जरा इनकी भी सुनें…

हमारा प्रेम विवाह हुआ था । हमने शादी करते समय दोनों परिवारों को कोई जानकारी नहीं दी । काठमांडू के एक कमरे में विवाह सम्पन्न हुआ । उस शादी में सिर्फदो सौ ३२ रुपये खर्च हुए । दूल्हन को सौभाग्य के सामान खरिदने में और यारों को सामान्य नास्तापानी कराने में उतना ही खर्च आया था ।
– झलनाथ खनाल, अध्यक्ष नेकपा एमाले
-सौर्य दैनिक में)

बाबुराम सरकार ने आगामी निर्वाचन को प्रभावित करने के उद्देश्यसे महत्वपर्ूण्ा स्थानों में अपने लोगों को तैनाथ किया है । कार्यकर्ताओं का पालन-पोषण करने के लिए स्वरोजगार कोष से रुपयों का मनमाने ढंगसे वितरण किया है । निर्वाचन के लिए आर्थिक स्रोत जुटाने के लिए देश को दिर्घकालीन रुप से प्रभावित किया गया है । इसीलिए आगामी सरकार की पहली प्राथमिकता होगी- इन सारे निर्ण्र्ााें को खारेज करना ।
-डा. रामशरण महत, नेता- नेपाली कांग्रेस
-२६ फरवरी, काठमांडू में)

स्ट्यार्न्र्डड चार्र्टर्ड बैंक, शाखाओं के विस्तार से ही बैंकिङ सेवा विस्तारित होगी, ऐसा विश्वास नहीं करता है । बैंक में आनेवाले ग्राहकों की संख्या बढÞनी चाहिए, हम ऐसी मान्यता रखते हैं । यह बैंक गत २६ वषर्ाें से निरन्तर क्रियाशील है । यह प्रतिवद्धता सौ वर्षपहले से कारोबार करते आए भारत और चीन की प्रतिवद्धता से कम नहीं है ।
जोसेफ सिल्भानुस
सञ्चालक तथा प्रमुख कार्यकारी अधिकृत, स्ट्यार्न्र्डड चार्र्टर्ड बैंक, -कारोबार दैनिक में)

काठमांडू की पुलिस भी अफगानिस्तानी तालीवान की तरह हो गई है । इधर भी बर्दिधारियों की मनोंमानी शुरु हो गई है । अगर आपका डे्रसआँप उन्हें पसन्द नहीं आया तो और आप के कानों में कुण्डल झूल रहे हों तो आप रिफ्तारी में पडÞ सकते हैं । लेकिन जनाव पुलिस ! आजकल के जमाने में गुन्डा ‘रफटफ’ नहीं होते हैं । वे तो ‘सूटेड-बूटेड’ होकर भीआईपी कार में चलते हैं । इसीलिए सडक में पैदल चलनेवाले र्सवसाधारण के कान में छोटा-मोटा गहना दिखने पर उनको पकडÞना सम्भवतः उतना मुनासिब न हो ।
-केपी ढुंगाना, पत्रकार -फेसबुक में)

हमारे देश के नेता गण भाषण के क्रम में कुछ नहीं सोचते हैं । और मञ्च मिलते ही चालू हो जाते है । बिना विचारे कुछ भी बोल देते हैं और बाद में छप जाने पर पत्रकारों को दोष देते हैं । अच्छा होता, नेता लोग पहले सोचते और उसके बाद बोलते लेकिन दर्ुभाग्य की बात है, वे लोग पहले बोलते है फिर बाद में सोचते है ।
-सरिता गौतम,
सामाजिक कार्यकर्ता
-फेशबुक में)

कमजोर जल्द ही उग्र हो जाता है । आजकल प्रचण्ड और बाबुराम दोनों उग्र हो गए हैं । इनकी उग्रता अपनी असफलता पर है या सत्ता की मादकता पर – कहना मुश्किल है ! कहा जाता है कि विचार की दर्रि्रता होने पर सत्ता और सरकार में लोग चिपके रहना चाहते हैं ।
माधव ढुंगेल, विद्यार्थी नेता, अनेरास्ववियु
-फेशबुक में)

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