जनकपुर में धार्मिक पर्यटन की प्रचूर संभावना : विजेता चौधरी

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विजेता चौधरी, जनकपुरधाम, १४ पुस ।
मिथिला क्षेत्र कहने भर से ही जनकपरधाम का नाम हर किसी की जूवां पर आ जाता है । बहरहाल मिथिला की गरिमा को अपने में संजोयी जनकपुरधाम के पर्यटकीय संभावनाओं को लेकर बृहत बहस जोड पर है ।
मैथिली विकास कोष द्वारा आयोेजित मिथिला में पर्यटन की संभावना पर विज्ञ के साथ व्यापक रुप में विमर्श व सुझाव संकलन का कार्य किया गया ।
विशेषज्ञ तथा अर्थशात्र के ज्ञाता डा. सुरेन्द्र लाभ ने बताया कि जनकपुर में धार्मिक पर्यटन की प्रचूर संभावना को नकारा नहीं जा सकता । मिथिला की प्राचिन चिजों को संरक्षण कर पर्यटन प्रवद्र्धन किया जा सकता है । उन्होंने जनकपुर सीताजी का कर्म क्षेत्र है तो वहीं भगवान राम के ससुराल भी है बताते हुए कहा इसी आधारपर भी पर्यटक को जनकपुर तक लाया जा सकता है ।
जनकपुर का मुख्य आकर्षण जानकी मंदिर रही है, यद्यपि मणीमण्डप, सीताराज विवाहपद्यती जैसे विवाहपञ्चमी, रामनवमी, धनुषाधाम, कुण्ड लगायत की अनेकों धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल है जो पर्यटकीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जाती है ।
इस सन्दर्भ में महन्थ नवलकिशोर ने कहा जनकपुर में प्रत्येक वर्ष विवाह पञ्चमी व रामनवमी में हजारों भारतीय तथा स्वदेशी पर्यटक आते हैं । हमें धार्मिक पर्यटक सहित अन्य पर्यटक को और अधिक आकर्षण तथा लाने के लिए दृश्य अवलोक हेतु स्थानों का निर्माण करवाना चाहिये ।  मिथिला विवाह परम्परा की झलकिंया प्रदान करने वाली स्थाने जेसे कोहबरकुञ्ज, रामसीता होली खेलने का स्थान लगायत मिथिला विवाहपद्धती अवलोकन करवाने के लिए वृहत्तर सोंच के साथ पर्यटन आर्कर्षित किया जा सकता है ।
जनकपुर वृहत्तर विकास के अध्यक्ष रामप्रसाद ने कहा जनकपुर में वार्षिक १२ से १५ लाख पर्यटक आते हैं । विदेशी से कम खर्च नहीं करते भारतीय पर्यटक बस हमें व्यवसायिक रुप में इस जिच को आगे बढाना है । उन्होंने कहा जैसे मुस्लिम के लिए मक्कामदिना तथा बुद्ध धर्मावलम्बियों के लिए कपिलवस्तु सब से बडा तिर्थ के रुप में माना गया है, वैेसे ही हमें हिन्दुधर्म में सीता के जनमस्थल जनकपुर को विश्वस्तर में स्थापित तिर्थ के रुप में विकास करना चाहिये ।
अध्यक्ष रामप्रसाद ने  विदेशी पर्यटक हेतु एयरपोर्ट की अच्छी निर्माण व विकास, ५२ कुटी ७२ कुण्ड की संरक्षण तथा रामसीता के विवाह के स्मरणीय स्थल जनकपुर में हनीमुन प्याकेज का निर्माण कर नवविवाहितों को भी आकर्षित कि जाने की संभावना को दर्शाया । उन्होंने राष्ट्रीय गौरब में मिथिाल क्षेत्र जनकपुर को रखने की सरकार से मांग की ।
साहित्यकार, संस्कृतिविद डा. रेवतीरमण लाल ने तराइ के सम्पूर्ण आठ दश जिला मिथिला क्षेत्र हैं बताते हुए कहा पर्यटक को इन सभी जिला में अवस्थित रौदामजार, सलहेस फुलवारी, धनुषाधाम, कोशिब्यारेज, कोशी टप्पु जैसे धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलोंका अवलोकन करवाने का प्याकेज निर्माण कर पर्यटन क्षेत्र में आगे बढा जा सकता है । उन्होंने पर्यटक को ठहराने के लिए आवास, होटेल का समुचित व्यवस्था, सडक व यातायात की सम्पूर्ण सुविधा तथा सभी देशों के दूतावासक के जरिये प्रचारप्रशार के माध्यम से  पर्यटक को लाया जा सकता है, जिस से जनकपुर मात्र नही सम्पूर्ण तराई व देश का विकास संभव है ।
विज्ञ राजकिशोर यादव ने कहा नेपाल में इतने तलाउ व पोखर दुसरी किसी स्थान तथा शहर में नहीं है, इस को और सौन्दर्यकरण कर पर्यटन की संभावना को बढाबादिया जा सकता है । उन्होंने सात दिनो के मिथिला दर्शन प्याकेज पर्यटक के लिए निर्मााण कर पर्यटन को आकर्षित किया जा सकता है बताया । इस के अतिरिक्त गढीमाई, सिमरोनगढ दर्शन, मणीमण्डपव पार्क निर्माण जलविाहर लगायत बहुत सी स्थान है जहा पर्यटक को घुमाया जा सकता है । उन्होंने रेल मार्ग का निर्माण पर्यटन आगमन का सबसे बडी आवश्यकता होने की बात पर जोड डाला ।
इसी प्रकार विज्ञ महेन्द्र यादव ने हमारा घुमने का कन्सेप्ट नहीं होता है बताते हुए सब से पहले स्वदेशी पर्यटक को घुमने तथा प्रर्यटन शुरु करना चाहिये जिस से पर्यटन का विकास और प्रचार संभव है बताया ।
स्वच्छ जनकपुर अभियान के संयोजक रामाशिष यादव ने म्युजियम का निर्माण, जो खजुरी में बनाया जाए ताकी पर्यटक को वहां तक ले जायाजा सके बताते हुए स्टेम इन्जिन वला ७६ वर्ष का पूराना रेल भी पर्यटन का संभावना लिए हुई है । उन्होन.े जनकपुर से धनुषाधाम तक रेलमार्ग से टुरिजम का परिकाल्पना कि जाने पर जोड डाला ।
अगर देखा जाए तो जनकपुर के विकास व पर्यटन की संभावना का विकास हेतु सरकारी स्तर पर भले ही कोइ ठोस कार्य अभी तक समने नहीं आई हो । यद्यपि स्थानीय तौर पर युवा व जिम्मेवार व्यक्रियों ने जनकपुर को सवारने का अभिभारा अपने जिम्मे ले लिया है । जनकपुर में स्वच्छता अभियान, गंगाा आरती लगायत का कार्य आस्वस्त करती है । विना टुरिज्म नेपाल का विकास संभव नहीं है । वहीं सरकार को हिमाल, पाहाड व तराई में अवस्थित स्थलोंका ऐसा प्रचार प्रशार करना चाहिये जिस से पर्यटन की संभावना बढे तथा स्थानीय स्तर पर विकास व स्वरोजगार का भी निर्माण हो सके ।
सरकार की सगरमाथा व लुम्बिनी के साथ साथ मिथिला क्षेत्र में पर्यटन प्रर्वद्धन कर लाभ लेने से चूकना सरकारी उदासीनता व अदुरदर्शिता मात्र है ।
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