जब तक चलेगा, चलने दो कारवाँ : देव आनंद

कुछ अरसे पहले देव साहब ने आईबीएन-7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष के साथ जिंदगी के अनछुए पहलुओं पर रोशनी डाली थी। उसी इंटरव्यू के संपादित अंश इस प्रकार हैं:-

आशुतोष : देव साहब आप अपने आपको कैसे परिभाषित करेंगे।
देव आनंद : मैं अपने आपको एक ऐसे इंसान के रूप में परिभाषित करना चाहता हूँ जो कि अभी एक ऐसे स्टेज पर आया है कि उसे अपने आप से ‘एक्सपेरिमेंट’ करना है, अपने काम से, अपने मीडियम से, अपने ख्यालातों से, अपनी तरक्की से, अपनी फिल्मों से, फिल्में जो लोगों के साथ ताल्लुक रखती हैं। जितना आप काम करते हो उतना ही आपका तर्जुबा बढ़ता है जितनी आप गलतियाँ करते हो उतना आप सुधरते हो। सुधारने के बाद आप फिर गलतियाँ करते हो। ये चलता रहता है क्योंकि परफेक्शन कहीं नहीं है। परफेक्शन आसमान है और आसमान पर कोई नहीं जा सकता। मैं जो हूँ, मैंने जो काम सीखा है, मैं अभी तक सीख रहा हूँ और मुझे सीखने में मजा आ रहा है।

*पूरी दुनिया आपकी फैन है, वो कहते हैं कि देव आनंद कभी थकता ही नहीं, हमेशा ऊर्जावान।
आप एक बात बताइए मैं क्यूँ थकूँगा। जब मैंने खुद अपना काम अपने सिर पर लिया है तो मुझे मजा आ रहा है। जब मैं सच बोलता हूँ तो मैं नहीं थकता हूँ।

*लोग कहते हैं कि एक सीमा के बाद आदमी थक जाता है, उसको मजा आना कम हो जाता है, जिंदगी से उसे प्यार नहीं रहता। देव आनंद एक ऐसी शख्सियत हैं जो जिंदगी से बेइंतहा मुहब्बत करता है।
ऐसा काम जिसमें आप सुध-बुध खो जाएँ तो आप कैसे थकोगे, जहाँ आप बोर हो जाएँगे, वहाँ आप जल्दी थक जाओगे, वहाँ आपको नींद आ जाएगी और आप वहाँ से भाग जाओगे।

*क्या आपका रोमांस विद लाइफ अभी भी चल रहा है, जारी है?
रोमांस विद लाइफ किताब आ चुकी है, मैं तो 6 किताबें लिख सकता था, इतना लंबा दौर चला है, चल रहा है। मुझे कहाँ कहाँ से फोन आते हैं, और उसकी तारीफ के बारे में बड़ी ऑनेस्ट किताब है। मेरे दिमाग में बातें हैं, मेरा फोकस बड़ा अच्छा होता है, अगर मैं किसी बात पर लग जाऊँ तो मैं गया काम से। ना खाने का होश, ना घर का होश, न पीने का होश।

*आपने बहुत सारी फिल्में बनाईं। एक ऐसी ही फिल्म है गाइड। लोग कहते हैं कि देव आनंद विद्रोही है। समय से बहुत पहले फिल्में बनाते हैं।
उसका फायदा हो रहा है। मेरी हर फिल्म उठाकर देख लीजिए आपको लगेगा आज की फिल्म है। ‘हम दोनों’ भी देखो आप, वही इमोशंस हैं जो हो सकते हैं, वही लड़ाई, वो जो आज करगिल में थी, वो उस बॉर्डर में भी थी।

*बहुत मुहब्बत करते हैं गाइड से आप।
नहीं, इतना ईगो नहीं है, लेकिन गाइड, मुझे उस पर गर्व है। कोई बना ले मैंने किसी को दोबारा बनाने दी? नहीं बनाने दी, कोई नहीं बना सकता, हिम्मत चाहिए पैसा भी चाहिए, डेयर डेविल बात भी चाहिए। एक स्टेज ऐसी आई थी गाइड के बाद, ज्वेलथीफ के बाद ही मैंने बाहर काम करना बंद कर दिया था। एक आध फिल्म ‘दोस्त’ की होगी। क्योंकि मुझे सिर्फ अपनी ही फिल्में बनानी थीं कि ये मेरे विचार हैं, किसी ने किया नहीं, मेरे प्वाइंट ऑफ व्यू हैं। फिल्म इज ए प्वाइंट ऑफ व्यू फॉर ए मैन व्हू मेक्स इट।

*आपको आइडिया कहाँ से आया गाइड का।
आइडिए तो रोज आते हैं, आप भी एक आइडिया हो, अगर मैं सोचूँ कि ये आशुतोष क्या चीज है, यार उससे तो मैं मिला हूँ, उसने मुझे कार्ड दिया। आज मेरे पीछे पड़ गया, मेरे पीछे आ गया, मुझे कमरे में घसीट लाया है, कोई इसमें खास बात है क्या? अगर मेरा दिमाग ये कहे कि इस पर फिल्म बनानी चाहिए तो मैं आप पे काम शुरू कर दूँगा।

*थक गए सारे लोग आपके साथ के।
थक गए ना स्वीकार कर लो। मेरा यह मानना है कि जब मेरी एक फिल्म बनती है तो दूसरी फिल्म का ख्याल आ जाता है। मुझे अब ये बनाना है, जब तक ये (सिर की ओर इशारा करके)तो फिल्में बनती जाएँगी। जब ये खत्म हो गया तो फिर ठीक है, बैठ जाओ आराम से घर पर।

*आपने जो अंदाज दिया वो शायद कोई और नहीं दे पाए, लेकिन अगर आपके समकालीनों के बारे में बात की जाए, दिलीप कुमार साहब के बारे में, राजकपूर साहब के बारे में।
देखिए, वो (राजकपूर) बहुत ग्रेट आदमी थे, बड़ा योगदान है उनका। राजकपूर साहब बड़ी जल्दी चले गए और दिलीप साहब को भी बहुत कुछ करना चाहिए था। वे एक महान अभिनेता हैं।

*कभी अपने आपकी किसी से तुलना की। आपस में कुछ प्रतिद्वंद्विता या कोई होड़ होती थी?
नहीं। भले लोगों से कोई तुलना नहीं। सबका सम्मान। मेरी किसी से कोई अनबन नहीं। बल्कि मुझे ख्याल ही नहीं आता। मैं तो अपने आप में ही मस्त हूँ। मुझे होश नहीं है, बेहोशी का आलम है, जिस बेहोशी में आप अपना काम कर रहे हो। वो काम जो दुनिया के सामने जाने वाला है। जिसका रिजल्ट आपके सामने आने वाला है। वो जो मस्ती हैँ वो दिलानेवाला ही जानता है।

*दिलीप साहब में एक सबसे अच्छी चीज क्या लगती है आपको?
मैं बहुत सालों से उनसे मिला नहीं हूँ। कई बार फोन करने की कोशिश की उनको पर मिलना मुश्किल हो जाता है। मैंने अपनी किताब की रिलीज में उनको बुलाना चाहा, फोन किया लेकिन मुझे कोई रिस्पॉन्स नहीं मिले थे, उनका कोई कसूर नहीं होगा, शायद वो बिजी होंगे। कोई ऐसी बात नहीं है लेकिन मेरे दिल में कुछ नहीं है।

*आपके बारे में कहा जाता है कि आपने जिन भी हीरोइनों के साथ काम किया आपको उनसे प्यार हो गया।
आपको मुझसे प्यार नहीं है क्या? आप मुझसे बातें कर रहे हो, अगर मुझे अपने लोगों से, अपने काम करने वालों से, अपने एक्टरों से, अपने म्यूजिक डायरेक्टरों से, अपने राइटरों से प्यार नहीं होगा तो मैं उनसे अच्छा काम लूँगा कैसे, वो मुझे अच्छा काम देंगे कैसे, इसे उस तरह से मत लीजिए।

*आपके बारे में लोग कहते हैं कि आप लेडीज मैन थे, चाहे वो 60 साल पहले थे।
यह आप लेडीज से पूछिए, अपनी धर्मपत्नी से पूछिए।

*इतने लोग कैसे प्यार करते थे आपको।
अगर 60 वर्ष गुजर गए तो जाहिर सी बात है कि प्यार करते ही होंगे। अगर प्यार नहीं करते होते तो मैं चार्जशीट क्यों बनाता, जवाब मुझे दे दो?

*कब तक चलेगा आपका ये कारवाँ?
जब तक चलेगा चलने दो… जब नहीं चलेगा तो बोल दूँगा आपको। जब सोचना बंद हो गया है तो आपमें फिजिकल एबिलिटी भी दम तोड़ देगी। तो जो एज है वो स्लो डाउन तो करती है.. मुझे भी करती है। सारी दुनिया को करती है। इस उम्र में भी मैं मानसिक रूप से काफी मजबूत हूँ। मैं अच्छा सोच रहा हूँ, मैं बेहतर लिख रहा हूँ। डायरेक्टर के तौर दर्शकों के नजरिए से अपने देश को जानता हूँ। मैंने बहुत यात्राएँ की हैं। तीन स्क्रिप्ट अमेरिका में, दो इंग्लैंड में, चार स्क्रिप्ट यहाँ। एक स्क्रिप्ट पर नेपाल में काम कर रहा था वहाँ विरोध शुरू हो गया। टेप को निकाल के फेंक दिया। फिर वापस आया एक और कहानी लिखी। दिमाग में बात आई पकड़ कर बैठ गया उसको। जब लहर आती है तो उसको पकड़ लेना चाहिए। अगर छोड़ दोगे तो भूल जाओगे।

हाँ सुरैया को मिस किया’

*आपने सुरैया का नाम लिया तो आप उन्हें मिस करते हैं अभी?
मिस करता हूँ इसलिए क्योंकि अच्छी लगती थी। हमने साथ-साथ अच्छा समय गुजारा लेकिन चली गई, जीवन का सत्य है जो चले गए उनका दुख था, किसी सुखी इलाके में चली गई। इसमें गलत क्या है, मैं अपने पिताजी को भी मिस करता हूँ, अपने भाई को भी मिस करता हूँ।

*आपकी वजह से उन्होंने शादी नहीं की?
ये मुझे मालूम नहीं, दुनिया कहती है, मैं भी उसके बाद नहीं मिला, मैं उससे शादी करना चाहता था, मैं नहीं कर सका, मैं रोया, मैं यंग था, अपने भाई के कंधों पर सिर रखकर रोया लेकिन फिर भूल गया यही होना था। जब सुबह सूरज चढ़ता है तो दिन वो नया आ गया, रात गई।

*सर, आप सुरैयाजी से शादी करना चाहते थे?
एक मोमेंट तो था, लेकिन शायद अच्छा ही हुआ। शायद मैं इस वक्त वो नहीं होता जो हूँ। कहानी का सारांश यही है कि जो कुछ होता है उसे स्वीकार करो।

*फिर कभी मुलाकात हुई आपकी।
मैं नियति में विश्वास नहीं रखता। इस बारे में कभी सोचा नहीं। कुछ चीजें होंगी जरूर। कई बार अनहोनी हो जाती है लेकिन समझ नहीं आती कि क्यों हुई है। ऐसे लोग मिलते हैं कि कहाँ से मिल गए पता नहीं चलता, लेकिन अगर ये चीज हुई है तो देखें इसमें क्या होता है, अगर नहीं हुआ है तो कुछ और बेहतर होगा।

*क्या चीज बहुत अच्छी लगती थी आपको सुरैया जी की।
उस वक्त परसेप्शन कुछ और थे, अब परसेप्शन कुछ और है। उस वक्त हम नए थे, वो बड़ी स्टार थीं। उनकी गाड़ी निकलती थी, लोग चिल्लाते थे, पीछे भागते थे, मैं तो अकेला था, स्टेशन से उतरता था, मैं पैदल उनके घर पर जाता था, लेकिन वह मुझे पसंद करती थीं। हर युवा लड़का, हर युवा लड़की को चाहता है। सुदंरता की सराहना होनी चाहिए।

*आप फ्लर्ट करते थे या वो फ्लर्ट करतीं थीं।
नहीं फ्लर्ट कभी नहीं था, ये तो रोमांस है, हमें लगा हम उनको अच्छे लग रहे हैं। उनको भी लगा कि उन्हें हमसे बात करने का मजा आ रहा है। फिर मैंने प्रपोज किया, उन्होंने हाँ कहा, मैं खुश था, पर उनकी नानी नहीं मानी।

*आपने प्रपोज किया था?
स्वाभाविक है, भारत में आमतौर पर लड़के ही लड़कियों को प्रपोज करते हैं।

*आप जब आखिरी बार उनसे मिलने गए तो आपने क्या सोचा था?
वो आखिरी बार ही था, उसके बाद आना-जाना बंद हो गया था, उसका मिलना बंद हो गया था, नाकाबंदी हो गई थी। उसको अनुमति ही नहीं दे रहे थे, टेलीफोन भी नहीं, तब मैंने महसूस किया कि अब नहीं।

*देव आनंद एक झटके में भूल गए उनको?
क्यों आप भूलते नहीं हो क्या, आप चीजें नहीं भूलते?

*वो आपको नहीं भूलीं, लेकिन आप उन्हें भूल गए?
मुझे नहीं मालूम। मैं एक बार समारोह में मिला था। काफी गहनें पहन रखे थे। हमने एक-दूसरे को हैलो कहा। कुछ चीजें याद आती हैं।

*सिर्फ हैलो कहा आपने एक-दूसरे को?
नहीं, हैलो कैसी हैं आप? क्या कर रही हो। काफी खुश थीं। किसी को कोई कॉम्प्लेक्स नहीं था।

*वो बहुत बीमार पड़ी थीं। क्या आप देखने गए?
नहीं मैं देखने नहीं गया था। मेरे पास समय नहीं था। और ऐसा नहीं कि मेरा जी नहीं था। लेकिन अगर मैं जाता तो प्रेस वाले उछालते।

*आपने अपने दिल को बहुत बड़ा किया होगा?
नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, मेरे दिल में बहुत कुछ है। समुंदर है। मैं समुंदर की हर बूँद से प्यार करता हूँ।

*अकेले में कभी याद नहीं आती आपको?
नहीं, बिलकुल नहीं। आप ऐसे इंसान के साथ बात कर रहे हैं जो वर्तमान में जीता है। अतीत में नहीं।

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