जिन्दगी के साथ भी जिन्दगी के बाद भी एलआईसी

PR Misra DIR-CEO lic

एलआईसी के सञ्चालक तथा कार्यकारी निर्देशक पि.आर. मिश्र

पिछले दिनों देश ने जिस आपदा को झेला है उसने देश के हर क्षेत्र को सम्पूर्ण रूप से प्रभावित किया है । इससे बीमा कम्पनियाँ भी अछूती नहीं हैं क्योंकि बीमा करवाने का उद्देश्य ही होता है कि किसी भी विपरीत स्थिति में बीमा की राशि से सहयोग मिलना । कहते हैं, बीमा जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी आपका साथ देती है । आपदा के इस समय में बीमा कम्पनी की नीति क्या है इसी सम्बन्ध में एलआईसी के सञ्चालक तथा कार्यकारी निर्देशक पि.आर. मिश्र के साथ कविता दास की हुई बातचीत का संक्षिप्त ब्योरा
० इस विनाशकारी महाभूकम्प के बाद अब तक कितने क्लेम आए हंै ? क्लेम के विषय पर कम्पनी कैसी नीति अपना रही है ?
– देखिये, लोग तो बहुत कुछ कह रहे हैं क्लेम को लेकर । पर हम लोगों को अभी तक सिर्फ नौ क्लेम मिला है । जो कि हम पूरी तरह से सुलझा चुके हैं । कुल मिलाकर इस क्लेम में ५० लाख ८६ हजार रूपैया भुक्तानी कर चुके हैं । हम ये बता दें कि २५ तारीख को जो महाभूकम्प आया था उस के अगले दिन ही हमनें अखबार में सूचित किया कि जो भी प्रभावित हैं, वो हमसे सम्पर्क करें, हमलोगो को कोई भी कागजात नहीं चाहिये । सिर्फ सरकारी लिस्ट मे उसका नाम होना चाहिये और हमारा ब्रान्च मैनेजर जा कर पूछताछ करेगा और उसके बाद हम तुरन्त ही  लोग मदद के लिए तैयार थे । हमारी कम्पनी का पहला फर्ज बनता है जीवन बीमा करवाना । अभी और भी क्लेम आना बाकी है और उसके लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं । किसी जरुरतमन्द को विपत्ति के समय पैसे का राहत देना एक बड़ा काम है । भारत में यह भी माना गया है कि जो  बीमा कराता है वो मरता नहीं हैं । हम ये नहीं चाहते है किसी को भी बुरी परिस्थिति को झेलना पड़े । वो अपने बीमा के पैसे से अपना जीवन सुखमय बिता सके हमारा यही मानना है ।
० क्या जीवन बीमा की ओर से भी राहत बाँटने का काम किया गया है ? अगर किया गया है तो कहाँ और कितना किया गया है ?
– हमलोगों ने २५ अप्रील के  भूकम्प आने के  तीन दिन बाद प्रधानमन्त्री राहत कोष में १५ लाख रूपए का सहयोग किया है और हमारे कम्पनी के कर्मचारियों ने अपने दो दिनों का वेतन काट कर राहत कोष में जमा किया है । हमलोगों ने और बहुत सारे काम किए हैं । हम लोगों ने कुछ पाल मंगबाए जो जरुरतमन्दों को हमलोगो ने प्रदान किया ।
० कम्पनी में कोई क्षति तो नहीं पहँुची है ?
–दरअसल हमलोगों ने अपना दफ्तर ही बदल लिया हैं । इसलिए नहीं की वहां पर कोई क्षति हुई थी । पर मनःस्थिति ऐसी हो गयी है कि सबको ४ मंजिल पर रहना परेशान कर रहा था और बगल से जो नदी बहती थी वो हमारे लिए और भी भयावह वातावरण पैदा कर रहा था । और हम यह नहीं चाहते हंै कि हमारे ग्राहक को कोई भी परेशानी हो और कोई भी कर्मचारी डर के काम करे । इसलिए हमने दफतर बदल लिया हैं । अभी हम नक्साल में अपना शाखा ऑफिस और भगवती बहाल के पास हम अपना कॉर्पोरेट ऑफिस जल्द खोलने वाले हैं ।
० जीवन बीमा कम्पनियों में इस महाविपत्ति के बाद किस तरह की कठिनाई आई है ?
– मै ये कहना चाहूँगा कि विपत्ति  के बाद भी कम्पनी की हालत ठीक है चिन्ता की कोई बात नहीं है । काठमाडुं मे थोड़ी परेशानी तो है पर नेपाल के बाहर कुछ खास असर नहीं पड़ा है । ये भी कहना चाहता हूँ कि करीब ८ हजार से ज्यादा की मौत हुई है । उन मे से बस दो सौ या तीन सौ लोगों ने ही बीमा करवाया था । मेरे कार्यकाल के अन्तर्गत मंै ये बार बार बोलता आ रहा हूं की जीवन बीमा करवाएँ । जो लोग PR Misraकरोड़पति हैं उनके मृत्यु के बाद उनके परिवार को उतना असर नहीं पडेÞगा । पर जो गरीब लोग हंै वो कितने दिन राहत सामग्री से अपना जीवन निर्वाह कर पाएँगें । इसलिए सब को जीवन बीमा करवाना अत्यन्त जरुरी है । बस आप जीवन बीमा करवाना चाहते हैं तो एक कप चाय के रकम को बचायें ।  और साल भर मे ये तीन हजार तक आप बीमा में निवेश करते हैं तो जीवन बीमा आप को कुछ लाख रूपये तक का मदद जिन्दगी में देगा । बस मन में ये चाह होनी चाहिये कि अपने परिवार के लिए कुछ करे और मैं आप लोगों को दिलचस्प बात ये बताना चाहता हूँ कि नन–लाईफ का डाटा जो हमारे पास आया है वो १२ हजार के करीब क्लेम आया है । इससे ये पता चलता है की लोगों ने अपने जीवन से ज्यादा अपनी सम्पत्ति पर ध्यान दिया है । अपने जीवन महत्व के बारे में कुछ नहीं समझा ।
 ० अंत में, देश की जनता से बीमा से होने वाले फायदे के सम्बन्ध में कुछ कहना चाहेंगे ?
– अंत में मैं यह कहना चाहता हूँ कि हर वर्ग के लोगों को जीवन में कुछ करने के लिए जीवन बीमा करवाना बहुत जरुरी है । जरुरत के समय वह रकम उनके लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकती है । कुछ बुरा हो हम ऐसा नहीं सोचते किन्तु विपत्ति कह कर नहीं आती है और ऐसे समय के लिए अगर हम खुद को तैयार रखें तो यह दूरदर्शिता है । ईश्वर ना करे कि बीमित व्यक्ति के साथ कुछ बुरा हो किन्तु अगर ऐसा हो भी जाता है तो यही सोच आपको आगे बढ़ने में सहायता करती है । आप ना भी हों तो आपके परिवार को इसका फायदा होगा । इसलिए मैं यह चाहता हूँ कि नेपाल की जनता इसमें आगे आएँ और इससे लाभान्वित हों ।

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