जातपात के नाम पर सक्रिय हुए मधेश के जयचंद

सुजित कुमार झा
एटलांटा, जॉर्जिया, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका
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हिन्दी में एक मुहाबरा है “जयचंद तुने देश को बर्बाद कर दिया, गैरों को लाकर हिंद में आबाद कर दिया” ।  किसी भी धोखेबाज, देशद्रोही या गद्दार के लिए जयचंद का नाम मुहावरे की तरह प्रयोग किया जाता है । जयचंद 11वीं सदी में कन्नौज का राजा था, उस समय पूरा भारत सुरक्षित और हिन्दू देश था। जयचंद की बेटी थी जिसका नाम संयोगिता था, वहीँ उस समय अजमेर के राजा थे  पृथ्वीराज चौहान।
संयोगिता को  पृथ्वीराज को देख और उनके बहादुरी के गाथा  सुनकर  पृथ्वीराज से प्रेम हो गया, पृथ्वीराज भी संयोगिता से प्रेम करते थे, अब ये बात जब जयचंद को पता चली तो उसे बुरा लगा , उसे पृथ्वीराज से नफरत थी क्योंकि दोनों का गोत्र अलग था,अब जयचंद ने पृथ्वीराज का अपमान करने के लिए संयोगिता का स्वयंवर रचाया और सारे राजाओ को बुलाया पृथ्वीराज को छोड़कर, उसने दरवाजे पर पृथ्वीराज की मूर्ति बना दी , द्वारपाल के रूप में ताकि पुरे भारत के राजा पृथ्वीराज पर हंसे जैसे ही संयोगिता स्वयंवर में आई उसने सारे राजाओ को छोड़, पृथ्वीराज के मूर्ति को वरमाला पहना दिया और उसे ही पति मान लिया, मूर्ति के पीछे छुपे पृथ्वीराज सामने आये और संयोगिता उनके साथ स्वयंवर से भाग गयी इसके बाद जयचंद प्रतिशोध में जलने लगा ।
पृथ्वीराज से युद्ध करने का साहस जयचंद अकेले नहीं कर सकता था। उसने सोचा इस तरह पृथ्वीराज भी समाप्त हो जायेगा और दिल्ली का राज्य उसको पुरस्कार सवरूप दे दिया जायेगा। राजा जयचंद के देशद्रोह का परिणाम यह हुआ की जो मुहम्मद गौरी तराइन के प्रथम युद्ध में अपनी हार को भुला नहीं पाया था, वह फिर पृथ्वीराज का मुकाबला करने के षड़यंत्र रचने लगा।
उसी समय में मुहम्मद गौरी में भारत को लूटने और इस्लामी राष्ट्र बनाने के लिये हमला किया, पृथ्वीराज ने गौरी को बुरी तरह पराजित कर और  माफ़ कर वापस भेज दिया । जयचंद ने गौरी का साथ दिया और फिर हमला करने को मनाया, जिसके बाद 1192 में गौरी ने फिर हमला किया और इस बार पृथ्वीराज हार गए और गौरी ने उनका क़त्ल कर दिया । उसके बाद उनकी पत्नी संयोगिता के साथ हज़ारो महिलायों ने बलात्कार से बचने के लिय जान दे दी
जयचंद की वजय से पहले उसकी बेटी विधवा हुई बाद में मर गयी, फिर जयचंद को भी गौरी ने क़त्ल कर दिया ।
मधेश के पढ़ेलिखे  चंद दलालों ने अपने ब्यक्तिगत स्वार्थ हेतु जात-पात के नाम पर मधेशियों को तोड़ने का अपना असफल प्रयाश जारी रखा है। वे शायद जयचंद के बारे में सायद ना पढ़े हों, क्यूँकी उनका रवैया कुछ इस तरह का ही है । चाहे अमेरिका में एंटा हो या स्वतंत्र मधेश गठबंधन या फिर एन आर एम् । इन संस्थायों से जुड़े कुछ सदस्यों ने जात-पात के नाम पर ना जाने फिरंगियों से कौन सा समझौता किये हैं या करने बाले हैं ये वही जाने, पर इनकी दिन भर की एक तिहाई समय तो मधेशियों को तोड़ने बाली लेख – निबंध और ईमेल लिखने में जाती रही है।
मधेशी  एकता और अखंडता की रक्षा के लिए हर एक मधेशी को जात-पात व संप्रदायवाद से मुक्त होकर आपसी भाईचारा को मजबूत करने की जरूरत है।  देश व बिदेश  में घटित पिछले दो महीने की घटनाओं पर गौर किया जाये, तो एक बात स्पष्ट रूप से सामने आती है कि जात-पात और संप्रदायवाद के नाम पर हम सबों के बीच फूट डालने और आपस में लड़ाने की कोशिश की गयी है। कभी मुसलमान, तो कभी थारू, तो कभी छोटे बड़े जात के नाम पर भड़काऊ अभिव्यक्ति देने से पीछे नहीं हटने बाले लोग मधेश के पढ़ेलिखे वर्ग के रूप मे जानकार शायद आपके गुस्से का सीमा न हो, पर यही काला सच है ।
यह सभी जानते हैं कि मधेशी अधिकार के लिए संघर्ष जारी रखने की जरुरत है,  और हम मधेश आंदोलन की पीड़ा को आज तक भुला नहीं पाये हैं।
आज की तारीख में मधेश आंदोलन विश्व के मानचित्र में एक इक्कीसवीं सदी की सबसे उपेक्षित वर्ग  के रूप में अपनी पहचान बनाने में पूरी तरह सफल हुआ है।  यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मधेश की बढ़ती लोकप्रियता पर नेपाल सरकार को नागवार गुजर रही है।
नाकाबंदी के झूठे मुद्दे को लेकर भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर बदनाम कर मधेशियों पर अत्याचार जारी रखने का नेपाल सरकार का मास्टर प्लान ने घुटने टेक दिया।  नेपाली मीडिया के एकतर्फी समाचार सम्प्रेषण से जब मन नहीं भरा तो अपने सोशल नेटवर्क पेजों पर भी कुछ राजनेताओं ने मधेश प्रति का नफ़रत ज़ाहिर करते दिखे । और अब मधेशी एकता ने बुलंदियों को छूता नज़र आ रहा है।  मधेशी एकता की पहचान हमारी सफ़लता की कुंजी है। हमारा सामाजिक ताना-बाना इस प्रकार मजबूत धागों से बुना हुआ है कि हम सब मधेशी मिलजुल कर रहने में ही विश्वास करें तो अच्छा है ।  शायद विविधता में एकता की यही पहचान को दागदार करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोची समझी साजिश के तहत मधेश को अशांत करने की नाकाम कोशिश की जा रही है.
हम सभी  मधेशियों को आपसी एकता को मजबूत करने की दिशा में आगे आना होगा. बहरहाल, साजिश चाहे जिस किसी की भी हो, लेकिन हमें सूझ-बूझ से काम लेते हुए क्षणिक घटनाओं पर प्रतिक्रियास्वरूप आपा नहीं खोना है, क्योंकि नुकसान हमारा यानी मधेशियों का ही होगा।
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