जनकपुर की एक ही मानसिकता-राष्ट्रपति मुखर्जी का भ्रमण सफल कराना

मुकेश कुमार झा , जनकपुर ,२७ अक्टूबर |

मिथिला की प्राचीन राजधानी, राजर्षि जनक एवम् जानकी की जन्मभूमि जनकपुर का माहौल अभी अपने चरम पर है। कारण दीवाली छठ जैसा महत्वपुर्ण पर्व तो है उसके साथ ही भारतीय राष्ट्रपति जी का धर्मिक एवम् सांस्कृतिक भ्रमण भी है। इसी तरह का उत्साह जनकपुर वासियों को पिछले साल भी थी जब भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जनकपुर आने वाले थे।

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हवाई अड्डा से जानकी मन्दिर तक का सड़क मरम्मत करके बिल्कुल नया बनाया गया था परन्तु नेपाल सरकार ने जनकपुर को मोदी जी के भ्रमण का उपयुक्त नहीं समझा और उनको सुरक्षा देने की हैसियत नेपाल सरकार में नहीं है जैसी बातें बनाकर उनका भ्रमण रद्द कर दिया गया। जनकपुर के जनता का सारा उत्साह निरुत्साह में बदल गया और वे मायूस हुए। परन्तु एक बार फिर जनकपुर में उत्साह छाया जब यह घोषणा हुई कि भारतीय राष्ट्रपति जनकपुर आने वाले हैं। यहां के स्थानीय जनता, संस्था, प्रशासन सब मिल कर मन्दिर सफाई, तालाव सफाई अभियान इत्यादि चलाया। जनकपुर का प्रशासन सफाई के लिए सड़क किनारे लगे समस्त दुकान वालों का झोपडी वाला दूकान उखाड़ दिया, बिजली के खम्भे पर लगे फ्लेक्स, दुकानों के आगे तिरछी करके रखी साइन बोर्ड, सब के सब हटा कर रास्ता साफ़ किया गया। मोदी के समय अर्थात एक साल पहले बना सड़क कई जगह टूट फुट गया था जिसको सड़क बिभाग बड़ी तत्परता के साथ बनाने में लगा है। सड़क के दोनों तरफ पीला पट्टी लगाया गया है। यह सारा क्रिया कलाप हवाई अड्डा से जानकी मन्दिर तक की जाने की योजना है जिसमे अभी सिर्फ हवाई अड्डा से मुरली चौक तक हुवा है और शायद एक दो दिन में यह कार्य समाप्त हो जायेगी। सड़क सफाई के क्रम में सड़क को वैक्यूम क्लीनर से नहीं बल्कि मशीन द्वारा हवा मार का साफ़ किया जा रहा है जिससे सड़क का धूल सड़क किनारे के दूकान में और राह चलते लोगों के आँख कान में जाते हैं परन्तु यह सब एक दो दिन की ही बात है एक दो दिन में सब सही हो जाएगा।
इसी बीच जनकपुर भ्रमण में नेपाल के दो बड़ी हस्ती आने वाले हैं, एक नेपाल के राष्ट्रपति और दूसरे नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री एवम नेकपा एमाले का अध्यक्ष खड्ग प्रसाद शर्मा ओली उर्फ़ के पी शर्मा ओली। यह बात थोड़ी सी अटपटी लगी आखिर यही समय उनलोगों को जनकपुर आने की क्या कारण। पर यह पूछे कौन क्यों की उनका देश है वह किसी समय कहीं आ या जा सकते हैं। पूछ तो कोई नहीं सकता पर यह सवाल हरेक मन में है। हर जनकपुर वासी इसको शंका की दृष्टि से देख रहे हैं और सोच रहे हैं की जैसे प्रधानमंत्री मोदी जी का भ्रमण नेपाली सत्ता ने रद्द करवाया कहीं वह इसी तरह राष्ट्रपति मुखर्जी का भ्रमण तो रद्द नहीं करवाना चाहते। नहीं तो एक हप्ते के अंदर दो उच्चस्तरीय नेपाल प्रमुख का भ्रमण जनकपुर क्यों ? कात्तिक १२ गते राष्ट्रपति विद्या देवी भण्डारी जनकपुर आ रही हैं। पिछली बार इन्होंने जनकपुर को बहुत पीड़ा दिया था जिसे जनता भूली नहीं। जिस कारन पिछली बार राष्ट्रपति भंडारी का जनकपुर में विरोध हुवा था उसका मुख्य मुद्दा था की इन्होंने मधेस विरोधी संविधान को संसोधन करने के लिए कुछ प्रयास नहीं किया था बल्कि जारी संविधान का समर्थन किया था। मुद्दा आज भी वही है, उस भ्रमण और विरोध का एक साल होने को आया परन्तु मुद्दा ज्यो का त्यों है। अगर इस बार मधेसी कुछ आवाज उठाए तो पुनः पिछले बार की तरह दमन किया जा सकता है और उलटे मधेस पर अराजक होने का आरोप लगाया जा सकता है और अगर नहीं करे तो सत्ताधारी यह हल्ला फैलाएंगे कि मधेस ने संविधान को स्वीकार किया इसी लिए कोई विरोध नहीं किया।
राष्ट्रपति भण्डारी जी के भ्रमण के ठीक हप्ता दिन में अर्थात कात्तिक १८ गते पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली जी का जनकपुर भ्रमण का कार्यक्रम है। अर्थात राष्ट्रपति मुखर्जी के भ्रमण से ठीक एक दिन पहले। इस संविधान के सारे प्रकृया में सबसे ज्यादा मधेस और मधेसी का बिरोध करने वाले के रूप में ओली जी को लिया जाता है। इस एक साल में इनकी ऐसी ऐसी वक्तव्य आया जिसका कोई जवाब नहीं। आन्दोलनकारीओं ने मधेस आंदोलन के क्रम में अगर किसी का पुतला जलाया होगा तो सब से ज्यादा ओली जी का ही होगा। ऐसे मधेस विरोधी के रूप में परिचित ओली जी का भी ठीक इसी समय आगमन होना भी इसी षड्यंत्र का एक हिस्सा लगता है। क्यों की उनके आने से जनकपुर के जनता का आक्रोश उभरेगा और अगर जनता ने विरोध का कोई कार्यक्रम रखा तो मधेस को असुरक्षित घोषणा कर के फिर से बदनाम किया जाएगा। अब होना क्या है यह तो समय के गर्भ में है परन्तु राष्ट्रपति जी का भ्रमण सफल कराना जनकपुरके आम जनता की मानसिकता है। ओली जी और भण्डारी जी से फिर निपट लेंगे पर इनके षड्यंत्र के जाल में नही आना ही सही रहेगा। हो सकता है ओली जी यह भी टिप्पणी दे सकते हैं की जनकपुर का जनता ने मेरा विरोध नही किया, अपने कार्यकर्ता के स्वागत को जनकपुर के जनता द्वारा किया गया प्रचार करबाए, मधेसी ने संविधान मान लिया इसका भ्रम भी फैलाये परन्तु ओली जी को कौन नहीं जानता जो उनका बात मानेगा। जो भी हो अभी जनकपुर पर समूचा नेपाल और भारत का दृष्टि टिकी हुई है।

 

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