जय मां दुर्गे

जय मां दुर्गे !
-:कन्हैयालाल बरुण’
हे माँ दर्ुर्गे ! हे रणचण्डी !र्
र्सव शक्तिमय माता
आया तेरे द्वार दरस को
दे दो मुझे सहारारात अंधेरी राह कटिली
है जग की पगडंडी
डगर-डगर पर खड्ग लिए
हे महिषासुर की मंडी !तू नारी का रूप, गले में
रुण्ड-मुण्ड की माला
लाल-लाल जीहृवा से
लपके है प्रचण्ड ज्वाला

फिर क्यों सीता-सावित्री
जग में तडÞप रही है
कहाँ गई, वह शक्ति जिस पर
टिकी हर्ुइ यह मट्टी है –

दुष्टों का संहार करो
जो नारी-अस्मिता हरे
द्रौपदी का कर चीरहरण
जो बंशी का धुन टेरे

हे जगज्जननी, दर्ुगा मैया !
भद्रकाली, जगदम्बे !
बचे न कोई, रावण जग में
नाश करो हे अम्बे !

कहे ‘बरुण’ दर्ुगापूजा की
आयी रुत निराली
आरती मंगल गान करुँ
हे मां ज्योता वाली !

जीवन
पीताम्बरा उपाध्याय पीयूष
जो क्षण जीवन में मिल न सके
स्मृति के अंकुर खिल न सके
जो र्स्पर्श न तन को मिल पाया
मन में उनको जीया है।
क्या छलना है यह जीवन !
हठी बना शिशु सा पागल मन
ज्योति नयन में समा न पाए
पर मन उसका ही दीया है।
कोकिल का स्वर कर्ण्र्ााुहर में
उपवन है मन के गहृवर में
सांसो सी जो अपनी लगती
वही नायिका परकीया है।
फूल खिले हैं, गुलमोहर के
रंग झरे हैं, विखर-विखर के
मन को उन का मोद मिला
छवि लोचन ने पीया है।
जिन कांटो ने घाव दिए
चुभन भरे रिसाव दिए
उन को ही हाथों में लेकर
बार बार ब्रणको सीया है।
कलंकी, काठमांडू।
जल का ताण्डव
-:देवेन्द्र कलवार
ए उपरवाले तेरा कैसा है खेल निराला
सूरज उगने के बाद भी नहीं है उजाला
तुझ पे जब ग्रहण लग सकता है
तो इन्सान की क्या औकात
देखो मौत जिन्दगी से यहाँ
रोज करती है मुलाकात
तूने बनाया है, कैसा दस्तूर
जिन्दगी बाहें थामे खडी है
फिर भी इन्सान मरने को है मजबूर
तूने बनाया और तूने ही निगला
ये तेरी कैसी है लीला
बद्री-केदार जानेवाले बेचारों को
आखिर क्या मिला –
मौत का ताण्डव देख के भी
तूं क्यों है खामोश
देखते ही देखते आखिर
सब समा गए जल के आगोश
लगता है तेरे पाक जमीं पे
अधर्म बहुत बढÞ गए है
इसलिए तूने नयनों के अश्रु से
बारीश कर डाली
मठ मन्दिर धाम तीरथ बह गए
सब हो गए खाली-खाली
तूने अपनी ही बगिया उजाडÞ डाली
तू विगाडÞता है तो तू ही बनाता है
हर्ेर् इश्वर ! अब तु ही दिखा कोई करिश्मार्
धर्म को जिन्दा रख
उम्मीद पर है दुनिया कायम
समा जा लोगों के दिल में
इन के दुःखों की नहीं है कोई सीमा !!
हेटौडा- ४

index

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz