जागो-जागो रे मधेश……जागो-जागो रे जवान।

गगेंशकुमार मिश्र, कपिलवस्तु , ७ फरवरी |
” भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी सन् 1857 में भड़की और भारत को आज़ादी मिली, सन् 1947 में।” ” नब्बे साल लगे भारत को, अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी से मुक्त होने में। वहाँ भी अंग्रेजों के चाटुकार, जिन्हें रायबहादुर की पदवी मिली हुई थी, अंग्रेजों के लिए जासूसी किया करते थे। अपने ही भाई,भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को अंग्रेजों के हवाले कर दिया करते थे।” मधेश आन्दोलन, जिस उँचाई पर पहुँच चुका है; किसी एक के लड़खड़ाने से मरने वाला नहीं है। कुछ समय के लिए बिखरता भले दिखाई दे, किन्तु ये वो आग है; जो अब बुझ नहीं सकती।received_1170099153030422
उठो, जागो ! मधेश के नौजवानों ! एक साथ मिलकर, डट कर सामना करो, इन फिरंगियों का। जैसे भारत की स्वाधीनता के लिए, चन्द्रशेखर आज़ाद, सरदार भगत सिंह, पंडित राम प्रसाद ‘ बिस्मिल ‘ ऐसे और बहुत से वीरों ने अपना तन, मन, धन देश को अर्पित कर दिया।
” मन छोटा ना करो, विघ्न-बाधा आती हैं, आती रहेंगी। डटे रहो, डटे रहो।” मधेश के वीर जवानों ! यह आन्दोलन अब तुम्हारे हवाले है। आन्दोलन के मशाल को प्रज्वलित करो। डरो नहीं, आगे बढ़ो, आगे बढ़ो।

 

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