जनकपुर के स.शिक्षा अधिकारी को चप्पल से पीटनेवाले के पास करोडों की सम्पति

जनकपुरधाम , साउन ११ गते ।जिल्ला शिक्षा कार्यालय धनुषा मे सहायक जिल्ला शिक्षा अधिकारी को कार्यालय मे ही चप्पल से पिटने वाले नायब सुब्बा अनिल राय (यादव) का काला कर्तुत के बारे में रहस्य खुलने का क्रम जारी हैं । अनिल राय लम्बे समय से महोत्तरी और धनुषा जिल्ला शिक्षा कार्यालय से किया गया हरेक कामकारवाही में पैसा का लेनदेन करके अपार सम्पत्ति कमा चुके है यह बात अब मिडिया में सामने आ रही है |
शिक्षा कार्यालय धनुषा के विद्यालय प्रशासन शाखा के नासु राय ने लगभाग एक दशक के अपने नौकरी के जीवन में जिल्ला शिक्षा कार्यालय में काम करबाने के वापत सेवाग्राही से घुस लेकर करोड़ों रपये कमाने  की बात सामने आई है । जिल्ला शिक्षा कार्यालय सिन्धुली से जागिर सुरु करने वाले राय कुछ ही महिना में गृह जिल्ला महोत्तरी के शिक्षा कार्यालय में तवादला हो कर आए थे । जातीय और राजनीतिक संरक्षण पाने के लिए और घुस के चलखेल में नामुद राय महोत्तरी शिक्षा कार्यालय में नियुक्ति की ठेकेदारी शुरु की थी । शिक्षा कार्यालय मे कितने को घुस देकर मुह बन्द कराने मे सफल थे तो कितने को स्थानीय कहकर डराने -धमकाने से चुप लगाया था ।
तत्कालिन अवस्था मे राय द्वारा किया गया नियुक्ति के प्रसंग अभी भी महोत्तरी जिल्ला के शिक्षा क्षेत्र मे चर्चा के विषय बना हैं । राय को “दबंग“ बनने के लिए महोत्तरी मे बहुत सहज भी हुवा ।क्योंकि वे महोत्तरी के बथनाहा गाउँ के बासी हैं और यादव जाति होने के कारण राजनीतिक आशिर्वाद प्राप्त होने में सहज महशुस हुई । महोत्तरी मे राय के साथ् बैठकर काम करने वाले एक कर्मचारी के अनुसार कांग्रेस के स्वजातीय नेता के संरक्षण से ही वे भ्रष्टाचार और अनियमितता करने पर भी कभी कारवाही के भागीदारी नहीं हो सका ।
नेपाली काँग्रेस के महोत्तरी के जिल्ला अध्यक्ष महेन्द्र राय यादव, सुशील यादव लगायत के नेता के संरक्षण नही हुआ होता तो अनिल राय अभी भ्रष्टाचार के मुद्दे में जेल मे रहते । लेकिन राजनीति के खेल में जातीय समूह को नेतागिरी करने वाले उनके रक्षा कवच बना हुवा है ।
सुब्बा राय ने जनकपुर और जलेश्वर में खरीद किये हुये जमीन के आर्थिक स्रोत के बारेमें अभी खोजबीन नही हो पाया है  । तसर्थ राय के सम्पत्ति अपने नाम में न रखकर रिश्तेदारों के नाम में रखा हैं जिसके कारण कल भ्रष्टाचार के छानबिन में बचने का आधार मिल सकें ।
पूर्वज के सम्पत्ति के नाम में गाउँ में लगभग १० कठ्ठा जमीन होने वाले अनिल के अकुत सम्पत्ति के उपर न अख्तियार को नजर पाडा न राष्ट्रिय सतर्कता केन्द्र को ।
एक दशक इधर धनुषा और महोत्तरी के शिक्षा क्षेत्र के माफिया अनिल राय का आत्मविश्वास बढकर आसमान छूने लगा |  इसी पृष्ठभूमि के कारण वे अपने से वरिष्ठ अधिकारी के उपर चप्पल चलाए थे। कार्यकक्ष मे ही पिटाई की थी । कानुनी कारवाही करने पर भी जिल्ला प्रशासन और जिल्ला प्रहरी दोनो के आँख में पट्टी बाँध दिया गया । जिल्ला प्रहरी कार्यालय में स्वजातीय प्रहरी अधिकृत के हैसियत को दुरुपयोग किया गया । शिक्षा क्षेत्र मे रहे स्वाजातीय लठैतो को प्रयोग किया गया ।
नियम संगत काम करने पर भी अपने को चप्पल से पिटने वाले अनिल राय के कर्तुत के बारे में आवाज उठाने वाले सहायक जिल्ला शिक्षा अधिकारी मेहीलाल यादव का संघर्ष प्रसंसनीय हैं । क्योंकि अनिल को बदमासी सहकर वहाँ के लोग कुछ नही बोलते थे | लेकिन ये उपसचिव अनिल को विभागीय कारवाही के लिए शिक्षा मन्त्रालय और शिक्षा विभाग लगायत के निकाय में सिफारिस भी की गयी हैं । अब देखते है मेहीलाल को न्याय मिलता है या नहीं | सोर्स टुडे पार्टी

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