जनसंख्या के आधार पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था हो : इन्दिरा शाह

इन्दिरा शाह, काठमांडू, माघ, 1 गते |
देश में लंबे अरसे से जारी आन्दोलन के पश्चात् प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल ने अगहन १४ गते संविधान संशोधन विधेयक संसद् सचिवालय में पंजीकृत किया है । लेकिन पिछड़ावर्ग, मधेशी, दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी जनजाति महिलाओं के मुद्दों को जिस प्रकार से संबोधन कर पंजीकृत करना चाहिए था, उस प्रकार से नहीं हो सका है ।
इंदिरा शाह

इंदिरा शाह

नागरिकता की प्राप्ति और जनसंख्या के आधार पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व हमारी मांगें रही हैं । जबकि विद्यमान संशोधन विधेयक में नागरिकता की प्राप्ति के प्रावधान में विभेद किया गया है । विदेशी महिला की शादी नेपाल में होने पर वे भी नेपाली ही हो जाती है । ऐसी अवस्था में उन्हें वंशज के आधार पर नागरिकता मिलनी चाहिए । जबकि वर्तमान संविधान के तहत उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाया गया है, जो अन्तर्राष्ट्रीय कानून एवं मानवाधिकार के सिद्धान्त के भी विपरीत है । इसी प्रकार उन्हें पुरुष के समान ही हक मिलना चाहिए, चाहे वह नागरिकता की प्राप्ति हो या देश के हर अंगों में भागीदारी की बात हो ।
इसी प्रकार दूसरा मसाला है, प्रतिनिधित्व का । वर्तमान परिवेश में कुछ खास जाति विशेष या समुदाय या सम्भ्रान्त परिवार की महिलाएं ही महिला आरक्षण का फायदा ले रही हैं । पिछड़ावर्ग, मधेशी, दलित, आदिवासी जनजाति की महिलाएं सभी क्षेत्रों में आरक्षण की सुविधा से वंचित है । अतः इन महिलाओं के लिए जनसंख्या के आधार पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था होनी चाहिए । ऐसे प्रावधान से ही ये महिलाएं आरक्षित हो सकती हैं ।
जहाँ तक मसला है, सीमांकन की, तो मधेश में दो प्रदेश होना चाहिए । पूर्व में झापा, सुनसरी, मोरंग, सप्तरी, सिरहा, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट, बारा, पर्सा व चितवन तक एक प्रदेश और नवलपरासी, रुपन्देही, कपिलवस्तु, दाङ, बांके, बर्दिया, कैलाली व कंचनपुर तक दूसरा प्रदेश । इसके अतिरिक्त चुरे पर्वत क्षेत्र सहित का मधेश प्रदेश होना चाहिए ।
(इन्दिरा शाह लोक दल की कोषाध्यक्ष हैं ।)
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