ज्ञानेन्द्र शैली का चुनाव होने जा रहा है : गंगा श्रेष्ठ

गंगा श्रेष्ठ, नेता, नया शक्ति नेपाल

गंगा श्रेष्ठ, नेता, नया शक्ति नेपाल

काठमांडू । २२ अप्रैल | सरकार ने आगामी वैशाख ३१ गते के लिए स्थानीय निर्वाचन घोषणा किया है । हम लोग भी चाहते हैं कि उस निर्वाचन में सहभागी बने । लेकिन सत्ताधारी राजनीतिक दल और निर्वाचन आयोग की चरित्र साफ नहीं है । अगर ऐसा होता तो आज चौतर्फी निर्वाचन का विरोध नहीं होता था ।
स्मरण रहे, ६८ राजनीतिक दल और सभी मधेशवादी शक्ति घोषित निर्वाचन का विरोध और बहिष्कार कर रहे हैं । अगर ऐसी अवस्था में जबरजस्त निर्वाचन किया जाता है तो उसको हम लोग स्वीकार नहीं करेंगे । दर्जनौं राजनीतिक पार्टी को निर्वाचन से वञ्चित कर किया गया निर्वाचन पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र द्वारा किया गया निर्वाचन जैसा ही है, जो प्रजान्त्रिक अभ्यास नहीं है । प्रजातन्त्र के नाम के किया गया विकृत अभ्यास है । वि.सं. २०४६ से पूर्व जो अभ्यास होता था, उसी तरह का अभ्यास आज हो रहा है । इसीलिए आज प्रजातन्त्र समाप्त करने का प्रयास हो रहा है, लोकतन्त्र कुण्ठित हो रहा है ।
हम चाहते है, चुनाव के लिए वातावरण बने । नयाँ शक्ति लगायत सभी दलों को चुनाव चिन्ह मिले । मधेशी मोर्चा के साथ सार्थक वार्ता करे और उस को भी निर्वाचन में सहभागी बनाए । तब ही निर्वाचन सम्भव हो सकता है । नहीं तो जितना भी प्रचार किया जाए, निर्वाचन शान्तिपूर्ण नहीं हो सकता । हिंसात्मक बन जाएगा ।
आज मधेश के ११ जिलों में निर्वाचन आयोग अपना काम नहीं कर पा रहा है । मतपत्र नहीं पहुँच रहा है । अगर वहां सेना परिचलन कर चिनर्वाचन करने की प्रयास हो जाता है तो जनता प्रतिकार में उतरेगी । इसीलिए सरकार और अपने को बड़ा राजनीतिक पार्टी कहनेवाले पार्टी, अपनी चरित्र को सुधार करें और सभी राजनीतिक शक्ति को निर्वाचन में सहभागी करावें । इसी में हम सभी का भलाई है ।
(वैशाख ७ गते काठमांडू में कुछ पत्रकारों के साथ हुई मुलाकात में नयां शक्ति नेपाल के नेता तथा प्रदेश नं. ३ के संयोजक गंगा श्रेष्ठ द्वारा व्यक्त विचार का संपादित अंश)
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