जनता नहीं, सरकार साम्प्रदायिक है

मधेशी नेपाल के तराई क्षेत्र के आदिवासी हैं ।

उन्होनें सिक्किम पर फोकस करते हुए कहा, चेहरे के आधार पर तुम नागरिकता ले लो और राष्ट्रपति बन जाओ तो कुछ भी नहीं, हम वंशज के आधार पर नागरिकता लें तो उस पर शंका क्यो ?


मधेश आन्दोलन में जो पुलिस घर में घुस कर महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार करती थी वह पुलिस आज संशोधन विरोधी तत्वों पर कारवाही क्यों नहीं कर रही ? उन्होंने कहा, मधेशी जनता भले ही माफ कर दे, लेकिन वह अपराध जो ओली की सरकार ने किया है उसकी सजा मिलना प्राकृतिक सिद्धान्त है, उसे कोई माफ नहीं कर सकता ।


जब हम मधेशी अंगीकृत महिलाओं की बात करते हैं, तो यह सरकार सिक्किम और दार्जलिंग की बात को लेकर उससे जोड़ती है, जब हम अधिकार की बात करते हैं तो उसे विखण्डन का दर्जा दिया जाता है

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विनय दीक्षित
देश में जब भी पहाड़ का विषय उठता है तो मधेश पर आरोप लगता है, जब मधेश का विषय बाहर आता है तो पहाड़ पर आरोप लगता है । नेता यही भाषण मारते हैं कि जनता सर्वस्व है । लोकतन्त्र की जनता ही शक्तिशाली होती है, किन्तु संघीयता, सीमांकन और संविधान संशोधन पर जो बवाल मचा उससे सरकार की नीयत का अन्दाजा हो गया है ।,
देश में उत्पन्न परिस्थिति पर विचार व्यक्त करते हुए तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष महन्थ ठाकुर ने सरकार को साम्प्रदायिक बताया है । मधेश आन्दोलन में जो पुलिस घर में घुस कर महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार करती थी वह पुलिस आज संशोधन विरोधी तत्वों पर कारवाही क्यों नहीं कर रही ? उन्होंने कहा, मधेशी जनता भले ही माफ कर दे, लेकिन वह अपराध जो ओली की सरकार ने किया है उसकी सजा मिलना प्राकृतिक सिद्धान्त है, उसे कोई माफ नहीं कर सकता ।

तराई को काठमाण्डु ने हमेशा सौतेला व्यवहार किया है । सरकार जो भी रही उसने सिर्फ तराई के दोहन के विषय में काम किया । राजतन्त्र में भी मधेशियों को कुछ खास महत्व नहीं दिया गया ।
हाल ही में, मधेशी नागरिक समाज द्वारा आयोजित की गई सभा को सम्बोधित करते हुए ठाकुर ने कहा, जब हम मधेशी अंगीकृत महिलाओं की बात करते हैं, तो यह सरकार सिक्किम और दार्जलिंग की बात को लेकर उससे जोड़ती है, जब हम अधिकार की बात करते हैं तो उसे विखण्डन का दर्जा दिया जाता है, जब हम प्रदेश निर्धारण की बात करते हैं तो उसे देश अलग करने के नारा से जोड़ा जाता है । अध्यक्ष ठाकुर ने कहा, एक बात स्पष्ट है कि सरकार ही साम्प्रदायिक परिस्थितियों को उत्पन्न करती है ।
हमारा लक्ष्य उस वैवाहिक अंगीकृत नागरिकता से है जो विदेशी महिला नेपाली नागरिक के साथ विवाह करती है । उसके अधिकारों के लिए मोर्चा ने अपनी माँग और एजेन्डा सामने रखा है । बाँकी अन्य लोगों को अंगीकृत नागरिकता क्यों देती है ? इस सरकार से ही पूछना पड़ेगा ।
सम्बोधन के क्रम में नेता ठाकुर ने कहा, जनता अब जाग गई है । मधेश आन्दोलन ने बहुतों को सचेत कर दिया । नेपाल के खस ब्रह्मण की नीयत साफ हो गई । ओली की सरकार तथा एमाले पार्टी नश्लीय लोगों से भरी पड़ी है ।
नागरिकता पर नियन्त्रण हमेशा सरकार का
नागरिकता पर नियन्त्रण हमेशा सरकार का रहा है, गलत लोग कैसे नागरिकता ले लेते हैं ? सरकार को इसका जवाब देना चहिए । मधेशी ने किसी को नागरिकता नहीं दिया, वह सत्ता का व्यक्ति ही नहीं है । देश निर्माता और रचयिता तो एक ही समुदाय है फिर मधेशी पर उंगली क्यों उठती है ?
संघीय संरचना, सीमांकन, संविधान संशोधन में मधेश और समस्या तथा समाधान के उपाय पर आधारित कार्यक्रम में राजनीतिक विश्लेषक डा.सुन्दर मणि दीक्षित ने कहा, देश में मधेश और पहाड़ को किस तरह से विभाजन किया जाए, सरकार का यह परम लक्ष्य रहा है । भूगोल विभाजन की बात तो समझ में आती है, लेकिन जनता में टकराव उत्पन्न कर चुनाव जीतने का सपना देखना अब मुश्किल होगा ।
संघीयता लागु करनें में ही सरकार असफल दिख रही है, राज्य पुर्नसंरचना, सीमांकन जैसी जटिल मुद्दे पर तो बात ही करना बाकी है । स्थानीय निर्वाचन की तैयारी कर रही सरकार मधेशी की माँग सम्बोधन किए बिना कुछ नहीं करा सकती डा.दीक्षित ने कहा, मधेशी इस देश का अभिन्न हिस्सा है, उसे छोड़कर आगे नहीं बढ़ा जा सकता । सरकार को नीयत साफ कर मधेश की माँग को सम्बोधन करना ही होगा, दूसरा विकल्प नहीं है डा.दीक्षित ने कहा, मधेशी अब पीछे हटने वाला नहीं है । शासकों ने मधेशी को बहुत दबाया, विभेद की व्याख्या एक दिन में नहीं हो सकती, उन्होंने कहा, अब समय आ गया है कि शासन सत्ता मधेश से संचालित हो ।

मधेशी नेपाल के तराई क्षेत्र के आदिवासी हैं । उन्होनें सिक्किम पर फोकस करते हुए कहा, चेहरे के आधार पर तुम नागरिकता ले लो और राष्ट्रपति बन जाओ तो कुछ भी नहीं, हम वंशज के आधार पर नागरिकता लें तो उस पर शंका क्यो ?

कार्यक्रम में सहभागी पूर्व सभासद दमननाथ ढुंगाना से प्रश्न करते हुये अपने शब्दों की शुरुआत की, इस में से कोई हमें बताए कि मधेशी माँग क्या गलत है ? शासन प्रशासन पहाड़ी के हाथ में, सत्ता पहाड़ी के हाथ में, कर्मचारी, पुलिस, सेना सभी सरकार की, मधेशी ने पाया क्या है अभी तक ?
तराई को काठमाण्डु ने हमेशा सौतेला व्यवहार किया है । सरकार जो भी रही उसने सिर्फ तराई के दोहन के विषय में काम किया । राजतन्त्र में भी मधेशियों को कुछ खास महत्व नहीं दिया गया । एक मन्त्री बना दिया कभी, उसी मोडेल में इससे पहले राष्ट्रपति बना दिया, ढुंगाना ने कहा, किसी व्यक्ति विशेष को राष्ट्रपति बनाकर सरकार क्या दिखाना चाहती है, ? क्या सभी मधेशी राष्ट्रपति ही बनना चाहता है ?
सभा में सहभागी बरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र महतो ने मधेश के इतिहास को जनता के सामने प्रस्तुत किया । नेपाल में मधेशी की भूमिका और अस्तित्व पर उन्होंने विचार व्यक्त करते हुए कहा, मधेशी नेपाल के तराई क्षेत्र के आदिवासी हैं । उन्होनें सिक्किम पर फोकस करते हुए कहा, चेहरे के आधार पर तुम नागरिकता ले लो और राष्ट्रपति बन जाओ तो कुछ भी नहीं, हम वंशज के आधार पर नागरिकता लें तो उस पर शंका क्यो ?
सन १८३० से पहले भी मधेशी नेपाल में थे । सन १८६० में जब चार जिला फिर नेपाल में आया तो वहाँ जो लोग थे वो भी वहीं रह गए । तो आदिवासी वे लोग नहीं तो फिर कौन है ? भूगोल परिवर्तन हुआ जनता तो वही है । सरकार अपनी गलतियों को छिपाने के लिए कई बार दुश्साहस करती रही है और करती रहेगी अधिवक्ता महतो नें कहा, इसके लिए मधेशी जनता को सक्षम होना होगा ।
सदभावना पार्टी अनुशासन समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता राम कुमार दीक्षित नें सरकार की आलोचना करते हुए कहा, किस विभाग में कितने मधेशी हैं यह हिसाब क्यों नहीं देती सरकार ? कार्यक्रम संचालन कर रहे दीक्षित ने कहा, मधेशी जनता नेपाली भाषा बोलते बोलते पूरा जीवन समाप्त कर दिया लेकिन वह नेपाली नहीं हो सका ।
सरकार की दृष्टि में चेहरा ही नेपालीपन की पहचान है, जो पहाड़ी है वह जन्मसिद्ध नेपाली हैं दीक्षित ने कहा, मधेशी को बार बार नेपाली होने के लिए परीक्षा देना पड़ता है । कार्यक्रम में सहभागी तमलोपा के महामन्त्री पशुपति दयाल मिश्र ने कहा, मधेशी जनता के साथ क्या होता है देश में अब सारा विश्व जान गया है । सरकार का भ्रम भी जल्द ही टूट जाएगा नेता मिश्र ने कहा, संविधान संशोधन में मधेशी सन्तुष्ट नहीं हुआ तो सरकार के लिए फिर कठिन दिन की शुरुआत होगी । मधेशी को फिर आन्दोलन के लिए तैयार होना होगा नेता मिश्र ने कहा, अब हम अधिकार लिए बिना पीछे नहीं हटने वाले ।
कार्यक्रम के बाद अवधी पत्रकार संघ नेपाल केन्द्रीय समिति द्वारा आयोजित पत्रकार भेटघाट में भी नेता ठाकुर ने दोहराया, हमारा मुद्दा वैवाहिक अंगीकृत मात्र है । सरकार जिस तरह प्रचार करके मुद्दे को उथलपुथल करती है वैसा हम ने और मोर्चा ने माँगा ही नहीं है ।
नागरिकता पर नियन्त्रण हमेशा सरकार का रहा है, गलत लोग कैसे नागरिकता ले लेते हैं ? सरकार को इसका जवाब देना चहिए । मधेशी ने किसी को नागरिकता नहीं दिया, वह सत्ता का व्यक्ति ही नहीं है । देश निर्माता और रचयिता तो एक ही समुदाय है फिर मधेशी पर उंगली क्यों उठती है ?

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