“जीजिविषा से भरा एक देश” एक नेपाली नागरिक की नजरिए से भारत : बिम्मी शर्मा

26janvari

बिम्मी शर्मा, वीरगंज ,२६ जनवरी | किसी भी देश को जानने के लिए उस की विविधताओं को जानने के साथ ही उस देश की अवाम के अंदर की जीजिविषा को जानना और देखना बहुत ही खास होता है । पिछले महिने मैं अपने पडोसी देश भारत की यात्रा पर गई थी । वैसे मैं भारत बहुत बार गई हुं और बहुर जगह घुमी भी हुं । भारत मेरा पितृभूमि भी है । मेरे पिता यहीं पैदा हुए थे । ईस लिए ईस भूमि से मेरा गहरा लगाव है ।

पर ईस बार भारत आने का न्यौता मिला था । भारतीय विदेश मंत्रालय अंतर्गत बाह्य प्रचार महाशाखा के सौजन्य में गत वर्ष मई के महिने में नेपाल के हम १५ पत्रकारों की टोली को एक हप्ते के लिए दिल्ली और मूबंई घूमाने का बन्दोबस्त किया गया था । भारत की राजधानी दिल्ली तो मैं बहुत बार पहले भी गई हुं । पर ईस बार भारत सरकार की अतीथि बन कर गई थी । जहां हमें मान,सम्मान दोनों मिला पिछले कुछ महिनों में नेपाल और भारत के बीच जो सम्बंध बिगडे हुएं है उसको फिर से ट्रैक मे लाने या संवारने का काम भी हम पत्रकारों के ही कंधे पर था ।

नेपाल और भारत सदियों से एक दुसरे के पडोंसी और सुख दुख के साथी हैं । ईन दोनों देशों की सीमा न तो समुद्र, न पहाड न नदी से ही विभाजित हैं । समान भूखंड वाले दोनों देशों की सीमा में कोई तार, वार भी नहीं हैं । हजारों किलोमिटर लंबी सीमा में एक दुसरे देशों की अच्छी बातें ही शरहद नाघ कर नहीं जाती खराब बातें भी जल्द पहुंच जाती है । धर्म, संस्कृति, खानपान,
चालचलन और भेषभुषा में एक ही जैसा होने के कारण कभी-कभी फर्क करना मुश्किल हो जाता है की हम नेपाल में हैं की भारत में ? हिन्दू धर्मावलबिंयो के सभी बडे तीर्थ स्थल और चारधाम भारत मे हैं तो मां जानकी का जन्म स्थल और मंदिर, सिद्धार्थ गौतम (बुद्ध) , माउंट एभरेष्ट और अन्य हिम श्रृखंला के कारण नेपाल बिश्व भर में विख्यात है ।

नेपाल में जारी संविधान में मधेशी समूदायों की अधिकारों की कटौती के चलते असंतुष्टि के कारण मधेश आंदोलन अपने चरम पर था । आंदोलन अब भी हो रहा है पर उसका स्वरुप बदल गया है । नेपाली पक्ष ईस मधेश आंदोलन को भारत का
समर्थन होने का आरोप लगा कर भारत, मधेशी और नेपाल के दक्षिणी भूभाग में रहनेवालों को बिचकाता रहा है । ईसी बीच नेपाल में खाना पकाने वाला गैस, पेट्रोल और डिजल कि नियमित आपूर्ति में भारत की तरफ से रोक या कमी के
कारण नेपाल के सत्ता संचालक, संस्थापन पक्ष और नेपाल की बहुसंख्यक जनता भारत सरकार से आक्रोशित है ।

सरकारी स्तर पर दोनों देशों के बीच जो कुछ भी तनातनी चल रहा हो ईस सें हम को क्या लेना देना ? हम पहले देश के नागरिक हैं और उसके बाद पत्रकार । हमारी कोशिश होनी चाहिए की हम पूल बन कर दोनो  देशों के सम्बंध मे पूल बन कर
सुधार लाएं । दानों देशों के बीच हिमसंड सा जमा हुआ गंदगी या गुबार को हटाने और साफ करने का जिम्मा भी हमीं लोगों का है । भारतीय मंत्री और सरकारी अधिकारियों से बातचित्त के दौरान भी दोनों देशों के बीच की गतिरोध
और समस्याओं को मिल कर सुलझाने की बात हुई । प्रयास जारी है पर परिणाम तो भविष्य के गर्भ में ही है ।

जब भी मैं घुमने या अन्य कारण से भारत आई हुं यह देश मुझे चमत्कृत करता रहा है । वैसे भारतीय संस्कृति के बारे में बहुत कुछ तो हमें हिंदी सिनेमा ने बताया है । उन सभी बातों को अपनी आंखो के आगे देख कर अभिभूत हो जाती हुं
कई बार । जैसे मूबंई और यहां बनने वाले सिनेमा को पर्दे पर देखना अलग ही रोमांच पैदा करती है । पर उसी सिनेमा कि सुटिगं को अपनी आंखो के आगे होते देखना और कट, एक्शन और कैमरा की आवाज सुनना भी एक अलग ही अनुभव था । चाहे वह फिर मूबंई का समुद्र हो, गेट्वे आफ ईडिंया हो, होटल ताज हो या फिर वहां का फेमश भेलपूरी ही क्योें न हों । सब में एक मीठास और एक जाना पहचाना एहसास था जिसको बयां नही किया जा सकता ।

भारत विविधताओं के साथ ही विषमता से भरा देश भी है । सुंदरता और कुरुपता का यहां अनूठा संगम है । बिश्व के ही महासेठ धनाढय और अति विपन्न ईंसान को एक साथ भारत में ही देखा जा सकता है । अत्यधिक गंदगी और अत्यधिक सफाई भी भारत में ही दिखता है । अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक ठंड भी यहीं होती है । बिश्व प्रसिद्ध बिद्धान, साहित्यकार, दार्शनिक, नेता, अभिनेता, संत, महात्मा भी ईसी देश में पैदा हुए हैं तो चोर, उचक्के और ठग भी भारत की ही
पैदाईश हैं ।

बिश्व कि हर सुंदर वस्तु भारत मे है तो अत्यधिक जनसंख्या और गरिबी भी यहीं हैं । ज्ञान और विद्या की खान भारत ही है तो अज्ञानी और अशिक्षितोंका भी यह गढ ही है । भारत सिर्फ भिखमगों का ही देश नहीं है यह उन मेहनतकश  मजदूरों का भी देश है । जहा ईमानदारी से पाई पाई जोड कर लोग अपना घोंसला बनाते है । मूबंई की बहुमंजिला ईमारत जहां अपनी सफलता की कहानी कहती है । वहीं छोटे, छोटे झुग्गी, झोपडी और स्लम में रहने वाले ईस सफलता की कहानी
में अपने दुखों से चित्रकारी करते हैं और उसमें रगं भरते हैं ।

भारत अत्यधिक तेजी से विकास कर रहा एक विशाल देश हैं । जहां लोगं चलते नहीं दौडते और फलागंते है कि कंही जिन्दगी की दौड में पिछे न रह जाएं । यहां खाने, पिने और दैनिक उपभोग कि वस्तुएं नेपाल की तुलना में बहुत ही
सस्ता है । कपडे भी अपनी जेब और सुविधा के हिसाब से बहुत ही सस्ता और बढिया हैं । कंही जाने, आने के लिए बस, अटो, रिक्सा और मेट्रो ट्रेन ने नजदिक और सुगम कर दिया है तो दूर कि यात्रा के लिए भारतीय रेल सस्ता और सूलभ है ही । भारत में अंबानी जैसे धनाढय और एक गरिब भी अपने कम आय में भी जी रहा है । वह जी ही नहीं रहा मुस्कुराते हुए अपने जीवन और उगते हुएसुरज की ओर आशा भरी निगाहों से देखता भी है ।

ठेला, रिक्सा चलाता हुआ एक मेहनतकश इंसान जब अपनी बाहं से पसिना पोछंतेहुए चिल्लर या बांकी पैसे लौटाता है तब उसकी आंखो मे जो जीवन की लौ जलती हुई दिखती है । तब लगता है भारतको ईन्ही जीजिविषाओं वाले ईमानदार मजदूरों
ने अपने कंधे पर उठा रखा है । जो देश सालों, साल घूम कर और देख कर भी खत्म नहीं होता । जहां आप घूमते हैं तो ईतिहास भी आप के साथ पथ, प्रदर्शक बन कर आपके साथ घूमने लगता हैं । जहां संतो की वाणी हवा में गूंजती रहती
है । जहां की समुद्री लहरें बाहं पसारे आपका स्वागत करती है । उस समय लगता है समय ठहर गया है ।

सियासत और उसकी चाल भले लोगो और देशों को तोडती हो । पर वहां की अवाम और नागरिकों का मृदु और ईमानदार व्यवहार दो देशों के लोगों को जोडती है । वह भले ही होटल का साधारण कर्मचारी हो या किसी मदिंर का पूजारी ही क्यों न
हो । उसका अच्छा व्यवहार और ईमानदारी से ही हम उस देश के बारे में अच्छा अनुभव करने लगते है । क्यों कि कोई भी देश वहां के नागरिको से बनता और जाना पहचाना जाता है । खराबी और बुराई कहां नहीं है । मख्खी घाव और गंदगी
में ही नहीं बैठता, मख्खी तो मिष्ठान्न से भरे भंडार में भी भिनभिनाता रहता है ।

कोलम्बस ने भारत की खोज कि होगी । पर वर्तमान के भारत को उन प्रतिभावान और मेहनती हाथों ने बनाया है जिसने परतंत्रता दो सौ साल तक भोगा है । उन्हे मालूम है कि पिजंडा सोने का ही क्यों न हों वह है तो आखिर पिंजडा ही । दो सौ साल तक अग्रेंजो का गूलाम होने के बाद भारत को जो स्वतंत्रता मिली उसने भारत की उस आत्मा को छूआ है जो बंधन में तडप रही थी । बिश्व के सब से बडे लोकतात्रिंक देश में प्रजातंत्र नागरिक स्वतंत्रता के बिना फल, फूल नहीं सकता । भारत में जो स्वतत्रंता और स्वच्छंदता अनभूत होती है उससे लगता है कि पिंजडा भी जरुरी है ।

नेपाल जो कभी किसी देश का गूलाम नहीं रहा । ईसके अपने भौगोलिक बनावट के कारण यह कई कारणों से दूरुह, दूर्गम और दूर्लभ है । अपनी हिमाली सुदंरता से सैलानीयों का मन मोह लेने वाला नेपाल में राष्ट्रियता बस मंत्र की तरह ही
हो गया है । उस मंत्र का क्या मायने है, उसका प्रयोग किस तरह करना चाहिए यह पिजंडे से आजाद नेपाली कभी महसुस ही नहीं कर पाए । परतंत्र होने के बाद स्वतंत्र होने का जो मजा और फायदा है उसका असली स्वाद भारत में देखाजा सकता है । आजादी कहीं फिर से खो न  जाए ईसका डर हर भारतीय को हैंईसी लिए वह ऐसा कोई काम नहीं करता जो दुसरों की स्वतत्रंता पर खलल डालती हो । दिल्ली के हरे भरे पेड जिस तरह सभी को छावं देते है उसी तरह हर भारतीय अपनी नम्रता के छांव मे हर पथिक को लेने के लिए आतूर है । क्योंकि भारत जीजिविषाओं से भरा दुख, सुख से समृद्ध एक लौकिक देश है ।

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