जरा इनकी भी सुनें…

मेरे लिए मन्त्री पद अनपेक्षित है। ‘मन्त्री हो जाउँगा’, ऐसा मैने सोचा भी नहीं था। यह मेरा पेशा भी नहीं है। इसलिए आज मैं जिस पद पर हूँ, ज्यादा ही आर्श्चर्य की अनुभूति कर रहा हूँ।
– माधवप्रसाद पौडेल -सञ्चार मन्त्री
-नागरिक दैनिक से)
पद, शक्ति और सुविधा के सवाल में माओवादी नेतृत्व वर्ग बर्ेइमान होते जा रहे हैं। खुली राजनीति में आने से पहले ही पार्टर्ीीध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल और डा. बाबुराम भट्टर्राई ने कहा था- ‘पार्टर्ीीे मूल नेतृत्व में रहे हम ५-६ लोग कभी भी सरकार में नहीं जाएंगे। दूसरी पीढ को सरकार का नेतृत्व करने के लिए भेजेगे हैं और हम लोग जनता की तरफ से निरन्तर निगरानी करते रहेंगे।र्’र् इमान्दारी से कहें- ऐसी प्रतिबद्धता कहां तक पूरी हर्ुइ है –
-अमित ढकाल, पत्रकार -सेतोपाटी डटकम से)

पहिचान, संघीयता, गणतन्त्र और धर्म निरपेक्ष विरोधी एमाले-काग्रेस और ज्ञानेन्द्र द्वारा गोप्य रुप में वितरित लाखों रकम लेकर आदिवासी जनजाति नेताओं के विरुद्ध चरित्रहत्या करने के उद्देश्य से प्रेरित होकर समाचार लिखनेवाले ब्राहृमणवादी और अतिहिन्दुवादी पत्रकार, खबरदार ! इस तरह जनजाति को उत्तेजित करने का काम न करें। नहीं तो … !
– आङकाजी शर्ेपा, जनजाति नेता -फेशबुक से)

संविधान बनाने के बहाने हाल जनता के अधिकारों की कटौती करते हुए और लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को छोडÞकर राजनीतिक दलों को किनारे करते हुए दूसरी संविधानसभा निर्वाचन की तैयारी हो रही है। आन्दोलन के आधार पर स्थापित शक्तिशाली संविधानसभा ने तो संविधान लेखन के मामले में कुछ नहीं किया तो अब होनेवाले संविधानसभा के निर्वाचन सेे क्या उम्मीद की जा सकती है – माओवादीका ‘जनसंविधान’ तो हवा-हवा ही हो गया।
– मुमाराम खनाल, राजनीतिक विश्लेषक -हिमाल खबरपत्रिका से)
शक्ति पृथकीकरण और निष्पक्ष न्यायापालिका की बात करनेवाले नेकपा एमाले के नेतागण अदालत में न्यायाधीश छनौट करते समय अपनी पार्टर्ीीे पक्षधर लोगों को ढूढÞते है। जिससे बाद में वे पार्टर्ीीे पक्षधर पार्टर्ीीे पक्ष में फसला करते-कराते हैं। इससे प्रमाणित होता है कि न्यायपालिका में भी निष्पक्ष न्यायाधीश नहीं जा पा रहा है। यह स्थिति बहुत ही लज्जाजनक एवं घातक है। ऐसी स्थिति रही तो जनता को कभी न्याय नहीं मिल सकता।
– वृषेशचन्द्र लाल, नेता, -फेशबुक से)
विज्ञापन से विद्यार्थी को आकषिर्त नहीं किया जा सकता। अगर विद्यालय और काँलेज स्तरीय शिक्षा प्रदान करता है तो विद्यार्थी अपने आप ही शिक्षण संस्थाको ढूंढÞ लेते हैं। अतिरञ्जित विज्ञापन करनेवाले और विद्यार्थियों का फोटो रख कर तडक-भडक दिखानेवाले काँलेज अपनी सीमा को लांघ कर कुछ विकृतियों की बढÞोत्तरी कर रहे हैं, जो दुखद बात है।
– ऋषिप्रसाद तिवारी, प्रिन्सिपल, पिनाकल एकेडेमी -नेपाल समाचारपत्र से)
मधेश में जितनी भी मोर्चाबन्दी हो, हम लोग सत्ता के लिए मोर्चाबन्दी करने के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन निर्वाचन के लिए और जनता की भलाई के लिए मोर्चाबन्दी करते हैं। और ‘मधेश एक प्रदेश’ की मांग कभी नहीं छोडेंÞगे। हमारी पार्टर्ीीजेन्द्र पथ में ही दृढता के साथ आगे बढÞेगी।
– हरिश्चन्द्र सिंह, -महासचिव
नेपाल सद्भावना पार्टर्ीीइमधेश डटकम से)
मेरी पीढ के युवा लोग, हमारे दो पडसियों देश के युवाओं की तरह तेजी से आर्थिक उन्नति करना चाहते हैं। वे ‘नेपाल की राष्ट्रीयता खतरा में है’ जैसे राजनीतिक नारा सुनकर ‘देश प्रेम’ के पीछे भागनेवाले नहीं है। … युवा जोश और क्षमता से पर्ूण्ा उन लोगों को जहाँ अवसर प्राप्त होता है, वहीं जाते हैं। इसीलिए बहुत सारे युवा लोग विदेश पलायन हो चुके हैं। यही अवस्था जारी रही तो ‘ब्रेन ड्रेन’ की जटिल समस्या से राष्ट्र उजाडÞ हो सकता है।
– नारायण श्रेष्ठ, पत्रकार -सौर्य दैनिक से)
‘यह सरकार निर्वाचन कराने के लिए सक्षम नहीं है’, ‘निर्धारित समय में निर्वाचन होगा या नहीं’ ऐसी बहस करके निर्वाचन को ‘डार्इभर्ट’ किया जा रहा है। यह ठीक नहीं है।
– र्सर्ूयबहादुर थापा, अध्यक्ष, राप्रपा
-नागरिक दैनिक से)

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