहीं है । लेकिन उसके लिए गुरु योजना आवश्यक है । यह तो अच्छी बात है कि वृहत्तर जनकपुर क्षेत्र विकास परिषद् के अध्यक्ष रामकुमार शर्मा, जनकपुर नगरपालिका के प्रमुख विष्णु कुवँर कोइराला, गुठी संस्थान के प्रमुख राजाबाबु पाण्डे ने राजनीतिक दल, पत्रकार, नागरिक समाज, युवा और कानूनविद को एक साथ लेकर आधुनिक जनकपुर की परिकल्पना की है । और उसी परिकल्पना में सबसे पहले जो धार्मिक आस्था का प्रतीक है, यहाँ के तालाब, मठ मन्दिर जिन्हें कुछ लोगों ने अतिक्रमित कर रखा है उन्हें हटाने और व्यवस्थित करने में लगे हैं ।
यह सही है कि जनकपुर की पहचान ‘बावन कुट्टी बहत्तर कुण्ड’ से है, अर्थात ५२ मठ मन्दिर है तो ७२ तालाब है । जिन्हें लोगों ने अतिक्रमण कर कहीं पर ध्वस्त कर दिया है तो कहीं पर नाम के लिए मात्र दिखता है । आधुनिक लोगों को तो पता भी नहीं है कहाँ पर कौन तालाव है, उसका क्या नाम है, कितना वर्गफीट का है और धार्मिक सम्बन्ध क्या है । इसकी पूरी जानकारी गुठी संस्थान में या जानकी मन्दिर के नाप नक्शे में हो सकती है । तो सबसे पहले एक होर्डिङ्ग बोर्ड की आवश्यकता ह,ै जिस पर तालाब सम्बन्धी पूरी जानकारी होनी चाहिए । उसका नाम, वर्ग फीट लम्बाई, चौडर्Þाई और साथ ही तालाव की ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का वर्ण्र्ााउल्लेख करना चाहिए ।
यह तो सभी को मालूम है कि धार्मिक तालाब और मठ मन्दिर को लेकर जनकपुर धार्मिक नगरी बनी है । लेकिन ७२ कुण्ड और ५२ मन्दिर के बारे में ऐतिहासिक किताब जो होनी चाहिए यह न तो पर्यटक के हाथ में दिखती है और न ही शायद स्थानीयवासी को मालूम होगा कि किसका कितना महत्व है । यह जनकपुर के प्रचार में सबसे बडÞी कमी मानी जाएगी । भारत या अन्य किसी देश के पर्यटक स्थल पर जाइए तो सबसे पहले वहाँ के बारे में जानने के लिए बहुत सारी किताबें, सीडी मिल जाएंगी । इतना ही नहीं आधुनिक परिवेश में आप इन्टरनेट के जरिए भी घर में बैठे उसकी जानकारी ले सकते हैं । किन्तु जनकपुर में जानकी मन्दिर है जिसका इतिहास विश्व प्रसिद्ध है, वहाँ पर्यटक आते हंै और सिर्फदर्शन करके चले जाते हैं । धार्मिक स्थल होने के नाते यह सब अति आवश्यक है ।
आधुनिक जनकपुर की परिकल्पना, अतिक्रमित जमीन हटाने से केवल सम्भव नहीं है । लेकिन अतिक्रमित जमीन खाली करवाना भी आवश्यक है । वैसे जनकपुर का गोरधोई, दशरथ तालाव, तेलहा, मडहा अरगज्जा सहित आठ पोखरी की अतिक्रमित जमीन खाली हर्ुइ है और कई जगह पर यह अभियान चालू है । लेकिन आनेवाले कल में क्या क्या योजना है, कितना बजट है । नेपाल सरकार ने इसके लिए कितना बजट दिया है, आवश्यकता अनुसार नहीं है तो आगामी कार्यक्रम क्या-क्या होने चाहिए – इन सारी बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है । हमे दातृराष्ट्र अनुदान देगा तो हम विकास करेंगे इस पर मात्र निर्भर रहे तो इतनी जल्दी आधुनिक जनकपुर की परिकल्पना सम्भव नहीं है । आधुनिकीकरण के लिए यहाँ अवस्थित पोखरी, मठ मन्दिर का संरक्षण मात्र काफी नहीं है । इसके लिए यहाँ का व्यवसायीकरण, जनकपुर से जुडÞने वाली सडÞकें, विमान स्थल, म्युजियम, स्वागत द्वार, पर्यटक को लुभाने के लिए दार्शनिक महत्व का धार्मिक स्थल, साँस्कृतिकता उजागर करने के लिए नाट्यशाला, पार्किङ्ग और सुरक्षा भी आवश्यक है ।
मिथिला का भोजन, पोशाक और मिथिला कला भी प्रसिद्ध है । लेकिन पर्यटक आते है तो ज्यादा से ज्यादा यहाँ पर चाय-बिस्कुट खाते है, जानकी माता का दर्शन करते हैं, फिर चले जाते हंै । उन्हें रोकने लिए बहुत सारे आधार हैं जिससे हम लाभ ले सकते हैं । लेकिन संरक्षण सर्म्बर्द्धन नहीं होने के कारण न  तो हम अपना पहचान बना पाए हंै और न ही इस स्थल की महत्ता को औरों के समक्ष ला पाए हैं । जनकपुर के दो आधार हैं । पहला तो हम इसे धार्मिक स्थल बनाए । दूसरा मिथिला की राजधानी । अगर हम दोनों आधार को मद्देनजर रखते हुए जनकपुर के विकास में आगे बढÞते हैं तो वह दिन दूर नहीं कि जिस तरह त्रेता युग में देवगण यहाँ आने के लिए लालायित होते थे उसी तरह जनकपुर दर्शन के लिए विश्व भर के लोग यहाँ आने लगें ।
एक तथ्यांक के अनुसार जानकी मन्दिर के अधीन में १ सौ ४२ बीघा, राम मन्दिर के अधीन में १ हजार २ सौ २० बीघा, लक्ष्मण मन्दिर के अधीन में ३८बीघा, हनुमान मन्दिर के अधीन में  २९ बीघा, कुपेश्वरनाथ महादेव मन्दिर के अधीन में ७२ बीघा, रत्नसागर मठ के अधीन में  ५५ बीघा जमीन है । उसी की बहुत सारी जमीन अतिक्रमण की जा चुकी है । इसी अतिक्रमित जमीन को फिर से अपनी पहचान दिलाने के लिए एक अभियान चल रहा है और इस अभियान में लगे कुछ युवा धन्यवाद के पात्र हैं । खास कर कहा जाए तो इसका प्रमुख श्रेय रामाशीष यादव, विजय दत्त, ध्रुव झा, घनश्याम मिश्र, सरोज मिश्र, राजकुमार महासेठ और इसमे सक्रिय सहयोग करने वाले प्रहरी प्रशासन प्रमुख हंै ।
धार्मिक शहर होते हुए भी यहाँ का नाला, सडÞक गन्दी है, मांस मछली का व्यापार अव्यवस्थित होने के कारण हर आर अस्तव्यस्तता दिखती है । कहते हंै मान लो और ठान लो तो कोई कार्य असम्भव नहीं है । ऐसा भी नहीं है कि सरकार ने इसके लिए विशेष योजना नहीं दी है । गंगा सागर सफाई अभियान शुरु हुआ और गंगा महाआरती से जनकपुर की सफाई की लहर, गंगा की लहर की तरह कोने कोने में फैल गयी । जिस प्रकार से जनकपुर विकास का अभियान चल रहा है, इसे निरन्तता की आवश्यकता है । इस अभियान में आन्तरिक द्वन्द्व की भी सम्भावना है लेकिन इसके लिए निष्पक्ष, निस्वार्थ और इमानदारीपर्ूवक कार्य करना होगा । अगर कही पर चुक गये तो फिर से मुश्किलें नहीं होगी यह नहीं कहाा जा सकता ।
 कैसे हुआ अतिक्रमण –
मठ मन्दिर, तालाव अतिक्रमण कर बनायी गयी इमारतंे टूटने पर जमीन मालिकों ने बहुत सारे राज खोले हैं । वे लोग कहते हंै बडÞे बनने का सपना देखनेवाले आज बिलकुल घरबार विहीन हो गए हैं । कुछ दिनो से अतिक्रमित जमीन खाली करवाने के अभियान से लोग भयभीत हैं । वह रो-रो कर कहते हैं, ‘हम कहाँ जाएँगे हमारे पास तो अब कुछ भी नहीं बचा । मठ मन्दिर के महन्थों ने हमसे बहुत सारे रूपए लिए हैं ।  हमने कुछ अतिक्रमित किया है और कुछ पैसा महन्थों को भी दिया है । घर निर्माण के क्रम में नगरपालिका के कर्मचारी ने भी लिया है । पहले पता चलता कि यह दिन देखने को मिलेगा तो ऐसी गलती कभी नहीं करते ।’
खासकर तेलहा मडहा पोखरी, दशरथ तलाव, पापमोचनी अतिक्रमित जमीन डोजर से हटाने पर लाखों का धनमाल नुकसान हुआ है । सैकडÞों लोग बेघर हुए । अभियान से बहुत सारे लोग खुश भी हैं । कुछ का कहना है कि ‘विकास के लिए हम अपना घर खुद  तोडेÞंगे । किसी भी हालत में व्यवस्थित, सुन्दर और स्वच्छ जनकपुुर हो ।’
लेकिन बहुत बडÞी बात यह है कि धर्मकर्म में लगे महन्थो द्वारा जिस वस्तु का संरक्षण होना चाहिए उन्हीं के द्वारा पैसा लेकर घर निर्माण करवाना कितना उचित और कितना अनुचित है, यह सोचने वाली बात है । छोटा सा उदाहरण जानकी मन्दिर को ही ले तो तेलहा मडहा पोखरी के दक्षिणवारी डिल पर मन्दिर द्वारा ही घर निर्माण कर उसका किराया वसूली किया जाता था । ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं कही पर मन्दिर में घर है तो कही पर घर के ऊपर मन्दिर है । तलाव की बात करें तो इस प्रकार अतिक्रमित कर रखे हैं कि घर बनाने के लिए जो नाला निर्माण करते हैं, तलाव को वैसे ही नाला में परिणत कर दिया गया है ।
कौन हंै अतिक्रमण करवानेवाले सम्बन्धित निकाय –
जनकपुर के सौन्दर्यीकरण का स्वरूप बिगाडÞने में जमीन अतिक्रमणकारी ही दोषी नहीं हंै । इसमें तीन सम्बन्धित निकाय भी दोषी माने जाएँगे । भले ही प्रथम चरण के अभियान में दोषी अतिक्रमण करनेवाले को ठहराया गया हो, लेकिन जिस जगह मंे अत्रि्रमण हुआ है चाहे वह गुठी संस्थान की जमीन हो, मठ मन्दिर के नाम में हो वहाँ जनकपुर नगरपालिका ने बनाने की स्वीकृति दी है । ऐसे में वो भी उतने ही कसूरवार हैं जितना बनानेवाले हैं ।
अभी तो इमारतों को तोडÞने का काम शुरु हुआ है । उसके बाद इन तीनों पर भी अनुसन्धान करना आवश्यक है । अभी भी सभी को मालूम है कि जानकी मन्दिर से ऊँचे इमारतों का निर्माण नहीं किया जा सकता है लेकिन उससे भी बडÞी बडÞी इमारतें बन चुकी हैं । यह बिना नाप नक्शे का होगा सो भी बात नहीं । कल के दिन में अगर उसे तोडÞने की बात हर्ुइ तो उसकी क्षतिपर्ूर्ति कौन देगा सवाल खडÞा हो सकता है । नेपाल सरकार या जिस कर्मचारी ने स्वीकृति दी है । व्यक्तिगत स्वार्थ और लाभ के कारण सरकार को क्षतिपर्ूर्ति देना पडÞे यह तो कदापि जायज नहीं होगा ।
 भव्य महागंगा आरती
जेष्ठ २५ गते रविवार । शाम के ७ बजे गंगा सागर पोखरी के चारो ओर महिला, पुरुष, बाल बालिका, सुरक्षाकर्मी से भरा हुए थे । रंगीन बल्बों के झालर और गीतों से गंगासागर का वातावरण गुन्जायमान था । सबकी निगाहंे गंगा महाआरती पर टिकी हर्ुइ थीं ।
भारत के बनारस में गंगा आरती होती है । उसके बाद जनकपुर में प्रथम बार गंगासागर में महागंगा आरती का प्रारम्भ हुआ है । बनारस के तीन पण्डित गंगा महाआरती करने आए थे । इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रमुख जिला अधिकारी और अतिथि के रूप में काठमाण्डू स्थित भारतीय राजदूत रञ्जित राय, वीरगञ्ज के महावाणिज्य कोन्सूलर अञ्जु रञ्जन भी सहभागी हुए थे । रोचक और उत्साहमय वातावरण था । और यह स्वाभाविक भी था इसके बाद से ही गंगा आरती की एक नई परम्परा की शुरुआत जो हर्ुइ है । जनकपुर के लिए धार्मिक आस्था में दूसरा आयाम है गंगा आरती । दिन में माता जानकी का दर्शन उसके पश्चात् सन्ध्या में गंगा आरती में सहभागी होने के बाद ही पुण्य की प्राप्ति होगी गंगा आरती के पुजारी का कहना है ।
नेपाल पत्रकार महासंघ धनुषा के निवर्तमान अध्यक्ष रामाशीष यादव के संयोजकत्व में यह आरती सम्पन्न हर्ुइ । आरती का मुख्य उद्देश्य था जनकपुर की गन्दगी किसी भी हालत मे माँ गंगा दूर करे । उसी आरती से माँ गंगा ने शायद पुकार सुन ली । आज जनकपुर के हरेक कोने कोने मंे सफाई अभियान चल रहा है । गंगा आरती गंगा दशहरा के दिन से निरन्तर चलती आ रही है । जो भी तर्ीथयात्री जनकपुर दर्शन के लिए आते हैं, एक बार गंगा आरती में सहभागी अवश्य होते है । गंगा आरती शाम को ७ से ८ बजे तक प्रत्येक दिन प्रारम्भ होता है ।
गंगा आरती के संयोजक रामशीष यादव के अनुसार गंगा आरती से मन में शान्ति ही नहीं सुस्वास्थ्य, अच्छा विचार और विकास की प्रेरणा भी मिलती है । गंगा आरती से निकली दीप्त किरणें यहाँ के युवाओं में एक नए जोश का संचार कर रहा है और परिणामस्वरूप आज नगरवासी जनकपुर को साफ, स्वच्छ और सुन्दर बनाने में लगे हुए हैं । मुझे विश्वास है कि इसमें जो भी सहभागी होंगे उनके विचार स्वच्छ और शरीर निरोग होगा ।
कहाँ से शुरु हुआ यह अभियान –
कुछ वर्षो से जनकपुर गन्दे शहर के रूप में प्रसिद्ध था । ऐतिहासिक धार्मिक स्थल होने के वावजूद जो भी पर्यटक यहाँ आते थे नाक, मँुह बन्द कर माता जानकी का दर्शन कर चले जाते थे । जबकि धार्मिक मान्यता है कि गंगा सागर और धनुष सागर में स्नान कर माता जानकी का दर्शन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है ।
कभी-कभार पर्यटक यह भी कह देते हैं कि यहाँ की मिट्टी तो पवित्र है लेकिन लोग बिलकुल अभद्र हैं । यहाँ की मिट्टी को लोग बहुमूल्य समझकर ले भी जाते हैं । जिस गंगा जल को लोग बोतल मे बन्द कर रखते हैं वह इतना गन्दा है कि लोग छूने से कतरातेे हैं । इस बात को नेपाल पत्रकार महासंघ धनुषा के निवर्तमान अध्यक्ष रामाशीष यादव ने महसूस किया और उन्होंने गंगा सागर सफाई अभियान शुरु करवाया । जिसमें युवा पत्रकार, समाजसेवी, मानवअधिकारवादी, कानूनविद्, युवा, नेपाल प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी, जनपथ, सेना सभी ने सहयोग किया ।
गंगा सागर सफाई अभियान सफल हुआ और यहीं से गंगा की लहर की तरह जनकपुर में सफाई अभियान चालू हो गया । जितने भी मठ मन्दिर, पोखर हंै सभी में सफाई अभियान चल रहा है । इतना ही नहीं इसे आवश्यकता समझकर सम्बन्धित निकाय ने भी आगे कदम बढाया । वृहत्तर जनकपुर क्षेत्र विकास परिषद, जनकपुर नगरपालिका, गुठी संस्थान ने अब आधुनिक जनकपुर की परिकल्पना को पूरी किया जाए कहकर अतिक्रमित जमीन खाली करने में लग गये ।

संरक्षण के लिए कोई बजट नहीं है
आधुनिक जनकपुर की परिकल्पना की शुरुआत यहाँ के ऐतिहासिक धार्मिक सर-सरोवर जो अतिक्रमित हैं उसे खाली करवाने के अभियान से प्रारम्भ हुआ है । वृहत्तर जनकपुर क्षेत्र विकास परिषद, जनकपुर नगरपालिका तथा गुठी संस्थान जनकपुर ने संयुक्त रूप से यह अभियान प्रारम्भ किया है इस अभियान में सैकडों घर तोडेÞ गए हैं और भी यह क्रम निरन्तर रूप से चल रहा है । इसी सम्बन्ध में वृहत्तर के अध्यक्ष राम कुमार शर्मा से संक्षिप्त बात चीत की गईः
० शर्मा जी क्या अतिक्रमित जगह खाली कराने से आधुनिक जनकपुर की परिकल्पना सम्भव है –
– जनकपुर मंे जितने भी तालाब हैं ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के हैं । विश्व के जितने भी धार्मिक स्थल हैं वह किसी ना किसी नदी किनारे अवस्थित है । जनकपुर ही ऐसा धार्मिक स्थल है जिसकी पहचान तालाब और मठ मन्दिर से है । तो मुझे लगता है धार्मिक दृष्टि से जनकपुर को परिवर्तित करने के लिए सबसे पहले अतिक्रमित जगह खाली कराया जाए । इसमें हरेक निकाय ने खुलकर साथ दिया है ।
० वर्षो से अतिक्रमित जमीन में बहुत बडÞे-बडÞे भवन निर्र्मित हैं । क्या उसे तोडÞना सम्भव है –
– देखिए यह अभियान ‘लोहे के चने चबाने’ जैसा है, लेकिन असम्भव नहीं । अभियान चल चुका है और यह कभी नहीं रुकेगा । इसमे प्रशासन, न्यायालय, युवा, नागरिक समाज, पत्रकार, व्यापारी सहित के निकाय लगे हैं, पर्ूण्ा रूप से सफलता मिलेगी ऐसा मुझे विश्वास है ।
० इस अभियान के लिए कहीं से कोई बजट की भी व्यवस्था है –
– जी, नहीं । भारत सरकार ने जनकपुर के मठ मन्दिर एवं तालाब के सौन्दर्यीकरण के लिए जो तीन करोडÞ की राशि अनुदान दी है, उसी से यह अभियान चल रहा है ।
० आधुनिक जनकपुर परिकल्पना के लिए आपके क्या-क्या गुरु योजना हैं –
– देखिए गुरु योजना तो अभी नहीं है । फिलहाल प्रथम चरण में तालाब अतिक्रमण हटाना, दूसरा मठ मन्दिर जो निजी घर में परिणत हो गया है उसे हटाना और उसके बाद धार्मिक परिकल्पना, राजा जनक का दरबार निर्माण करने की योजना है ।
० अतिक्रमित जगह जो आप खाली करा रहे हैं, वह प्रशंसनीय है । लेकिन इसका संरक्षण सर्म्बर्द्धन कब तक होगा –
– अभी तक इसके संरक्षण के लिए कोई बजट नहीं है । वैसे हमने संरक्षण सर्म्बर्द्धन के लिए पर्यटन मन्त्रालय, भारतीय राजदूतावास सहित के निकाय में पहल की है । धन्यवाद !

जन-धारणा
आध्यात्मिक दृष्टि से जनकपुर का विकास हो जानकी मन्दिर का भी यही लक्ष्य है । अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ इसका संरक्षण भी आवश्यक है । अतिक्रमित जगह पर डोजर चलाकर छोडÞ दे तो यह और कुरूप दिखेगा । जनकपुर धार्मिक स्थल के रूप में विकास करे और जानकी मन्दिर विश्व सम्पदा सूची मे पडेÞ यह सभी की धारणा है ।
इस अभियान में मन्दिर के करीब ६०/७० सटर तोडÞे गए हैं । यह चिन्ता की बात नहीं है । यह जगह खाली करवाने का अभियान है यह हमें पता है । उसी प्रकार सुन्दर स्वच्छ, और आध्यात्मिक विकास हो इस पर भी सबको अभियान चलाना होगा । सबसे पहले दूसरे चरण में मन्दिर के आसपास मांसाहारी सामानों की ब्रि्री पर रोक लगाई जाय ।
-रामरोशन दास वैष्णव, छोटा महन्थ, जानकी मन्दिर

आधुनिक जनकपुर की परिकल्पना गंगा सागर अभियान से चली है । इस अभियान का स्वागत हम सब, प्रहरी प्रशासन, पत्रकार, व्यापारी, नागरिक समाज, वकील किया है । खासकर नेपाल होटल व्यवसायी संघ के अञ्चल केन्द्रीय सदस्य विजय झुनझुनवाला, विजय दत्त, राज कुमार महासेठ, एसएपी शिवलामीछाने, कर्ण्र्ााडिजन पिया भी मुख्यता से शामिल हैं । किन्तु जेष्ठ २५ गते गंगा दशहरा के दिन यहाँ पर गंगा आरती हर्ुइ उसमें  सम्बन्धित निकाय ने किसी प्रकार की भूमिका का निर्वाह किया । गंगा आरती भारत के बनारस गंगा नदी के तट पर, इटली में बोलगा नदी और मिथिला में जनकपुर में होता है । गंगा आरती जनकपुर के पर्यटन के लिए दूसरा आयाम है । आधुनिक जनकपुर की परिकल्पना के लिए गंगा आरती को भी महत्व देना ही होगा । किसी व्यक्ति विशेष पर छोडÞ देने से कोई भी कार्य सम्भव नहीं है ।
-रामाशीष यादव, नि.अध्यक्ष, नेपाल पत्रकार महासंघ धनुषा

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