जरा इनकी भी सुनें…

चीन और सिंगापुर में राजनीतिक स्वतन्त्रता नहीं थी, लेकिन वहाँ आर्थिक विकास हुआ है। दूसरी तरफ भारत, फिलिपिन्स जैसे देशों में राजनीतिक स्वतन्त्रता होते हुए भी लम्बे समय तक आर्थिक विकास सम्भव नहीं हो पाया। बाजार के दृष्टिकोण से चीन की तरह भारत खुला नहीं है। राजनीतिक दृष्टिकोण से भारत की तरह चीन खुला नहीं है। इससे भी प्रष्ट हो जाता है कि सिर्फराजनीतिक स्वतन्त्रता से ही आर्थिक विकास नहीं हो सकता है। -कान्तिपुर दैनिक से)
– रवीन्द्र अधिकारी, नेता- नेकपा एमाले
नेपाल की सामाजिक संरचना ऐसी है, जहाँ पति जो कुछ करे, पत्नी उसको स्वीकार करती ही है। शादी के बाद पति के लिए औरत सब कुछ त्याग करती है। यहाँ तक कि उस के नाम और गोत्र भी परिवर्तित हो जाते हैं। ऐसी अवस्था में पति की विचारधारा के अनुसार राजनीतिक विचार परिवर्तन नहीं हो, यह तो हो ही नहीं सकता। कहने का मतलव है- पति की राजनीति से ही मैं कांग्रेस में आई हूँ। यहाँ तक कि शादी से पहले मुझे नेपाली कांग्रेस के बारे में कुछ भी पता नहीं था। -अनलाइन डटकम से)
आरजू राणा, नेतृ- नेपाली कांग्रेसर्
वर्तमान सरकार द्वारा ही अगहन में निर्वाचन होगा और राजनीतिक संकट अन्त्य हो जाएगा, ऐसा विश्वास करना, काठमांडू से तिब्बत की ओर जा कर काशी पहुँचने की बात जैसी है। अभी जिस तरह से निर्वाचन की बात हो रही है, यह तो नेपाल को सिक्किमीकरण करने का एक षड्यन्त्र हैं। हम मानते हैं- राजनीतिक निकास के लिए देश में चुनाव की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान सरकार से यह सम्भव नहीं है। अगर ऐसी परिस्थिति में चुनाव के लिए कोई जबर्जस्ती करेगा तो हम उस का सशक्त प्रतिकार करेंगे और निर्वाचन को असफल करेंगे। -३० अगस्त, माउन्टेन टेलिभजन में)
पम्फा भुसाल, प्रवक्ता- नेकपा-माओवादी
नेपाल के हर क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप है। इसी करारण देश का अर्थतन्त्र कमजोर हो रहा है। … लगानी वर्षअसफल हुआ है, हमारे कार्यकाल में ही आर्थिक वृद्धिदर कमजोर हुआ। उस समय मैंने कहा था कि लगानी वर्षमनाने से पहले उद्योग-व्यवसाय सञ्चालन के लिए वातावरण निर्माण होना चाहिए। लेकिन इस पर सरकार का ध्यान नहीं गया। सच कहंे तो तयारी के बिना और जल्दबाजी में की गई घोषणा के कारण ही लगानी वर्षअसफल हुआ है। -अभियान दैनिक से)
प्रदीपजंग पाण्डे, उपाध्यक्ष -नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ)
मैने कानूनी और्रर् इमानदारी के सभी काम किया है। यहाँ तक कि रेष्टुरेन्ट साफ करना और बर्तन धोना भी मेरा कार्य था। पत्रिका विक्रेता से लेकर घर-घर में पत्रिका पहुँचने का काम भी मैं ने किया है। मेरे दोस्त यही काम करते समय पत्रिका को डस्टविन में फंेकते थे, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया, इमानदारी के साथ अपना कर्तव्य निर्वाह किया। जिस के लिए पत्रिका विक्रेता के रूप में भी मै पुरस्कृत हुआ हूँ। इसलिए आप हमेशा अपनी इमान्दारी का निर्वाह करें। इससे ही हम अपने लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं। -अनलाइनखबरडटक से)
शेष घले, रियलस्टेट व्यवसायी तथा एनआरएन सदस्यइस समय दिल्ली नेपाल में सिर्फसक्रिय नहीं, अति सक्रिय है। इस को देखकर सोए हुए सिंह की तरह बेइजिङ भी अब जग रहा है। वासिङ्टन और ब्रसेल्स तो पहले से ही सक्रिय थे। जिसके चलते नेपाली राष्ट्रीयता और स्वाधीनता ध्वस्त हो रही है। लेकिन इस में दोष सिर्फविदेशियो का नहीं है, मुख्य दोषी तो हमारा राजनीतिक नेतृत्व ही है।
– श्याम श्रेष्ठ, पत्रकार -गोरखापत्र से)
नेपाल में चुनाव के लिए भारत द्वारा सिर्फ सहयोग ही नहीं हो रहा है, प्रायः सभी नेताओं को दिल्ली में बुलाकर चुनाव के प्रति सचेत भी किया जा रहा हैं। यद्यपि इस बात को लेकर कुछ व्यक्ति इस को भारतीय हस्तक्षेप और विस्तारवाद का आरोप लगाते हैं। लेकिन भारत, नेपाली राष्ट्रीयता के ऊपर कभी  प्रहार नहीं करेगा। क्योंकि भारतीय और नेपाली जनता के बीच सामीप्यता और घनिष्ठता होने से यह नौबत नहीं आएगी। दूसरी तरफ उत्तरी पडÞोसी राष्ट्र के कारण और सुरक्षा परिषद् की सदस्यता पाने के लिए भी भारत, नेपाल में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं कर सकता। -प्रतीक दैनिक से)
– वीरेन्द्रप्रसाद यादव, अधिवक्ता
हमारे देश की संघीयता को लेकर भारत और पश्चिमी देश अपनी अभिरुचि दिखला रहे हैं। यह र्सवविदित है। अब तो पडÞोसी मित्र चीन भी इस में दिलचस्पी दिखा रहा है। हम देख रहे है कि हमारे देश की संघीयता के लिए हम से ज्यादा उन लोगों को फिकर है। ऐसी गम्भीर वास्तविकता को छुपाकर समस्या समाधान नहीं हो सकता है। इसलिए उन लोगों की ऐसी चाहना कितनी जायज और नाजायज है, इस के बारे में राष्ट्रीय बहस की आवश्यकता है। -फेसबुक से)
असोरिता खनाल, स्वतन्त्र लेखिका
दश वषर्ीय जनयुद्ध मार्फ देश में बडÞे-बडेÞ आर्थिक विकास के सपने देखनेवाले हम जैसे लडाकू आज रोजगारी के लिए मलेसिया और खाडÞी देशों में भटक रहे है। इतना ही नहीं, सुन्धारा के लाँज में वेश्यावृत्ति करने के लिए भी बाध्य हैं। अब आकर पता चला है कि प्रचण्ड और बाबुराम की क्रान्ति तो मुल्क के एक छोटी सी नगरपालिका को भी बनाने की क्षमता नहीं रखती है। -नेपाली कांग्रेस में प्रवेश करते समय, २९ अगस्त कठमांडू में)
– यमबहादुर थापा, माओवादी के पर्ूवसैन्य कमाण्डर

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