जो मधेस के साथ खड़ा है मधेसी उसके साथ है : मुकेश झा

 

 

 

मुकेश झा, जनकपुर, १० जून | काँग्रेस,एमाले वा माओवादी द्वारा दिया गया सभी आश्वासन धोखा निकला : मुकेश झा

जो व्यक्ति या संस्था जितना बड़ा होता है उसका दायित्व और भी बड़ा होता है शायद यह बात नेपाली काँग्रेस भूल गया है। बड़े पार्टी का दायित्व नही निभाना लेकिन दम्भ दिखाना और सत्ता पकड़ने को नेपाली काँग्रेस ने अपना राजनैतिक लक्ष्य मान लिया है। बात मधेस मुद्दे की है, जहां एक तरफ नेपाली काँग्रेस अपने आपको मधेश की सबसे बड़ी पार्टी कहती है वहीं जब मधेस समस्या की बात होती है तो वह अपने आपको उससे अलग रख कर उस दायित्व को मधेशवादी पार्टीयों के तरफ सरका देता है। सिर्फ सरकाता ही नही, मधेस मुद्दे के मामले प्रतिपक्ष की तरह व्यवहार करने लगता है। अगर मुद्दे को लेकर दवाब कुछ ज्यादा हो तो यहां तक आरोप लगाने में पीछे नही हटता की मधेस में कुछ समस्या ही नही है, वहां अगर वास्तव में समस्या होता तो क्या इतनी बड़ी जीत हमे हासिल होती ? यही वक्तव्य और व्यवहार नेपाल के दूसरे बड़े पार्टी नेकपा एमाले की है, उसने तो और मधेसी को मधेस ढूंढने के लिए भारत के यूपी बिहार जाने के लिए तक कह दिया। इस पार्टी के तथाकथित बड़े नेता की बोली और व्यवहार से तो मधेशी इंसान भी नही है ऐसा प्रतीत होता है।

यह बात करें मधेशवादी दलों की तो कुछ समय पहले जब सारे मधेशवादी पार्टीयां एक थी तो उनका कहना था कि “वोट काँग्रेस, एमाले को देते हो, और अधिकार के लिए लड़ने को हमे कहते हो। लेकिन जब से मधेशवादी पार्टीयों का एकीकरण हुवा है तब से यह बात नही आई। अब सवाल यह उठता है कि क्या मधेसी जनता सिर्फ वोट देने और टैक्स देने के लिए ही इस नेपाल के नागरिक है या अधिकार के लिए भी ? जब वोट की बारी आती है तो काँग्रेस, एमाले, माओवादी, सब के सब मधेस को अपना “पीहर’ समझता है लेकिन जब अधिकार दिलाने की बात होती है तो मधेस को बोझ समझने लगता है। इसी लिए तो इस बोझ को हटाने के लिए, अधिकार से वंचित रखने के लिए चुनाव के बारे में गलत सलत प्रचारवाजी करने में तीनो पार्टीयां हर तरह से अपनी पूरी ताकत लगा देती है। सोचनीय विषय यह है कि मधेस ने “एक मधेस प्रदेश” को छोड़ दिया, मधेस के सीमांकन का मुद्दा किसी आयोग के तहत बनाया जाय, इस बात पर सहमत हो गया, ऐसा क्यों ? ताकि मधेस का न्यूनतम मांगे पूरी हो और मधेस में भी निर्वाचन हो। मधेस आंदोलन का सबसे बड़ी मुद्दा स्वायत्त मधेस एक प्रदेश था यह बात सबको पता है। जब मधेस ने नेपाल में तत्काल शान्ति और सुशासन स्थापना के लिए अपना सबसे अहम मुद्दे को कांग्रेस एमाले माओवादी के कहे अनुसार आयोग बना कर समाधान करने की बात मान लिया पर इन तीनो पार्टी ने आज तक मधेश को सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नही दिया। वास्तव में नेपाली काँग्रेस एमाले माओवादी द्वारा दिया गया आश्वासन, सही मायने में धोखा है। यह तीनों पार्टी के स्थानीय नेता कार्यकर्ता यह क्यों नही समझते कि अगर मधेस के मुद्दे का सम्बोधन और कार्यान्वयन हुवा तो सबसे ज्यादा फायदा उन्ही पार्टी को होने वाली है। अगर स्थानीय तह की संख्या बढ़ती है और उस जगह पर निर्वाचन होगी तो उसमें काँग्रेस एमाले माओवादी के उम्मीदवार भी तो निर्वाचन में हिस्सा लेंगे। अगर जनसँख्या के अनुसार निर्वाचन क्षेत्र घोषणा होती है तो मधेसियों का ही तो कांग्रेस, एमाले माओबादी पार्टीयों में पकड़ बढ़ेगी। अगर मधेस का माँग पूरा होता है तो कल के दिन में काँग्रेस के पार्टी अध्यक्ष एक मधेसी भी बन सकता है। अगर स्थानीय तह की संख्या बढ़ती है तो जो भी बजट आएगी उससे मधेस का ही तो विकाश होगा। मधेस के काँग्रेस एमाले माओवादी के स्थानीय नेता कार्यकर्ता को वर्तमान में मधेस के आंदोलन का साथ देना चाहिए क्योकि भविष्य में होने वाले लाभ के भागीदार यही होंगे।

अब जनता की आवाज के साथ काँग्रेस एमाले को भी एक ही आवाज बना कर आगे आना चाहिए क्योंकि मधेस वास्तव में काठमांडु में बैठे व्यक्तियों की नही मधेस में रहे लोगों की है। अगर काठमांडू में बैठे लोग मधेस को अपना दायित्व मानते तो जब मधेस में बाढ़ आती है तो मधेस के साथ होते, जब आग लगती है तब मधेस के साथ होते, लेकिन क्या कभी मधेसियों ने यह अनुभव किया है कि मधेस के तकलीफ में काठमांडू उसके साथ है ? शायद कभी नही। चलो तकलीफ में साथ नही दिया कोई बात नही, बल्कि इसके विपरीत जब भी काठमांडु मधेस के तरफ बढ़ता है , मधेस में कोई न कोई दुर्घटना करा के ही वापस जाता है, चाहे वह राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी का जनकपुर भ्रमण हो या एमाले का पूर्व पश्चिम यात्रा अभियान। काँग्रेस एमाले माओवादी के स्थनीय नेताओं को इन सारे बातों की जानकारी करवाना होगा और मधेस के नेताओं अधिकार कर्मी और वुद्धिजीविओं को करना होगा। अब यह बात अपने जहन से निकालना होगा कि “मेरा बाप कांग्रेसी था तो मैं भी कांग्रेसी”। अब व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर यह विचार स्पष्ट रूप से अपने अंदर रखना होगा जो मधेस के साथ खड़ा है मधेसी उसके साथ है ।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz