ज्येष्ठ नागरिकों को अपमानित किया जाता है : इ.चन्द्रेश्वर प्रसाद रौनियार

ब्रहमपुरी [सर्लाही ]में जन्में चन्द्रेश्वर प्रसाद रौनियार सेवानिवृत इन्जिनीयर हैं । उन्होंने २९ वर्षों तक नेपाल सरकार के विभिन्न विभागों में इन्जिनीयर के रुप में सेवा की । वर्तमान में वे सरस्वती राजनारायण प्रतिष्ठान के अध्यक्ष ,सेवानिवृत केमचारी परिषद के सलाहकार , रौनियार सेवा समिति के संरक्षक ,ज्येष्ठ नागरिक संघ प्रदेश स्तरीय के सलाहकार ,ज्येष्ठ नागरिक कल्याण समाज के क्रियाशील सदस्य एवं सारा बचत तथा ऋण सहकारी संस्था के संरक्षक हैं । हिन्दी में उनकी कुछ पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं ।सरकारी नोकरी की अवधि में प्रथम गोरखा दक्षिण बाहु ,दीर्घ सेवा पदक और ग्रेड सम्मान से सम्मानित भी हो चुके हैं । खासकर नेपाल में ज्येष्ठ नागरिकों की समस्याओं के बारे में इ .चन्द्रेश्वर प्रसाद रौनियार से बातचीत की ।प्रस्तुत है बातचीत का मुख्य अंश –

सामाजिक संस्थाओं में संलग्नता

सिविल इन्जिनीयर उत्तीर्ण करने के बाद सिंचाई विभाग के साथ -साथ नेपाल सरकार के विभिन्न विभागों में काम किया ।
अभी मैं सेवानिवृत हूँ और जनकपुर में स्थित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं जैसे -सरस्वती राजनारायण प्रतिष्ठान के अध्यक्ष ,रौनियार सेवा समिति के अध्यक्ष ,सेवानिवृत कर्मचारी परिषद के सलाहकार ,प्रदेश स्तरीय ज्येष्ठ नागरिक संघ के सलाहकार ,ज्येष्ठ नागरिक कल्याण समाज के क्रियाशील सदस्य तथा सारा बचत तथा ऋण सहकारी संस्था के संरक्षक हूँ । फिलहाल मेरे ही नेतृत्व में ज्येष्ठ नगरिकों के लिए ` नीड एसेस्मेन्ट` पर आधारित योग ,ध्यान ,डे- केयर और शिल्प विकास सम्बन्धी कार्यक्रम संचालित है ।

ज्येष्ठ नागरिकों की समस्याओं का समाधान हो

२०६८ की जनगणना के अनुसार नेपाल में ज्येष्ठ नागरिकों की वृद्धि दर ३.४ प्रतिशत है। ज्येष्ठ नागरिकों की संख्या ग्रामीण इलाकों में भी कम नहीं है ।ग्रामीण इलाकों के अधिकांश लोग विदेश जाते हैं और घर में सिर्फ़ वृद्ध -वृद्धा ही रहते हैं। उन्हें ही घर के सारे कामों का देखरेख करना पड़ता है ।लेकिन सम्मान के बजाय उन्हें अपमानित होना पड़ता है।
उमर के साथ ही आंखें कमजोर होना ,कान न सुनना ,बाल पकना ,हडियाँ कमजोर होना तथा विभिन्न प्रकार के बीमारियों से ग्रस्त होना आदि ज्येष्ठ नागरिकों की मुख्य समस्यायें हैं। इसी प्रकार उनकी आर्थिक अवस्था भी अत्यन्त दयनीय हैं । उनके साथ जो भी चल -अचल सम्पत्ति होती है वे अपनी संतानों को लालन -पालन ,शिक्षा -दीक्षा,शादी- व्याह आदि में खर्च कर देते हैं । अन्तिम अवस्था में उनके साथ कुछ भी शेष नहीं रह जाता है ।समग्रतः कहा जा सकता है कि उन्हें आर्थिक -सामाजिक एवं स्वास्थ्य जैसी समस्याओं को आजीवन झेलना पड़ता है ।अतः उनकी समस्याओं का अविलम्ब समाधान हो ।

मौजूदा संविधान में ज्येष्ठ नागरिक सम्बन्धी त्रुटियों में सुधार हो

संविधानतः ६० वर्ष की उमर वालों को ज्येष्ठ नागरिक कहा गया है । जबकि पेन्सन ७० वर्ष के बाद ही मिलता है । अतः पेन्सन भी ६० में ही मिलने की व्यवस्था होनी चाहिए ।सम्पत्ति भी ज्येष्ठ नागरिकों के अधीन में रहने का प्रावधान होना चाहिए। इसी प्रकार ज्येष्ठ नागरिकों का सर्वांगीण उत्थान व विकास हेतु अध्ययन- अनुसन्धान की व्यवस्था तथा प्रशासनिक सुरक्षा की भी व्यवस्था होनी चाहिए ।

घर से ही हो सामाजिक सुरक्षा की शुरुआत

ज्येष्ठ नागरिक प्रशासन व समाज से ही नहीं बल्कि अपने घर में ही असुरक्षित हैं ।अर्थात वे अपने बेटा ,पोता ,पत्नी ,बहू एवं अन्य परिजनों से असुरक्षित हैं ।
अतः ज्येष्ठ नागरिकों का मान – सम्मान व देखरेख की शुरुआत उनके ही घर से हो ।

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