जिले में फैलता पुलिस गुण्डाराज

नेपालगंज रिपोर्ट

विनय दीक्षित

विनय दीक्षित

१९ जुलाई २०१४ का दिन नेपालगन्जवासियों को अभी तक याद है, नेपालगन्ज का  व्यस्त बाजार माना जाने वाला स्थान त्रिवेणी मोड़ पर एक व्यक्ति का सर काटकर अपराधियों ने अलग कर दिया जिसका दाहिना हाथ करीब ३५ मीटर की दूरी पर शरीर से अलग मिला, एक महीने भी नहीं हुए जिले में एक ही रात में २ अलग–अलग हत्याएँ हुई तो इन्द्रपुर निवासी एक व्यक्ति को कुछ अपराधियों ने जबरदस्ती जहर खिलाकर मार दिया ।
इस तरह सिलसिलेवार रूप से हुई हत्या की घटनाओं ने एकबार फिर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए । जहाँ एक ओर निरन्तर हत्या की घटनाएँ होती रहीं वहीं गुण्डा राज समाप्त करने के लिए नेपालगन्ज पुलिस ने आपरेशन स्वीप चलाना शुरु किया । इस ऑपरेसन के दौरान भी विभिन्न अपराधिक गुटों के आपसी झड़प और अपहरण के मामले समाने आते रहे ।
पुलिस स्थानीय नगरवासियों को बेवजह अनुसन्धान के नाम पर गिरफ्तार करती रही, मामला तब सामने आया जब पुलिस के हत्थे एक पत्रकार भी चढ़ा । वडा पुलिस कार्यालय नेपालगन्ज ने आपरेशन के नाम पर सर्वसाधरण लोगों को गिरफ्तार किया, डाक्टर और इन्जिनीयर भी नहीं बख्से  गए । नमाज के बाद मुस्लिम युवाओं को पुलिस ने निरन्तर प्रताडि़त करना शुरु किया जैसे नेपालगन्ज में पुनः इमरजेन्सी की व्यवस्था लागु कर दी गई हो ।
रात में आवश्यक काम के लिए भी सड़क पर निकलना लोगों के लिए मुहाल होता रहा और फिर नगरवासियों ने अपनी चुप्पी तोड़ी । पुलिस के अत्याचार को रोकने के लिए बड़ी तादाद में लोगो ने जिला प्रशासन पहुँच कर पुलिस के खिलाफ नाराबाजी की । लोगों का गुस्सा इस तरह बाहर आया कि पुलिस इन्चार्ज दिपेन्द्र पाल की बर्खास्त की मांग को लेकर लोग आगे आए ।
जिला अधिकारी ने पीडि़त पक्षों से बात करते हुए घटना की नैतिक रूप में जिम्मेदारी ली और जिला डीएसपी सुशील सिंह राठौर को तत्काल जिला प्रशासन बुलाया । घटना को मध्यनजर करते हुए डीएसपी राठौर ने मानवीय त्रुटियाँ । पीडि़त देवेन्द्र पौडेल ने बताया कि पुलिस ने बिना पूछताछ किए गिरफ्तार किया । उन्हांने  कहा मैंने पत्रकार का परिचय दिखाया पुलिस ने एकबार छोड़ा और कुछ दूर जाकर फिर गिरफ्तार कर लिया ।
एक रात हिरासत में रहे रिहान खान ने बताया कि घरेलु सामग्री सहित घर जाते समय त्रिभुवन चौक से गिरफ्तार किया, स्थानीय सैफुल्ला खाँ सहित और पत्रकार पौडेल सहित १८ लोगों को पुलिस ने अनुसन्धान का शिकार बनाया । अपराध उसी तरह बढ़ता रहा, आपराधिक समूह निरन्तर अपना काम करते रहे, लेकिन पुलिस ने अनुसन्धान करना बन्द नहीं किया ।
डीएसपी राठौर ने बताया कि आपरेशन चलाने का मतलब ही लोगों मे पुलिस का दहशत कायम करना है । उन्होंने कहा इस समय मैं स्वंय टीम के साथ काम कर रहा हूँ समस्या को समाधान करने का तरीका यही नजर आया जिस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा । उन्होंने घटना की जिम्मेदारी लेते हुए आम लोगों से माफी मांगी ।
जिला अधिकार वेद प्रकाश लेखक ने पुलिस को होश हवाश में काम करने का निर्देशन दिया । आपरेशन के दौरान मौलिक हक को नहीं रौंदा जा सकता प्रजिअ लेखक ने कहा सर्वसाधारण लोगों की भावनाओं से खेलने का पुलिस को कोई हक नहीं । मदिरा सेवन के आरोप में रहे इन्चार्ज पाल का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक कारवाही का निर्देशन भी दिया ।
विशेष पावर और पहुँच के आधार पर दाँग से नेपालगन्ज पहुँचे इन्चार्ज पाल ने शुरुआती तौर से ही नगर के विभिन्न क्षेत्रों में अपना आतंक जारी किया । पुलिस ने लगातार आपरेशन चलाया लेकिन अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहा । पिछले साल त्रिवेणी मोड़ में हुए हत्या घटना में संलग्न अपराधियों का नाम तक पुलिस अनुसन्धान में बाहर नहीं आया । अपराधियों की तलाश के लिए जिला पुलिस ने ३ सौ पुलिस तैनात किया लेकिन रिजल्ट शून्य साबित हुआ ।
डीएसपी राठौर कहते हैं मृतक व्यक्ति की सनाख्त न होने के कारण अनुसन्धान में समस्या हुई, अनुसन्धान के लिए कुछ लिंक चाहिए उन्होंने कहा भारतीय क्षेत्र में मृतकों का विवरण और तस्बीर भेजा गया लेकिन कुछ पता नहीं चला ।
एक महीने पहले नरैनापुर में एक युवक का निर्मम हत्या हुआ, उसी रात सोनपुर में भी एक युवा के हत्या की घटना सामने आई । दोनों लाशों के बारे में पुलिस ने लावारिस कहकर फाइल बन्द कर दिया । अनुसन्धान के लिए जिला पुलिस ने स्थानीय थाना भगवानपुर और धनौली इन्चार्ज क्रमशः बसन्त शर्मा और भरत सिंह राठौर को जिम्मा दिया गया लेकिन रिपोर्ट लावारिस पर ही अटक गई ।
पुलिस के अनुसन्धान का सिलसिला कहीं एक दशक, कहीं एक वर्ष और कहीं महीना और दिन गुजर गए । पुलिस  हत्या किए गए लोगों के बारे में उनका नाम तक सार्वजनिक नहीं कर सकी । मृतकों के विवरण में भारतीय नागरिक होने की आशंका जताई गई है ।
व्यक्तिगत विवाद के कारण १५ दिन पहले इन्द्रपुर में एक युवक को कुछ अपराधियों ने जबरदस्ती जहर खिला दिया लेकिन मरने से पहले नेपालगन्ज मेडिकल कालेज में मृतक ने खुद के अपराधियों का नाम सार्वजनिक कर दिया । बयान के आधार पर पुलिस एक्सन में आई और नेपालगन्ज उप–महानगरपालिका २३ इन्द्रपुर निवासी ३२ वर्षीय खेमराज जरवट ने मौत से पहले अपराधियों का नाम बोल दिया ।
बयान के आधार पर पुलिस ने इन्द्रपुर निवासी चुन्नु जरवट और सेरबहादुर रोकाय को गिरफ्तार किया । घटना के मुख्य योजनाकार सम्सुद्दीन बेहना को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर  सकी ।
२०६२ साल फागुन २२ गते नेपालगन्ज निवासी एक सोना व्यवसायी परिवार के ५ सदस्यों को गला रेतकर हत्या कर दी गई थी, पुलिस घटना की जाँच को आपरेशन हन्ट का नाम दिया लेकिन १० साल बाद भी सवाल वही है कि आखिर अपराधी कौन ? नेपालगन्ज के एक होटल में ८ वर्ष पहले माजिद मनिहार की गोली मारकर हत्या की गई लेकिन मामला अभी तक आगे नहीं बढ सका । पुलिस अनुसन्धान के नाम पर लोगों को सिर्फ बेवकूफ बनाती रही ।

नेपाल में भूकम्पः बाल बालिकाओं की सुरक्षा में यूनीसेफ की सक्रियता देश में आए भूकम्प के पश्चात् अन्य परेशानियों के साथ–साथ एक सबसे बड़ी समस्या उभर कर आ रही है बच्चों के तस्करी की । करीब दो महीने पहले हुए भूकम्प के बाद कई ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं जो मानवता को शर्मिन्दा कर रही है । कहीं बालिकाओं को बेचा जा रहा है तो कहीं उन्हें जबरदस्ती अनाथआश्रम में रखकर अनैतिक कार्य करने के लिए विवश किया जा रहा है । विभिन्न संस्थाओं के द्वारा इसे रोकने और ऐसे बच्चों के उद्धार की कोशिश की जा रही है । ऐसे में यूनीसेफ के द्वारा किए गए उद्धार कार्य की सराहना की जानी चाहिए । यूनीसेफ ने अबतक २४५ बच्चों का उद्धार किया है । यूनीसेफ नीति और प्रत्यक्ष उद्धार के द्वारा बाल बालिका बिक्री को रोकने के लिए महिला बाल बालिका तथा समाज कल्याण मन्त्रालय और बाल बालिका समिति सहित गृह मन्त्रालय, नेपाल प्रहरी और अध्यागमन विभाग के साथ काम कर रहा है । यूनीसेफ के नेपाल प्रतिनिधि तोमो हुजुमी कहते है कि “नेपाल में आए विनाशकारी भूकम्प के पश्चात् ही बाल बालिका के बेचने का सिलसिला शुरु हो गया था । यह बात यूनीसेफ तक भी पहुँची और तभी से ये सतर्क हो गए । गरीबी और मजबूरी का फायदा सभी लेना चाहते हैं । जीविका विहीन अभिभावक बच्चों को बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं । उन्हें लगता है कि किसी भी तरह उनकी स्थिति में सुधार आ जाए । उनकी इसी बात का फायदा दलाल उठाते हैं और विभिन्न तरह के लोभ देकर बच्चों को बेचने के लिए तैयार कर लेते हैं । सुन्दर और सुरक्षित भविष्य के लोभ में अभिभावक बच्चे उनको सौप देते हैं और बाद में उन बच्चों की जिन्दगी नारकीय हो जाती है ।” बैसाख १२ गते हुए भूकम्प के बाद ही बच्चों की स्थिति दयनीय हो गई थी । २०५८ साल में अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार हर वर्ष नेपाल में १२,००० बच्चे पड़ोसी देश भारत में बेचे जाते हैं । इन बच्चों को सिर्फ देह व्यापार में ही नहीं बल्कि घरेलु कामदार के रूप में भी बेचा जाता है । यह प्रवत्ति भूकम्प के बाद और भी अधिक बढ़ गई हैं । देश जब जनयुद्ध से जूझ रहा था उस समय भी सुरक्षा और शिक्षा के लोभ से अभिभावक बच्चों को बालगृह में रखते थे । भूकम्प से पहले नेपाल में बालगृहों में १५,००० बाल बालिका थे । गैरकानूनी रूप से धर्मपुत्र धर्मपुत्री बनाने और दुव्र्यहार तथा शोषण की सम्भावना भी अधिक थी । ज्यादातर ऐसे बच्चों में वो बच्चे हैं जिनके या तो सिर्फ माँ हैं या पिता ।
यूनीसेफ नेपाल सरकार और अन्य साझेदार के साथ मिलकर बच्चों के व्यापार को रोकने के लिए निम्न रूप से काम करता आ रहा है – –बैसाख १२ में आए भूकम्प के बाद नेपाल सरकार ने धर्मपुत्र और पुत्री स्वीकार करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय अधिकार को स्थगित कर दिया है । साथ ही जेठ महीने के तीसरे सप्ताह से एक जिले से दूसरे जिले में स्थानान्तरण करने के लिए भी माता पिता या प्रमाणित अभिभावक रहना अनिवार्य कर दिया है । –नया बालगृह तथा अनाथालय दर्ता पर रोक लगा दिया गया है । बालगृह को अगर उसमें बच्चे हैं तो जिला से बाहर कहीं दैसरे जिला में ले जाने के लिए केन्द्रीय बाल समिति की पूर्व स्वीकृति लेनी आवश्यक है । जो स्थापित बालगृह हैं वह भी बिना सरकार के पूर्व स्वीकृति के नए बाल बालिका को बालगृह में नहीं रख सकते हैं । –बाल बालिका व्यापार को रोकने के लिए और इस सम्बन्ध में उठे प्रश्न के जवाब को देने के लिए गृह मंत्रालय तथा नेपाल प्रहरी के साथ मिलकर देश में ८४ प्रहरी कार्यालय और जाँच चौकी में संरचना तैयार की गई है । –माइती नेपाल नामक राष्ट्रीय गैरसरकारी संस्था ने यूनीसेफ के साथ सहकार्य कर के १२ जाँच केन्द्र खोले हैं तथा भारत और चीन की सीमा में व्यापार ज्यादा होने के कारण उनकी सहायता के लिए वहाँ ११ केन्द्र संचालन किया जा रहा है । इसी तरह शक्ति समूह नाम की एक दूसरी संस्था के साथ मिलकर भूकम्प से ज्यादा प्रभावित होने वाले १४ जिला में निगरानी तथा चेतना अभिवृद्धि कार्यक्रम चलाया जा रहा है । –यूनीसेफ ने सभी जानकारी के लिए बालबालिका सूचना व्यवस्थापन और संयोजन प्रणाली के द्वारा जिम्मेवार व्यक्ति पर यकीनकरने के लिए सभी सम्बद्ध व्यक्ति की सहायता भी कर रहा है । भारत के गृह मंत्रालय ने सीमा नियन्त्रण के लिए सतर्कता अभिवृद्धि करने के लिए परामर्श पत्र जारी किया है । इस के अतिरिक्त व्यापार रोकथाम के लिए भारतीय नागरिक समाज का परिचालन किया है । –भूकम्प के बाद बाल संरचना के विषय में सचेतना तथा सार्वजनिक सूचना प्रचार अभियान शुरु किया है । आज तक में भूकम्प प्रभावित १४ जिलों में परिवार से अलग होने वाली प्रक्रिया को रोकने के लिए तथा इस व्यापार सम्बन्धी सूचना सामग्री को मिलाकर तैयार किया गया ४० हजार पर्चा वितरण किया गया है । पर्चा प्रहरी चौकी , आन्तरिक शिविर, समुदाय तथा स्थानीय संस्थाओं में वितरण किया गया है । –नेपाल में कार्यरत २५ वायुसेवा कम्पनी ने अपने विमान द्वारा कितने बाल बालिका अपने अभिभावक के साथ यात्रा किए हैं या नहीं किए हैं इसकी जाँच कर रहे हैं । रेडियो नेपाल ने अभिभावक को लक्ष्य कर के कि अपने बच्चों को अकेले ना छोड़ें, शंकास्पद व्यक्ति अगर सम्पर्क करता है तो उससे सतर्क रहने, सावधान और उज्ज्व्ल भविष्य के निर्माण आदि बातों को लेकर सूचना प्रसारण कर रही है । जो ७० प्रतिशत जनसंख्या तक पहुँचेगी । यूनीसेफ ने १४१ बालमैत्री भवन के निर्माण में अपना सहयोग दिया है । इससे करीब १४,००० बाल बालिका जो भूकम्प के बाद मानसिक रूप से त्रस्त थे उसे सामान्य स्थिति में लाने में मदद कर रही है । –यूनीसेफ विद्यालय फर्कों नामक अभियान में बँटने वाले सामग्री एवं वैकल्पिक अध्यापन केन्द्र द्वारा पठन पाठन को निरन्तरता देने के साथ ही उन्हें शोषण और पीड़ा से भी बचाने का काम करती है । यूनीसेफ भूकम्प के पश्चात् विश्व के कई परिवार ने जो नेपाल के बाल बालिका को प्रयोजन कर के मदद करने की बात करने वाले अनाथ स्वयंसेवी पर्यटन के बारे में चिन्तित है । –जानबूझ कर बाल बालिकाओं को उनके माता पिता से अलग कर के अनाथाआश्रम में रखा गया है । यहाँ से उनको अन्य परिवार वाले अपना सकते हैं । होजुमी कहते हैं कि कई स्वयंसेवक अच्छे होते हैं किन्तु अन्जाने में वो इन बच्चों को पीड़ा दे रहे होते हैं । सतर्कता के लिए इन स्वयंसेवकों के बारे में पूरी जानकारी रखनी चाहिए । नहीं तो बच्चे यौन शोषण का शिकार हो सकते हैं । –इससे सम्बन्धित समस्याओं को ध्यान में रखकर यूनीसेफ पर्यटन और स्वयंसेवक के साथ मिलकर काम कर रहा है । ताकि गलत स्वयंसेवकों के हाथों में बच्चे न चले जाएँ । इस तरह यूनीसेफ बच्चों के भविष्य को लेकर चिन्तित है और अपनी पूरी कोशिश के साथ उनके भविष्य को बचाने में लगा हुआ है । यूनीसेफ की सम्पूर्ण गतिविधि बाल बालिका के अधिकार को सुनिश्चित करने और कल्याणकारी सेवा को ध्यान में रखकर होती है । यह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर १९० देश और स्थान में काम कर रही है । –हि.स.
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